सभ्य भारतीय समान नागरिक आचार संहिता पर मचा है घमासान.....




सभ्यभारतीय समान नागरिक अाचार संहिता पर मचा घमासान

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विश्व में विश्वव्यापी अमीरों का विश्व व्यापार संगठन एक ऐसा विश्वव्यापी काम कर रहा है जो विश्व के प्रत्येक देश में गरीबी को मिटाने के लिये हर तरीके से गरीबों को ही मिटाने में न जाने कब से लगा हुआ है | इस संगठन की गैरअंतर्राष्ट्रीयकृत निजी स्विस बैंक है जिसकी कोओपरेटिव बैंक के नाम से शाखायें विश्व के सभी देशों में सभी जगह मौजूद हैं जिनमें सभी देशों के सभी अमीर लोग अपने जीवन के टैक्स चोरी का बकाया काला धन बहुत बड़े पैमाने पर जमा करते हैं जिससे यह संगठन अपना मिशन पूरा करता चला आ रहा है |
     चूंकि भारत गरीब व अशिक्षित किसानों एवं मजदूरों का एक कृषि व मजदूरी प्रधान देश है |भारत में भरण पोषण का कृषि किसानी एवं मजदूरी के सिवाय कोई अन्य मजबूत विकल्प नही है |भारत की मूल अर्थव्यवस्था कृषि किसानी व मजदूरी आधारित है जिसकी तथा छोटे, मध्यम एंव बड़े उद्दोगों की भी वर्तमान में बहुत दयनीय दशा है |
      भारत ने विगत हजारों वर्षों से स्वदेशी लोगों की एंव विदेशी डचों, पुर्तगालियों, यूनानियों ,मुगलों एंव ब्रिटिश के अंग्रेजों की विभाजनकारी एवं विनाशकारी,धोखाधड़ी के षड़यंत्र की बदनियति एंव बदनीति की विषमदर्शी व अपारदर्शी कानूनों के जरिये असमानता की गुलामी सही है और आजादी से लेकर अब तक भारत विगत 70 वर्षों से स्वदेशी लोगों की भी असमानता की गुलामी सहता आ रहा है |
   भारतीय संविधान में समानता का अधिकार मौजूद है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में सन् 1949 से ही सभ्य भारतीय समान नागरिक अाचारसंहिता का प्रावधान दर्ज है | सन् 1949 में ही पश्चिमी देशों ने भारत को विश्व की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सामिल होने को कहा था | परन्तु पश्चिमी देशों के विरोध के बाबजूद भी तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी ने चीन की पुरजोर पैरवी कर प्यूपिल्स रिपब्लिक ऑफ चीन को विश्व की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ब्रिटिश, अमरीका, रूस, फ्रांस के साथ सामिल करवा दिया था यह सोचकर कि चीन, भारत के हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा करेगा | परन्तु इसी चीन ने सन् 1950 में भारत के तिब्बत पर अपना कब्जा कर लिया और सन् 1962 में इसी चीन ने भारत पर हमला कर दिया और इस युद्ध में चीन से भारत हार गया | अब चीन पाकिस्तान पर हाथ रख कर भारत को असुंतलित किये हुये है |
     सन् 1949 से लेकर अब तक सभ्य भारतीय समान नागरिक आचारसंहिता का क्रियान्वन भी रूका पड़ा है और यह मामला वर्तमान में भारत के केन्द्रीय विधि आयोग के पास विचाराधीन पड़ा हुआ है | भारत के केन्द्रीय विधि आयोग ने भारत सरकार से एवं भारतीय नागरिकों से अपने कुछ सवालों का जवाब मांगा है | भारत की वर्तमान केन्द्र सरकार ने अपना जवाब बाजरिये शपथपत्र दे दिया है | इस जवाब पर भारत के कुछ मुश्लिम संगठनों के पुरूषों ने अपनी ही मुश्लिम महिलाओं को बुद्धिमत्ता में, मुस्लिम पुरूषों से कम आंका है | ऐसे मुस्लिम पुरूष, अपनी ही मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की गुलामी से स्वतंत्र, आजाद व मुक्त नहीं करना चाहते है |
       विश्व के सभी धर्मों के लोगों को यह सत्य
