टूटे परिवार बिखरे रिश्ते....







 

टूटे परिवार बिखरे रिश्ते

        (मिश्रण)

..............................

देश का ऐसा कोई परिवार नहीं,
जो देश की विघटन एंव विनाश की
बदनियति व बदनीति का शिकार नहीं |

देश का ऐसा कोई परिवार नहीं,
जिसे देश की संघटन एंव विकास की
नेकनियति व नेकनीति का इंतजार नहीं|

देश का ऐसा कोई परिवार नहीं,
जो सभी का साथ व सभी का विकास
के लिये तैयार नहीं |

भारतीय परिवारों का परिवार,
राष्ट्रीय स्वंयसेवक परिवार है,
जिसे पंजीकृत, बीमाकृत व लाईसैंसीकृत
किया जाना देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति व कानूनमंत्री के द्वारा भारतीय जनजीवनहित में परमावश्यक एंव अनिवार्य है |


यह भारतीय नागरिकों के जन्म, विवाह व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के मुख्य रजिस्ट्रार का संघपरिवार है |


यह देश के संघ परिवार न्यायालय के
सर्वोच्य मुख्य न्यायाधीश का संघ परिवार है |


यह प्रगृति के न्याय की, संघटन एंव विकास की संघ परिवार न्याय पालिका की संघात्मक कार्यप्रणाली के संचालक का संघ परिवार है |


यह ब्रह्मा विष्णु महेष शेष दिनेश, कार्तिकेश के पूर्वजन्मी पिता गणेश जी श्री चित्रगुप्त जी का संघ परिवार है |


यह संघ परिवार के मुखिया नेता जी श्री सुभाष चन्द्र बोस का संघ परिवार है |


देश का ऐसा कोई परिवार नहीं,
जो प्रगृति के न्याय की संगठन एंव विकास की संघ न्यायपालिका की संघात्मक कार्य प्रणाली को अपनाने को तैयार नहीं |


क्यों टूटे परिवार क्यों बिखरे रिश्ते,
देश के सभी परिवार समझते |


कब पंजीकृत, बीमाकृत व लाईसैंसीकृत होता यह संघ परिवार है,
देश के युवाओं को बस इसी का इंतजार है |


देश के सभी सत्तासीनों को निज बदनियति व बदनीति की करनी
अब स्वंय ही सफाई है,
यह कुछ और नहीं सिर्फ देश के
संगठन एंव विकास के लिये
व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई है |


आजादी से लेकर अब तक सत्तासीनों ने की जमकर काली कमायी है,
जिनके सिर पर मुखर्जी आगे मोदी कुआँ और पीछे गौड़ा खाई है |


कुछ लोग समझते हैं कि नेता जी
अब नहीं रहे, सच तो यह कि अन्यायी परिवारिक जीवन जीने वालों के
अब अच्छे दिन नहीं रहे |


देश के युवाओं ने की कड़ी पढ़ाई है,
उन्होंने ही इस देश की दुनिया में साख बढ़ाई है | बाद बाकियों ने इस देश की बस लुटिया ही डुबाई है |


जिनकी नजरों में नैतिक मूल्य नहीं,
उनके लिये ना कोई बहन और न ही कोई भाई है, ऐसे ही लोगों ने परिवारों में व रिश्तों में नफरत की आग लगाई है |




स्वलिखित रचना

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'


............धन्यवाद........



Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

एक अश्रुकथा / कथा किन्नर सम्मान की...

रोमांटिक प्रेम गीत.......

सेलेब टॉक : टीवी सैलीब्रिटीस 'इकबाल आजाद' जी का ब्लॉग इंटरव्यू |