Thursday, January 7, 2016

जब काटा गया हाँथ.......तब और सध गया हाँथ.....!!

                   

 शांति की रेखायें

............़़़़...................




दोस्तों इस नये साल में आपसे पुरानी बात करने का कोई मन नहीं पर बहुत मेल मिलते हैं कि मुझे लिखने की शक्ति कहाँ से मिलती है? हर किसी के क्यों और कैसे का जवाब आज मैं जरूर दूँगी तो दोस्तों लिखती तो बचपन से ही हूँ |जब सामने किसी दुखी, बीमार,गरीब विकलांग भिखारी को देखती तो तब उन दिनों हम भी बहुत साधारण थे बड़ी मुश्किल से गुजर होती थी तो उसकी कैसे मदद करते| मगर मन बहुत करता कि उनको सीने से लगा लूँ |तो क्या करती कि कॉपी पर एक कहानी बनाती उनको कहानी का पात्र बनाती और खुद को सुपर हीरो बनाकर उनको ढेर सारी खुशियाँ दे डालती और उनको अमीर और अच्छा इंसान बना देती लिख डालती |एक दिन एक बहुत बीमार बाबा को खाना तो दे आयी पर उनकी खाँसी के लिये मेरे पास कुछ नहीं तुरन्त घर आयी और कहानी में मैंने उन बाबा को बिलकुल ठीर कर दिया बचपन ही था जो ठीक लगा सो कर दिया |लगभग दो-तीन दिन बाद वो बाबा दिखे और बोले बेटा तेरे टिफिन के खाने में जादू था मैं ठीक हो गया और हाँ रात को सपने में कोई आया जिसने मुझे सीने से लगा लिया भगवान थे शायद मैं देखो बिल्कुल ठीक|ये सुनकर मैं चौंक गयी बिल्कुल मेरी कहानी वाला सुुपर हीरो सीने से लगाकर हर दर्द हर लेने वाला जो लिखा सच हो गया| ऐसा कई बार हुआ तो एक अनजाने डर से कहानी लिखना बन्द कर दिया |



पर जब लोगों की बनावटी मुस्कुराहट देखती तो मन नही मानता कलम लिखने पर मजबूर हो जाती| तो फिर से लिखना शुरू किया और बहुत लिखा |ताज्जुब था कि मेरे ही एक परिवारी जन को मेरा लिखना अच्छा नहीं लगा |उनको ये लगता कि कहीं मेरा सारी दुनिया में नाम न हो जाये कहीं मैं उनसे ज्यादा धनवान न हो जाऊँ|और उनकी इस चिढ़ ने कब नफरत का रूप धारण कर लिया ये तो उनको भी शायद पता नहीं चला| फिर तो उनपर मानो राहू सवार हो गया| और उनकी ईर्स्या चरम पर थी| फिर उन्होनें प्रसाद में नशा खिलाकर अपना मन पूरा भी कर लिया|मैं हल्के बेहोशी मैं थी और उन्होनें मेरे हाँथ की नश काट डालने का प्रयास कर डाला और कहा कि मर गयी तो कह देंगें होगा किसी के साथ चक्कर-मक्कर |बाद में बदनामी भी ब्याज में,बहुत बढ़िया|
    हम अपना रक्तरंजित हाँथ देख बुरी तरह घबरा गयी कि आखिर! मेरा दोष क्या है| बस मैं नारायण नाम की शक्ति को मन में ले भागी|हद तो तब हो गयी जब उन्होनें हमारी लिखी रचनाओं की पूरी सौ नोटबुक आग में स्वाहा कर डालीं|वो नोटबुक नहीं मेरी आत्मा का संगीत था जिसको अग्नि देवता को पूरी तरह भेंट किया जा चुका था |ये वो दु:ख था जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी |ये बात हम भलीभांति जानते थे पर इंसान की जॉन और सम्मान से बड़ा कुछ नहीं होता बस यही सोचकर हमने उस व्यक्ति को हृदय से माँफ कर दिया क्योंकि मैं ही जानती हूँ कि माँफ कर देने से मेरी जो पढ़ाई-लिखाई की यात्रा का मार्ग अवरूद्ध ना हो |माँफी में शांति है और शांति ही सही हल था उस समय |बस दोस्तों किसी तरह उनके मनसूबे कामयाब न हो सके|फिर हमने वो स्थान छोड़ दिया और किराये के घरों में भटकते रहे पर कभी बदले की भावना को खुद पर कभी हावी न होने दिया और खून में सना हाँथ पर रूमाल बाँधकर कैमिस्ट्री का प्रेक्टिकल दिया जाकर और सफल हुई |पर दोस्तों विपरीत परिस्थितियों में भी लिखना बन्द नहीं किया |
और आज भी लिख रहीं हूँ |दोस्तों मैं यही कहूँगी कि जब कटा हाँथ तो और भी सध गया हाँथ |क्योंकि दर्द भी नहीं जख्म भी नहीं हाँ ये निशाँन हैं जो प्रेरणा बन गये कि लिखते रहो |अरे!हाँथों में रेखायें तो सबके होतीं हैं |हमारे तो कलाई में भी रेखायें बन गयीं|ये तो ढ़ेर सारी रेखायें हैं पर शांति की अपार सम्भावनाओं की| ये रेखायें हमारी ढ़ेर सारी वैचारिक क्षमतायें हैं जिसको कह सकते हैं सकारात्मक ऊर्जा की रेखायें,मेरे दोस्तों|
दोस्तों हमेशा याद रखो कि हमारे जीवन में दु:ख किसी गुरू से कम नही और दर्द ही हमारे सच्चे अध्यापक सिद्द होते हैं|
धन्यवाद


