Monday, February 19, 2018

जानिये : कौन हैं पंकज भइया कायस्थ -


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''मैं किंग बनना नहीं चाहता बल्कि किंगमेकर बनाना चाहता हूँ।'' 
 - पंकज भइया कायस्थ कायस्थवाहिनी 'प्रमुख'


सभा सम्बोधित करते हुये 

समाज द्वारा मिले सम्मान से अभिभूत 






नमस्कार दोस्तों ! आप सभी जानते हैं कि हमारी भारतभूमि पावन देवी-देवताओं की जननी मानी गयी
है | यहाँ की पावन भूमि से न जाने कितने ही ऋषियों  - मुनियों,  विद्वानों, शूरवीरों व समाजसुधारकों ने जन्म लेकर अपने सुकर्मों से देश-दुनियां को उन्नत सोच के साथ उन्नत दिशारूपी श्रेष्ठ मार्गदर्शन और सर्वहित की उन्नतमानसिकता का परिचय देकर  हमारी भारतभूमि को धन्य किया है और जिनकी विजय, पराक्रम, संघर्ष गाथा युगों से आज तक वातावरण में जीवंत है क्योंकि शब्द अमर हैं। सत्य अमर है।  इंसान के सत्कर्म अमर हैं और इसी संघर्ष कड़ी में हम नाम जोड़ना चाहेगें : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वसम्मानीय शख्सियत पंकज भैया कायस्थ, कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख जी का। 

जानिये :  पंकज भइया कायस्थ कौन हैं - 



 पंकज भइया कायस्थवाहिनी प्रमुख 



पंकज भईया, देश के सबसे बड़े कायस्थ संगठन कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय के संस्थापक के रूप में बेहद चर्चित व्यक्तित्व हैं। इस संगठन की एकता, विराटता और व्यापकता, विश्वसनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंकज भइया  द्वारा स्थापित गठित यह संस्था आज विश्व के 49 देशों में कार्यरत है और निस्वार्थ सामाजिक विकास के कार्यक्रम संचालित कर पूरे विश्व में पीस एण्ड हैपीनेस, धार्मिक सौहार्द के नये कीर्तिमान गढ़ कर अपने देश भारत का परचम लहराने में सशक्त भूमिका निभा रही है । आज पंकज भइया के समाज को एकसूत्र में बांधने के अभूतपूर्व, अद्भुत, अकल्पनीय कार्य किसी तारीख,  तारीफ़ और परिचय के मौहताज़ नही है। आज के इन नवयुगनिर्माता और बेमिशाल सच्ची शख्सियत का  जन्म 11 जनवरी 1971 में हथियागढ़ बस्ती (उत्तर प्रदेश) में हुआ। इन्होंने MBA पूर्ण करने के बाद पहली जॉब- कम्पनी झंडू में क्षेत्रीय प्रबंधक रहे। फिर गोल्ड क्रास में नेशनल सेल्स मैनेजर बने और अन्त में ऐपको में DGM पद पर रहते हुये उन्होंने महसूस किया कि क्या भगवान ने हमें सिर्फ धनार्जन के लिये ही यह जीवन दिया है या फिर लोगों को उनके अधिकारों-लक्ष्यों के प्रति जगाने के लिये उनका जन्म हुआ। फिर क्या था उन्होंने नौकरी छोड़ दी और लोगों के हृदयतल पर अपनी दस्तक देने को निकल पड़े और लोगों को रोजगार देने के वास्ते उन्होंने नित्या बाजार की शुरुआत की। फिर 3G म्यूजिक की शुरुआत की।
       लम्बे संघर्षोंपरांत वर्तमान में बुलंद समाजसेवी छवि के साथ ही पंकज भैइया  BHML यानि बिग हैंड मार्कीटिंग लिमिटेड के चैयरमैन हैं और भारतीय जन जागृति संस्थान के संस्थापक और संयोजक हैं तथा 'सप्तऋषि' अवार्ड जो गिनीज बुक की तरह प्रारम्भ किया गया भारतीय अवार्ड है, के संस्थापक और आयोजक के रूप में विश्वविख्यात शख्सियत हैं। जिनका फेमस कथन है कि '' मैं किंग बनना नही चाहता बल्कि किंगमेकर बनाना चाहता हूँ।''  