स्वीकारना ही होगा कि जीवविज्ञान के अनुसार महिलाओं की उत्पत्ति समसंख्यक 48 कोशिकाओं से है और पुरूषों की उत्पत्ति विषम संख्यक 47 कोशिकाओं से हैं | इसी लिये महिलायें विषम परिस्थितियों में भी सम रहती हैं और पुरूष सम परिस्थितियों में भी विषम रहते हैं | महिलाओं की भाषा समदर्शी एवं पारदर्शी न्यायिक व्यवहार की होती है और पुरूषों की भाषा विषमदर्शी,अपारदर्शी कानूनी सिद्धांत की होती है | समदर्शी एवं पारदर्शी न्यायिक व्यवहार महिलाओं के द्वारा संचालित होते हैं और विषमदर्शी एवं अपारदर्शी कानूनी सिद्धांत पुरूषों के द्वारा संचालित होते हैं | समदर्शी एवं पारदर्शी व्यवहारिक न्याय महिलाओं की व्यवहारिक भाषा से संचालित होता है तथा विषमदर्शी एवं अपारदर्शी सिद्धांतिक कानून पुरूषों की सिद्धांतिक भाषा से संचालित होता है | सभी लोगों को समदर्शी एवं पारदर्शी व्यवहारिक न्याय तभी प्राप्त हो सकता है जब सिद्धांतिक कानून भी समदर्शी एवं पारदर्शी व्यवहारिक हों | इसलिये समदर्शिता, पारदर्शिता, व्यवहारिक न्याय एवं सैद्धांतिक कानून तथा बुद्धिमत्ता के मामले में महिलायें, पुरूषों से अधिक बुद्धिमान एवं श्रेष्ठ होती हैं |
     दुनियाँ के सभी धर्मों के प्रत्येक स्त्री व पुरूष को यह सत्य भी स्वीकार करना चाहिये कि आपसी सामंजस्य बनायें रखने एवं एक दूजे का आशय समझने के लिये, एक दूजे से, एक दूजे की ही भाषा में वार्तालाप करना चाहिये |देश दुनियां की जितनी भी सभ्यतायें पुरूषों ने सृजित की हैं उनका विकास एवं  विनाश महिलाओं के सहयोग एवं असहयोग के कारण ही हुआ है |
      इस देश व दुनियाँ के प्रत्येक व्यक्ति को यह भी मालूम होना चाहिये कि जब कोई नवजात शिशु संतान अपने माँ से जन्म लेती है तो उस समय उसकी माँ के आंचलों में दूध नहीं होता उसकी भूख मिटाने, रोने से बचाने, आजीवन प्रसन्न रखने एवं जीवित रखने के लिये उस समय मौजूद उस नवजात शिशु संतान की माँ का दर्जा प्राप्त माँ जैसी यानि कर रिश्ते की या मैत्री की या संस्कृतिक सम्बंधों कि शिशुवान माँसी प्रसन्नचित्त होकर अपने आंचलों का अमृतमय दूध सबसे पहली बार पिलाती है जैसे माता देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण को यशोदा ने पिलाया था तो वह नवजात शिशु संतान सभ्यमानवीय मानवता के सृजनशील गुणमूल्यों से भर जाती है और वह जन्मजात् सदा प्रसन्नचित्त रहने वाली नेकनियति व नेकनीति की नेक व एक इंसान एवं भगवान द्वारिकाधीश श्री कृष्णचन्द्र बासुदेव जी के समान बन जाती है जिनकी नजरों में रिश्तों के तथा मैत्री के व सांस्कृतिक सम्बंधों के सभ्यमानवीय गुण मूल्य हुआ करते हैं | जिनके रहते व्यवहार एवं सिद्धांत संतुलित रहते हैं | इस प्रकार माँ के हाथों में संतानउत्पत्ति की शक्ति है परन्तु उस संतान को नेक इंसान व एक भगवान बनाने की शक्ति उसकी माँसी के हाथों में है यदि वह अपने मानक का कर्तव्य पूरा करे| जब से यह प्राविधान अवरूद्ध हुआ तब से सभी धर्मों के धर्म मानवधर्म एवं मानवता का पतन हो गया |यह कुछ और नही यह किसी षड़यंत्रकारी का पूर्वनियोजित मानवता के साथ किया गया धोखाधड़ी का षड़यंत्र है | परन्तु  जब किसी नवजात शिशु संतान को जन्मजात ही पशुओं का दूध पिलाया जाता है तो वह पशुता के गुणों से भरपूर शैतान व हैवान बन जाती है जिसकी नजरों में रिश्ते के, मैत्री के व सांस्कृतिक संम्बंधों के सभ्य मानवीय सृजनशील मानवता के गुणमूल्य नहीं होते जिनके रहते कोई भी चैन अमन से नहीं रह सकता | ऐसे ही सिर के बल उल्टे पैदा होने वाले पशुता के गुणों से भरपूर लोगों को नियंत्रित किये जाने वास्ते और उन्हें यह सीधी बात आसानी से समझायी जाने वास्ते समदर्शी एवं पारदर्शी संतुलित न्याय एवं कानून की तथा सभ्य भारतीय समान नागरिक आचार संहिता की जरूरत पड़ी | इसीलिये न्याय एवं कानून की शक्ति की देवी महिला के हाथ में न्यायतुला दी गयी |
