Wednesday, March 9, 2016

हम भारत के लोग ?








        हम भारत के लोग ?

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ब्रिटेन में लागू है उनकी अपनी पूर्व निर्धारित लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन की विधायिका की संसदीय कार्यप्रणाली | फ्रांस में लागू है उनकी अपनी पूर्व निर्धारित लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था संचालन की उप विधायिका की उपसंसदीय कार्यप्रणाली | अमेरिका में लागू है उनकी अपनी पूर्व निर्धारित लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था संचालन की कार्यपालिका की राष्ट्रपतीय कार्यप्रणाली | चीन में लागू है उनकी अपनी पूर्व निर्धारित लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था संचालन की उपकार्यपालिका की उपराष्ट्रपतीय कार्यप्रणाली | रूस संघ की उनकी अपनी पूर्व निर्धारित लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था संचालन की न्यायपालिका की संघीय कार्यप्रणाली | भारतसंघ की अपनी पूर्व निर्धारित लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन की उपन्यायपालिका की उपसंघीय कार्यप्रणाली है | क्या भारत संघ में लागू है यह अपनी कार्यप्रणाली ? क्या भारत संघ में लागू नहीं है ब्रिटेन की विधायिका की संसदीय कार्यप्रणाली ? क्या भारत संघ आज भी ब्रिटेन का परतन्त्र नहीं ? क्या भारत संघ को अपनी पूर्व निर्धारित उपन्यायपालिका की उपसंघीय / संघात्मक कार्य प्रणाली लागू करने का राष्ट्रीय मानवाधिकार व कर्तव्य एंव भारतीय उत्तराधिकार व कर्तव्य प्राप्त नहीं ? तो फिर इस मुद्दे पर भारत संघ का राष्ट्रीय मानवाधिकार व कर्तव्य आयोग एंव भारतीय उत्तराधिकार व कर्तव्य आयोग चुप क्यों ? तो फिर इस मुद्दे पर भारत संघ देश के सभी न्यायाधीश एंव अधिवक्ता चुप क्यों ? तो फिर इस मुद्दे पर भारत संघ देश की सभी विपक्षी सरकारें चुप क्यों ? तो फिर इस मुद्दे पर भारत संघ देश के सभी प्रिंट एंव इलेक्ट्रोनिक मीडियीकार चुप क्यों ? तो फिर इस मुद्दे पर भारतीय जनता गूंगी, बहरी, अंधी क्यों ? क्या भारत संघ देश के प्रत्येक विवाहित, जन्में व मृतक स्वदेशी व विदेशी भारतीय लाभार्थी नागरिक को अपने विवाह जन्म व मृत्यु का पंजीकरण , बीमाकरण व लाईसैंसीकरण का अखण्ड़भारतवर्षीय लाभार्थी नागरिकता का प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र अनिवार्य एंव परमावश्यक रूप से भारत संघ की सरकारों ने अब तक प्राप्त करवाया है ? क्या हम भारत के लोग अपने पहिचान के सभी प्रकार के सरकारी व मतकारी दस्तावेजों में तथा अर्धसरकारी व कर्मचारी दस्तावेजों में एंव निजि व श्रमकारी दस्तावेजों में वैधानिक पंजीकृत, संवैधानिक बीमाकृत एंव कानूनी लाईसैंसीकृत रूप से अनिवार्य एंव परमाश्यक रूप से दर्ज हैं ? क्या हम भारत के सभी लोगों को अब तक की भारत की सभी सरकारों ने अपने जीवन का उद्देश्य पूरा करने हेतु अपनी इच्क्षा व योग्यतानुसार सरकारी आजीविका व मतकारी पैंसन तथा अर्धसरकारी आजीविका व मतकारी पैंसन एंव निजी आजीविका व श्रमकारी पैंसन तथा बुनियादी सेवायें एंव सुविधायें अनिवार्य एंव परमावश्यक रूप से निर्विवादित रूप से प्राप्त करवायीं हैं ? क्या हम भारत के लोग वैधानिक, संवैधानिक एंव कानूनी रूप से सभ्य लोग हैं ? क्या यही इस देश का अखण्ड़भारतवर्षीय परमोच्य सुरक्षा का अनुशासित न्याय है ? हम सब भारत के लोगों को सभ्य विकाशील नागरिक बनने का प्रयास करना चाहिये ताकि कोई यह ना कह सके कि हम भारत के लोग कैसे हैं | उपरोक्त सभी देशों में उनकी अपनी कार्यप्रणाली लागू है तो भारत संघ में अपनी संघीय / संघात्मक कार्यप्रणाली लागू क्यों नहीं ? अत: भारत संघ में भारत संघ की संघात्मक कार्यप्रणाली लागू होनी चाहिये ताकि हम सब भारत के लोगों का जीवन आनंदवादी, शिष्टाचारी एंव न्यायी तथा विशेष एंव सामान्य राष्ट्रीय उच्चन्यायिक समृद्दिशाली संरक्षित तथा भारतीय सर्वोच्च न्यायिक वैभवशाली आरक्षित एंव अखण्ड़भारतवर्षीय परमोच्य न्यायिक सुरक्षित व अनुशासित प्रेम से व्यतीत हो सके | ताकि भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रनाथ दामोदरदास मोदी जी की संकृति, समानता व शान्ति की पुनर्स्थापना के  बसुधेव कुटम्बकम के उद्देश्य को नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस जी का संघात्मक कार्यप्रणाली का मिशन पूरा कर सके|देश-दुनिया को डिवाइड एण्ड रूल की जरूरत नही, यूनाइट एण्ड रूल की जरूरत है |


ब्लागिस्ट
आकांक्षा सक्सेना
जिला - औरैया
उत्तर प्रदेश













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