आपकी मित्र
लेखिका 
आकांक्षा सक्सेना
जिला -औरैया 
उत्तर प्रदेश



......................................













22 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (08.01.2016) को " क्या हो जीने का लक्ष्य" (चर्चा -2215) पर लिंक की गयी है कृपया पधारे। वहाँ आपका स्वागत है, सादर।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत अच्छी सोच है

      Delete
    2. palak ko agar jid hai yahi bijliya girane ki to
      hame bhi jid hai yahi asiya bnane ki

      Delete
  2. Humesa Ki Tarah Bahut Khubsurat Rachna Hai Ye Apki

    ReplyDelete
  3. Very Good piece of writing..Keep it up

    ReplyDelete
  4. aap kafi accha likhti hai apki lekhni me pareshan logo ka kafi dard chuapa hota hai jo ye batata hai ki aap ek achche dil ki insan hai mujhe apka blog mauli ne bheja tha isliye unka bhi shukriya

    ReplyDelete
  5. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 16 जनवरी 2016 को लिंक की जाएगी ....
    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  6. Aapki ye story padte hi bas esa lag raha h ye sab mere sath hi huwa ho ruh me ek ajib sa dard uthne laga h aap bahut acha likhti ho god bles you

    ReplyDelete
  7. Aapki ye story padte hi bas esa lag raha h ye sab mere sath hi huwa ho ruh me ek ajib sa dard uthne laga h aap bahut acha likhti ho god bles you

    ReplyDelete
  8. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार! मकर संक्रान्ति पर्व की शुभकामनाएँ!

    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

    ReplyDelete
  9. contents are very good....all the best

    ReplyDelete
  10. ईर्ष्या को त्याग कर, सकारात्मक दृष्टि अपनाना ही सार्थक जीवन का माध्यम है और यही आपने किया और उसे लिखा भी । आप कामयाबी के शिखर में पहुंचे हमारी शुभकामनाये आपके साथ हैं ।

    ReplyDelete
  11. ईर्ष्या को त्याग कर, सकारात्मक दृष्टि अपनाना ही सार्थक जीवन का माध्यम है और यही आपने किया और उसे लिखा भी । आप कामयाबी के शिखर में पहुंचे हमारी शुभकामनाये आपके साथ हैं ।

    ReplyDelete