          पंकज भइया का जीवन परिचय :

नाम - पंकज भइया 
पिता जी का नाम - श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव
माता जी का नाम - श्रीमती मंजू श्रीवास्तव
भाई - क्रमशः
नीरज श्रीवास्तव
संदीप श्रीवास्तव 
वरुण श्रीवास्तव
तरुण श्रीवास्तव

पत्नी - श्री मती प्रीती श्रीवास्तव
बेटी - अनुष्का श्रीवास्तव
बेटा - उत्कर्ष भईया
शिक्षा  - स्नातक (विज्ञान) 
मास्टर (विजिनेस एडमिनिस्ट्रेशन)
जन्म - शेखर सदन
        हथियागढ़ 
        बस्ती (उत्तर प्रदेस)

                  
            पंकज भइया का जीवन संघर्ष-  

पंकज भईया बचपन से ही करूण हृदयी व्यक्ति रहे। इन्होंने इंटरमीडिएट के छात्र जीवन से ही इंटरेक्ट क्लब (रोटरी क्लब) के साथ जुड़ कर समाज सेवा कार्य प्रारंभ किया। और फिर ससम्मान रोट्रेक्ट क्लब बस्ती यूथ (रोटरी क्लब) के संस्थापक अध्यक्ष चुने गये ।इसके बाद यह कदम न रूके और न ही थमें परिणामस्वरूप फिर जोनल प्लस पोलियो आफिसर बन कर जनसेवा की।  (जब प्लस पोलियो कार्यक्रम रोटरी क्लब चलाती थी। ) फिर कुछ दिन न्यू जनरेशन क्लब के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष रहे। इसके बाद इन्होंने शेखर कल्याण समिति की स्थापना की । जिसके साथ काम करते हुये भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से सम्मानित हुये । फिर छात्र यूआ दल के प्रदेश संरक्षक बने। इसके बाद प्रदेश स्तरीय क्रिकेट टूनार्मेंट कराते हुये शेखर कप हासिल किया। इनमें सब कार्यों को करते हुये इन्होंने कायस्थ महासभा का राष्ट्रीय सम्मेलन कराया और विश्व के सभी कायस्थों को एक होकर एक-दूसरे की मदद करने का आवाह्न किया। सर्वसमाजहित अपने देश की संस्कृति व सभ्यता और अखंडता को विश्व पटल पर लहरानेहेतु सर्वसमाज के अनेकों रूप - रंग और चरित्र को जीने के वास्ते अनेकों वीरों, महापुरुषों के जीवन चरित्र पर  रंगमंच पर उत्कृष्ट अभिनय के हस्ताक्षर उकेरने में सफल रहे और इप्टा के साथ जुड़ कर अनेकों स्टेज शो किये। इस सब के बाद पंकज भैइया गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत महाराजजी योगी आदित्यनाथ जी के सम्पर्क में आये जिनके साथ और समर्थन से वह हिन्दू युवा वाहिनीं बस्ती के संस्थापक अध्यक्ष बने। इतने बड़े पद पर पहुंच कर भी वह जमीन से जुड़े लोगों की मदद करते रहे। जब उन्होंने देखा कि देश में एक बड़ी संख्या इंसेफ्लाइटिस रोगियों की है। यह देखते हुये इन्होंने प्रदेश स्तरीय इंसेफ्लाइटिस कार्यक्रम कराकर जनचेतना जगाने में सफलता पायी। इसके बाद वह  संयुक्त हिन्दू मंच के राष्ट्रीय सचिव बने।फिर इसके बाद मनन्तवाली मइया पूजा के अध्यक्ष बने और इन सब जिम्मेदारियों को बखूबी पार्दशिता से निभाते हुये आगें बढ़ते गये। इसी क्रम में उन्हें एक और जिम्मेदारी मिली वह थी। बस्ती चित्रगुप्त मन्दिर के ट्रस्टी की जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से पूरा करते हुये मन्दिर बनवाया। यह देख कायस्थ समाज गदगद हो उठा और सभी के आभार पर वह  कायस्थ विकास परिषद के  राष्ट्रीय महासचिव बने। चूँकि पंकज भैइया सर्वसमाज के सम्माननीय व्यक्तित्व बन चुके थे और लोगों के प्रेम और आदर के परिणामस्वरूप वह बस्ती विकास मंच के अध्यक्ष बने।और हर पल समाजहित की भावना से ओतप्रोत उनके कदम हमेशा ही मानवीय हितों की रक्षा हेतु बढ़ते गये। उन्होंने किसी भी पद का न ही तिरस्कार किया और न ही अहंकार किया। और वह साफ पानी की झील की तरह बिना थके बिना थमे बस बहते रहे। इसी क्रम में नशामुक्ति कैंसरमुक्त राष्ट्र जनजागृति हेतु वह कैंसर ऐट सोसायटी के राष्ट्रीय सदस्य बने। फिर उन्होंने  वाटर डाट ओआरजी के समन्वक बनकर पानी की बर्बादी पर जनजागरूकताहेतु कई कार्य किये। इसके बाद वह दैवी आपदा समिति के सदस्य बने और दैवीय आपदा सेे पीड़ित लोगों की यथासंभव मदद कर मानवीय नैतिकता और इंसानियत का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने सोचा कि लोगों को स्वयं भी जागना होगा और अपने हक के लिये लड़ना होगा और इस सोच के साथ उन्होंने अपने जनहितकारी काम और व्यक्तव्य जारी रखे जिसेे लोगों ने काफी सराहा परिणामस्वरूप वह ह्यूमन राइट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। 