       मानवता को पशुता में बदलने का काम किसी ऐसे धोखाधड़ी के षड़यंत्रकारी ने करवाया है जो अपने जीवन का टैक्सचोर व इस कालेधन का जमाखोर है जो अपना कालाधन देकर अपने ही जैसे धोखाधड़़ी॒ के षड़यंत्रकारियों के द्वारा अपने व अपने अमीरों के हित में तथा गरीबों के अहित में अपने ही जैसे पुरूषों को निर्वाचित, चयनित व मनोनयनित करवाकर उनके द्वारा अपने व अपने जैसों के हित में विषमदर्शी, अपारदर्शी, असंतुलित, विभाजनकारी,विनाशकारी कानून गरीबी के मिटाने के नाम पर गरीबों को ही मिटाने के लिये बनवाता रहता है| यह पूर्वनियोजित धोखाधड़ी का षड़यंत्र भारत में विगत हजारों वर्षों से अब तक जारी है|
     भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँघी जी ने इसी असमानता को मिटाने के लिये भारत की सभी निजी बैंको का राष्ट्रीयकरण करवा दिया था और वह विश्व व्यापार संगठन की निजी बैंक का भी जिसकी शाखायें विश्व के सभी देशों में चालू हैं उसका भी अंतर्राष्ट्रीयकरण कराना चाह रहीं थी जिससे कि किसी भी देश का कोई भी नागरिक किसी भी देश की किसी भी बैंक में अपने जीवन के टैक्सचोरी का कालाधन जमा न कर सके | उन्होंने भारत के सभी राजा महाराजाओं के प्रिवीपर्स समाप्त करवा दिये थे और पूर्वी पाकिस्तान को बांग्लादेश बना दिया था |ऐसा देख सम्बंधित षड़यंत्रकारी ने अपना कालाधन देकर उनके विरूद्ध भारत में राष्ट्रव्यापी आंदोलन करवा कर सत्ताहीन करवा दिया था तथा उन्हें कारावास करवा दिया था| जब वह पुन: देश की प्रधानमंत्री बनी तो उन्हीं के अंगरक्षकों को कालाधन देकर उन्हीं के द्वारा श्रीमती इंदिरा गाँधी जी की हत्या करवा दी थी | इस प्रकार यह काम जो उनके पिता पं.जवाहर लाल नेहरू न कर सके वह उनकी पुत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने कर के दिखा दिया था और उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि महिलायें बुद्धिमत्ता में पुरूषों से कम नहीं है |
     अत: भारत के केन्द्रीय विधि आयोग को चाहिये कि वह सम्बंधित षड़यंत्रकारियों के षड़यंत्र को दरकिनार करते हुये सभ्यभारतीय समान नागरिक आचार संहिता में तथा देश के सभी कानूनों में भारतीय संविधान में दिये समानता के अधिकार के तहत भारतीय नागरिकों के विवाह,जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण एवं लाईसैंसीकरण के अधिनियमों का अनुपालन अनिवार्य एवं परमावश्यक रूप से सुनिश्चित दर्ज करवायें तथा इनका उल्लंघन इस संहिता में व देश के समस्त कानूनों में अक्षम्य अपराध दर्ज करवायें तथा इन अधिनियमों का उल्लंघन गैर जमानती संज्ञेय अर्थ व मृत्यु दंडनीय अक्षम्य भारतीय अपराध दंड संहिता में व इनका सैशन ट्राईल भारतीय अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में दर्ज करवायें | जिससे कि भारत में व पूरी दुनिया में बालिकाओं व महिलाओं के विरूद्ध होने वाले सभी प्रकार के अपराध समाप्त हो सकें तथा देश व दुनियाँ में फैली अमीरी व गरीबी की असमानता तथा अन्य सम्बंधित बिषमतायें समाप्त हो सकें |देश दुनियां में जो भी अपराधीकरण एवं बेरोजगारीकरण है वह सब इन्हीं अधिनियमों के उल्लंघन के कारण है |
     इस प्रकार भारत की संकृति, समानता व शांति को स्थापित रखे जाने के लिये देश के प्रत्येक विवाहित, जन्मे व मृतक भारतीय नागरिक के द्वारा इन अधिनियमों का अनुपालन करवाया जाना भारतीय जनजीवनहित में एवं उनके सर्वोच्च न्यायहित में अनिवार्य एवं परमावश्यक है|जिससे कि वर्तमान में सभ्यभारतीय समान नागरिक आचार संहिता पर मचा घमासान समाप्त हो सके |भारत की लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था भारतीय संविधान के तहत ही संचालित होनी सुनिश्चित है |भारत की लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था किसी भी धर्मग्रंथ के अनुसार संचालित होनी सुनिश्चित नहीं क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है |

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम

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