कुछ कहती है ये होली




कुछ कहती है ये 'होली' 

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होली 'क्षमा' है 
होली 'मिलन' है
होली 'प्रेम' है
होली 'ऐकता' है |

दोस्तों कुछ दिन बाद होली का महापर्व पूरे देश में आनंद मनाया जायेगा, बीते हर साल की भांति|हर जगह दही हाण्ड़ी फोड़ी जायेगी जो कि ऐकता और आत्मविश्वास की शक्ति का प्रतीक है और वहीं दूसरी ओर आप कभी मथुरा बिहारी जी के मंदिर गये हों, तो याद कीजियेगा बिहारी जी के मंदिर की वो प्यारी होली जिसमें देशों की सीमायें टूट जाती हैं, दुनिया के कोने- कोने से सैलानी और भक्त-प्रेमी आये हुऐ होते हैं, वास्तव में नजारा देखने लायक होता है |सोचो ! भगवान कृष्ण जैसे प्रेमी, प्रेम और सदभावना को चरित्रार्थ कर देने वाले, ऐसे भगवान हमारी इसी हिन्दुस्तान की धरती पर हैं जिन्होंने पूरे समाज और दुनिया को प्रेम से साक्षात्कार कराया |आज भी उनकी भांति उनके भक्त होली पर होली के प्यारे गीतों पर लोग झूंमते-थिरकते एक - दूसरे को रंग लगाते दिखेंगें |कितना सुंदर त्योहार है ये होली |देखने में आया है कि लोग सारी पिछली कड़वाहटों को भुलाकर इसी दिन एक-दूसरे को रंग- गुलाल लगाकर सभी शिकवे-गिले मिटाते हैं |कभी सोचा है कि होली पर आखिर ! गुझिया ही क्यों पकवान के तौर पर बनती है ? चलिये बताते हैं, मैदे की दिखने में गोरी पूड़ी जो दिखने में गोरी और सुन्दर स्वच्क्ष नजर आती है और जब चखते हैं तो अंदर से दूध के अमृततुल्य मावे यानि खोये और मेवे कि और भी सौंधी खुशबू और सुंदर स्वाद भी आता है |तो बस होली हमको यह शिक्षा देती है कि होली के विशेष पकवान की तरह चरित्र हो हमारा जिससे हम जितने बाहर से अच्छे दिखतें हैं उतने अंदर हृदय से भी अच्छे हों| हमारी कथनी और कथनी में भेद ना हो जिससे कोई भी हमारे महान देश की संस्कृति और अंखण्डता पर किसी भी तरह का उपहास और प्रहार न कर सके | हम दूर देश पढ़ने भी जायें तो कभी अपने जीवनमूल्यों और भारतीय संस्कारों को न भूलें | हम हमारी मेहनत, लगन, सुन्दर स्वभाव, सभी को साथ में लेकर चलने की सोच और प्रभावशाली व्यक्तित्व से सारी दुनिया में खुद को साबित करें ना कि किसी सोर्टकट से | हमारे देश का ये गुझिया पकवान हम सभी को इतनी उन्नत शिक्षा देता है| जरा सोचिये कहाँ होगा ऐसा त्यौहार और ऐसा मीठा पकवान तो उत्तर बस एक ही है अपना हिन्दुस्तान | और देखो जहाँ सारी दुनियां की संस्कृति और सभ्यताओं सहित वहाँ के लोग आनंद से यहाँ रह रहे हैं बताईये कहाँ होगा ऐसा करूणामयी और सागर जैसे विशाल हृदय वाला देश |आज लोग सहिष्णुता पर सवाल उठातें हैं, और हद तो यह है कि 'भारत माँ की जय' बोलने पर सवाल, ये सब देख बहुत दुख होता है | कुछ लोगों को यही कहना चाहूँगीं कि हमारा देश हर धर्म की इज्जत बखूबी कर रहा है और करता रहेगा |हमारे देश में ज्ञान और प्रेम की पूजा होती आयी है | हमारे देश में माननीय डॉ अब्दुल कलाम जी राष्ट्रपति जी रह चुके और भारतरत्न भी रहेंगें हमेसा और देश दुनिया का हर बच्चा उनको प्यार करता है सम्मान करता है वो सच्चे मुसलमान थे और वास्तविक इंसान थे | हर मुसलमान