अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21जून पर विशेष - - समाज और हम

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Wednesday, June 20, 2018

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21जून पर विशेष -


जानिए! अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस - 
21 जून को ही क्यों मनाते हैं? 

  [योग से तन-मन निरोग होता है और सहयोग से आत्मा तृप्त होती है, योग के साथ जरूरतमंदों का सहयोग भी है जरूरी।] 

--------ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना


 आज  21 june को पूरे विश्व में योग दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। जानिए! कि योग दिवस 21 june को ही क्यों मनाया जाता है।  

1- क्योंकि 21 june को  महर्षि पतंजली जी की पुण्य तिथि है वही पतंजली जिन्होनें सर्वप्रथम  योग से निरोग का सिध्दान्त दे कर सम्पूर्ण मानवजाति को धन्य कर दिया। 


महर्षि पतंजलि अथवा 'पतंंजलि' योगसूत्र के रचनाकार हैं, जो हिन्दुओं के छः दर्शनों-
     (न्याय , वैशेषिक, सांख्य, योग ,मीमांसा, वेदान्त ) में से एक है। भारतीय साहित्य में पतंजलि के लिखे हुए तीन मुख्य ग्रन्थ मिलते है- योगसूत्र,अष्टाध्यायी पर भाष्य और आयुर्वेद पर ग्रन्थ। पतंजलि को नमन करते हुए भृतहरि ने अपने ग्रन्थ 'वाक्यपदीय' के प्रारम्भ में निम्न श्लोक लिखा है-योगेन चित्तस्य पदेन वाचां, मलं शरीरस्य च वैद्यकेन।योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां, पतंजलि प्रांजलिरानतोऽस्मि।।अर्थ - योग से चित्त का, पद (व्याकरण) से वाणी का व वैद्यक से शरीर का मल, जिन्होंने दूर किया, उन मुनि श्रेष्ठ पतंजलि को मैं अंजलि बद्ध होकर नमस्कार करता हूँ। महर्षि पाणिनि ने 'अष्टाध्यायी' की रचना की जिसमें व्याकरण के नियम हैं। ये सूत्र अत्यन्त संक्षिप्त हैं। उनका अर्थ जानने के लिए अर्थ बोधक विवेचन की आवश्यकता प्रतीत होती है।


      पतंजलि योगदर्शन के प्रमाणित सूत्र योगसूत्र नाम से विख्यात हैं। इन योगसूत्रों का रचनाकार पतंजलि मुनि हैं। योगसूत्र के चार पद (विभाग) हैं। सूत्रों की कुल संख्या एक सौ पिच्यानवे है। पादों के नाम समाधिपाद, साधनापाद, विभूतिपाद और कैवल्यपाद हैं। विषय के अनुसार पादों के नाम रखे गये हैं। प्राचीन परम्परा मानती है कि इन्हीं पतंजलि ने पाणिनि मुनि के व्याकरण सूत्र पर सविस्तार तथा मनोरम और विविध विषयों का अभिप्राय देते हुए महाभाष्य लिखा, इतना ही नहीं, वैद्यक शास्त्रांतर्गत चरक संहिता का संस्करण भी किया। प्राचीन वाङ्मय में उपलब्ध अनेक श्लोक और अनेक उल्लेख इस बात का समर्थन करते हैं कि उपविनिर्दिष्ट ग्रन्थों का रचयिता एकमेव महर्षि पतंजलि जी ही हैं ।

2- सर्वप्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने घोषित किया था।

3- 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के साथ ही यह दिन साल का सबसे बड़ा दिन भी होता है। इस दिन से सूर्य उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर चलना आरम्भ कर देते हैं यानि सूर्य भगवान् उत्तरायन से दक्षिणायन दिशा में गतिमान होने लगते हैं। इस दिन से उत्तरी गोलार्ध में बसे देशों में दिन सबसे बड़ा होगा। 21 जून को ठीक 12 बजकर 28 मिनट पर सूर्य कर्क रेखा पर एकदम लंबवत हो जायेगें जिसके कारण से लोगों को कुछ पल के लिए अपनी परछाई भी नहीं दिखेगी। प्राचीन ऋषियों - मुनियों की समय गणनानुसार यह साल का सबसे बड़ा दिन है। 21 जून को 13 घंटे 34 मिनट का दिन रहेगा जबकि रात 10 घंटे 24 मिनट की होगी।यही कारण है कि 21 जून को ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। 

4- गौरतलब हो कि इसी दिन ग्रीष्म संक्रान्ति भी होती है। इस दिन से सूर्य दक्षिणी गोलार्ध की तरफ चलना शुरू कर देते हैं । योग में इस घटना को संक्रमण काल कहते हैं। संक्रमण काल में योग करने से शरीर को चमत्कारी फायदा व निरोगी काया का कुदरती आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

... आइये! ऋषियों - मुनियों के ज्ञान को जीवन में उतार कर अपने जीवन को धन्य करने की शुरुआत आज से ही करें। आप सभी शुभचिंतकों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 


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