 सम्मान/अवार्ड :

पंकज भईया को उनके निस्वार्थ और श्रेष्ठ जनहितकारी कल्याणकारी कार्यों को देखते हुये
भारत सरकार के युवा एवं खेल मंत्रालय द्वारा समाजसेवी सम्मान। तथा देश का चौदहवाँ चित्रगुप्त सम्मान और अनेकों बार कायस्थ रत्न तथा
अनेकों बार कायस्थ कुलभूषण आदि देश-विदेश से अनेकानेक उपाधियों से अलंकृत विभूषित किया गया। पंकज भैइया का कहना है कि मेरा अवार्ड तो 
मेरे परिवार और शुभचिंतकों की दुआएं हैं जिनसे मैं कभी उऋण नहीं हो सकता। 
  

            पंकज भइया का जीवन लक्ष्य :

पंकज भईया के जीवन का लक्ष्य है
पीड़ित मानवता की सेवा और भगवान श्री चित्रगुप्त की सर्वसमाज में स्थापना। तथा हमारे कायस्थ समाज के पिछले गौरव की वापसी कराना 
   चाहे कुक से, नहीं तो हुक से। इनकी इच्छा है कि कायस्थ समाजिक
आर्थिक , राजनैतिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत हो। इसके लिए लड़ना और हक मांगने से बेहतर छीनना। 
पंकज भईया स्वंय को एक लाईन में कुछ इस तरह परिभाषित करते हैं। 
 कि '' मैं सफल व्यक्ति नहीं बल्कि गरिमामय व्यक्ति बनने का प्रयास कर रहा हूँ ।'' 


सभी के लिये पंकज भइया का विनम्र निवेदन  :