गलत नहीं, पूरा पाकिस्तान गलत नहीं बस कुछ गिने- चुने लोग हर देश को लज्जित कर देते हैं बस निजि स्वार्थ में |इसलिये हर किसी को शक की नज़र से देखना तो उचित नहीं दोस्तों | अभी कुछ दिन बाद ट्वन्टी-ट्वन्टी हिन्दुस्तान पाकिस्तान के मध्य मैच चलेगा तो हम को खेल को खेल की दृष्टि से देखना चाहिये कोई युद्द की तरह नही | सोचो मनोरंजन भी अखाड़ा हो जाये तो क्या मतलब खेल की ऐकता की भावना का |इसलिये खेल को लेकर आक्रोशित होनेवाली मानसिकता में बदलाव होना बहुत आवश्यक है | इससे दिमाग की याददाश्त पर गहरा असर पड़ता है | हमको आक्रोशित होने की क्या आवश्यकता, खिलाड़ी पूरी कोशिश करते हैं अपना बेस्ट देतें हैं |हमको तो उनका उत्साहबर्धन करना चाहिये नाकि दबाब डालना चाहिये |
होली तो हमको रंगना सिखाती है कि बस रंग जाओ जैसा भी रंग हो चाहे वो खुशी का रंग हो या गम का पल, हमको रंग जाना है उसी में मुस्कुराते हुए अतिथि तो भगवान है उनको जीत मिले या हार हमको हर हाल में सम्मान ही देना है और फिर दिनभर रंगे होने के बाद शाम को नहा- धोकर सब मैल धोकर स्वच्छमन से सभी से मिलने जाते हैं | होली कहती है कि दिन कैसा भी बीता हो शाम तक सब शिके- गिले गुस्सा रूपी  मैल को धोकर खुद को अपडेट करो | नवीनता से फिर दूसरे दिन को खुशी - खुशी जियो | खुशी से याद आया कि संयुक्त राष्ट्र की सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशन नेटवर्क (एसडीएसएन) की ताजी 'वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट 2016' की 157 देशों की सूची में डेनमार्क सबसे खुशहाल देश और भारत 118 वें स्थान पर पहुंच गया | यह गिरावट संस्कारों की है, हमारी दकियानूसी मानसिकता की है , हमारी आगेंवाले की टांग खींचने वाली विकृत मानसिकता की है | हमारी हमारे अपनों की मदद ना करने वाली स्वार्थी मानसिकता की ही देन है जिसमें कोई भी कहीं खुश नही है | पैसा तो बहुत कमाया कमानेवालों ने पर एक दुआ न मिल पायी किसी कीमत पर | देश खुशहाली के मामले पिछड़ा तो बस आपसी सहयोग की प्रेम की भावना गुम हो जाने के कारण | आज लोग ऑनलाईन तो हुऐ पर हार्टलाईन नहीं हुऐ |बस यही विड्डम्ना हैं दोस्त की मदद करने वाले विचारों को आईये फिर से पोषित करते हैं |आईये एक बार फिर से शुरूवात करते हैं |भारत देश के लोग आज भी इतने अच्छे हैं कि वो मॉफ करना जानते हैं और फिर से एक बार हृदय से लगा लेना भी जानते हैं  | सबकुछ भूल कर मित्र बन जाना, यही कहती है अपनी होली | अब आप ही बताईये कि क्या हो सकता है पूरी दुनिया में ऐसा कोई प्यारा, प्यार का कोई त्योहार |ये सवाल खुद से करिये और आइये पुराने सम्बंधियों को भूले- बिसरे मित्रों से मिलिये प्रेम रूपी रंग - गुलाल से अपनी दोस्ती में खुशहाली और तरक्की के नये रंग भरिये |आईये होली मनायें प्रेम बरसायें | दोस्तों आप सभी को होली के प्रेमरूपी पावन त्योहार की बहुत - बहुत शुभकामनायें और हार्दिक बधाई |


ब्लागिस्ट
आकांक्षा सक्सेना
जिला - औरैया
उत्तर प्रदेश 
http://akaksha11.blogspot.com




















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