Thursday, March 10, 2016

कविता





तुम्हारी दुनिया

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तुम्हारी अक्लमन्द दुनिया के
भी अजीब किस्से हैं
जो आज खुल के सामने आया
वो कल गुमनामी में जिया
हमें अंघेरों में ही रहने दो
हम जुगनू ही अच्छे हैं |

तम्हारी खूबसूरत दुनिया के
किस्से भी निराले हैं
जो प्रेम करता है
वो बदनामी के सायें हैं
हमें तन्हा ही रहने दो
हम तन्हा ही अच्छे हैं |

तुम्हारी रहस्यमयी दुनिया के
सच, झूठ के दीवाने हैं
इन्हीं उलझी सी बातों के
हम उलझे से किस्से हैं
हमें पागल ही रहने दो
हम पागल ही अच्छे हैं |


स्वलिखित रचना
ब्लागिस्ट 
आकांक्षा सक्सेना
जिला- औरैया
उत्तर प्रदेश


...........धन्यवाद .......



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