मेरे सम्मानीय कुलवंशजों अपने कुलदेवता भगवान श्री चित्रगुप्त जी के प्रति अपनी आस्था को दृढ़ कीजिये। आइये! मित्रवर संगठित हो जाइये और स्वच्छ,  सुन्दर,  सुदृढ़ और उन्नत भारत बनाने में अपनी तन-मन-धन, बुद्धि, विवेक से एक सच्चे कर्मयोगी पथिक की भांति सेवा दायित्व निभाते हुये राष्ट्रहित में अपना योगदान दीजिए। 

जो खुद को बदले
वह युग को बदले


मेरे युवा कुलवंशजों! 
तू  स्याही में जज्बात 
कलम में असर पैदाकर 
तू अपनी जमीं 
अपना आकाश पैदा कर। 
मांगने से कहाँ मिलती है जिंदगी 
तू अपना दिन-इतिहास पैदाकर । 
रोने से नही मिलता कुछ 
तू हक छीनने का हुनर पैदाकर। 
तू कायस्थ है 
खुद पर एतबार पैदाकर। 

- पंकज भइया 'प्रमुख'
कायस्थ वाहिनीअंतर्राष्ट्रीय


                  जय हिंद ✊
                  वंदेमातरम् 🇮🇳

           


ब्लाग टॉक :

                        पंकज भइया कायस्थवाहिनी प्रमुख 




सेलेब स्पीच : पंकज भइया कायस्थवाहिनी 'प्रमुख'  

भारत में ही नही विश्व के कई देशों में सफलतापूर्वक परचम लहरा चुकी कायस्थ वाहिनी ने समस्त कायस्थ कुलवंशजों में एकजुटता और राष्ट्रवाद को मजबूत कर उन्हें मुख्य धारा में लाने का जो बीड़ा उठाया है जिसकी धमक चहुँओर सुनी जा सकती है। वाहिनी प्रमुख कायस्थ पंकज भैया ने देश के पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न मिशाइल मैन सर्वसम्मानीय शख्सियत अब्दुल कलाम जी द्वारा पढ़े जाने वाला और सराहे जाने वाले ब्लॉग ''समाज और हम''  में दिये गए साक्षात्कार में बताया कि हमारा अपना कायस्थ समाज जबसे प्रभु चित्रगुप्त की भक्ति से दूर हुआ है तब से वह बहुत संकीर्ण, अव्यवहारिक और अविश्वासी, अकर्मण्य हो गया है। आज हमारे समस्त कुलवंशजों को चाहिये कि सर्वप्रथम वह भगवान श्री चित्रगुप्त जी की भक्ति शुरू करें और उनपर भरोसा कायम करें और प्रतिवर्ष चैत्र पूर्णिमा को भगवान चित्रगुप्त प्रगटोत्सव महापर्व मनायें ।जिससे आप सब पर भगवान चित्रगुप्त जी की कृपा बरसेगी और पूजा - पाठ के बहाने ही सही आप सब एक साथ आ बैठोगे और जब एक साथ आ बैठोगे तो सहयोग से सबकुछ मुमकिन है। अपने सभी कुलवंशजों जो देश-विदेश शदियों पहले बिखर चुके हैं बस उन्हीं सब बिखरे मोतियों को जोड़कर एक सुन्दर मालारूपी सुनहरा जगमगाता कल बनते देखना ही तो मेरा लक्ष्य है। मेरे सम्मानीय और प्रिय कुलवंशजों मैं पंकज भइया '' किंग बनना नही चाहता बल्कि किंगमेकर बनाना चाहता हूँ।'' जो कुछ समय के बाद यथार्थ में आप देखेगें। 

 पंकज भैया से बातचीत के कुछ अंश।


सवाल- आपके नाम पर बड़ा विवाद है कि आपने अपने नाम के साथ भइया और कायस्थ जोड़ लिया ?

जवाब- मेरा नाम ही पंकज भईया है।  जब हमने अपने कायस्थ समाज से यह अपेक्षा जाहिर की कई उप नाम होने की वजह से कभी कभी यह पता नहीं चल पाता की सामने वाला भी हमारा कुलवंशज है। इसी विचार से सबसे पहले अपने ही नाम के साथ कायस्थ लगाना शुरु किया।

सवाल- आप मूलतः कहाँ के रहने वाले हैं?

वाहिनी प्रमुखः मैं बस्ती जनपद जो की अयोध्या और गोरखपुर के बीच में है शेखर सदन हथियागढ़ का रहने वाला हूँ।

सवाल- आपका कायस्थवाहिनी बनाने का कोई खास कारण ?

जवाब- जब मैं पढ़ता था तभी अपने समाज के युवाओं को अन्य जाति के युवाओं को सामाजिक और राजनीतिक रूप से कमजोर देखता था तो पीड़ा होती थी कि संख्या बल होने के बावजूद एकता की कमी की वजह से हमारी यह दुर्दशा है जिसने मुझको भविष्य में कायस्थ समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। आज भी कुछ खास परिवर्तन नहीं आया है लेकिन अब संतुष्टि है कि कायस्थवाहिनी की मुहिम से समाज में अब एकजुटता की बयार बह निकली है जो कि एक बड़े परिवर्तन का संकेत है।


सवाल- कितने वर्ष हुए इन गतिविधियों में और खुद को इस अभियान में कितना सफल पाते हैं ?


जवाब -  इस गतिविधि से जुड़े 19 वर्ष हो गए। पहली उपलब्धि आज के 14 वर्ष पहले बस्ती में राष्ट्रीय कायस्थ सम्मेलन। दूसरी भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से सम्मान। तीसरी देश का चौदहवाँ चित्रगुप्त सम्मान सहित दर्जनों सम्मान। चौथी कायस्थ वाहिनी आज जो विश्व के भारत सहित 49 देशों में कार्यरत है।

सवाल- कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय का मुख्य उद्देश्य क्या है ?


जवाब-  यह भारत के कायस्थों की वह संस्था जो रोटरी क्लब के तर्ज पर चैप्टर सिस्टम से पूरे विश्व के कायस्थों को एक दूसरे से जोड़ने का प्रयास कर रही है। इसका मूल उद्देश्य है प्रभू चित्रगुप्तजी को सर्व समाज में स्थापित कराना। और कायस्थ समाज को एकसूत्र में बांधने के लिए हर संभव प्रयास करना।

सवाल- आपकी भविष्य में कायस्थ समाज के लिए क्या योजनायें हैं ?


जवाब- पहली योजना वर्ष 2019 तक 100 देशों तक कायस्थ वाहिनी का विस्तार, दूसरी योजना भारत के हर घर तक प्रभू श्री चित्रगुप्त की स्थापना। तीसरी अलग से चित्रगुप्त मन्दिर न बनाते हुए पहले से बने मन्दिरों में प्रभू की स्थापना। जिससे वो स्वतः एक दूसरे का सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक सहयोग कर सके। अंतिम कायस्थ समाज को राजनैतिक रूप से जागरूक कर नेतृत्व की तरफ अग्रसर करना।


सवाल-  कायस्थ समाज के नाम कोई संदेश ?


जवाब- समाज एक हो, अपने वास्तविक पहचान को जाने, हम प्रभू श्री चित्रगुप्त की सन्तान है देव पुत्र हैं। अपने देव के करीब चले, एकता लायें। कलयुग का एक मन्त्र है संघे शक्ति कलयुगे संघ मतलब साथ में, एकता में ही शक्ति है। जो हमको सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक सहित सभी मोर्चों पर विजयश्री दिला सकती हैं। '' हर झूठ पर प्रहार करेगी, कायस्थ वाहिनी इतिहास रचेगी'' और कायस्थों को उनका सम्मान वापस दिलाकर रहेगी।

जय चित्रगुप्त भगवान 🙏🏻💐
जय कायस्थ ✊

Published in newspaper







 Published in News portal 

http://www.tahalkanews.com/node/77




                       





... धन्यवाद.... 

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