shikayat apne thakur se....

                   
                           * जय श्री कृष्ण *


                शिकायत अपने ठाकुर से ....
                        (आखरी इंतजार बचा ) 
............................................................................... हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया उपहार मै मिलता है धोखा उत्सव भी मना के देख लिया
  
हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया।।

लुटा के सब कुछ देख लिया 
बर्बाद भी होकर देख लिया 
कोई बनता नहीं हमराज़ यहाँ 
हमने तो मिट के देख लिया 
तेरा दरश मिले अब तो कान्हा 
दुनिया को मनाना छोड़ दिया 

हे श्याम तुहारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया।।

भीख मांग रहा बचपन देखो 
सड़कों पे भटकता घूम रहा 
हैं महलों के दरबाजे बंद 
सिंघासन तन्हा डोल रहा 
अब कुछ भी रहीं न चाह मेरी 
सबकुछ चाह के देख लिया 

हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया।।

जब तक रहता मतलब सबको 
रखतें है खबर एक पल-पल की 
जब मतलब निकल जाता है 
तब कौन था तू और कौन थी मैं 
धोके ही बस हासिल है यहाँ 
ख़ुद को भी सता के देख लिया 

हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया 

हर रिश्ता स्वार्थ की भेंट चढ़ा 
दौलत पे घुटने टैक गया 
अब साथी-सखा न कोई बचा
जीवन से अपने हार गया 
यादों के सिवा कुछ बचा नहीं 
दिल को बहलाकर देख लिया 

हे श्याम तुहारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया।।

अब एक आस मै जिंदा हूँ 
तू आन मिले और अभी दिखे 
जीवन सब मैंने हार दिया
तन-मन सब तुमपर वार दिया 
बस तू ही तू है और कुछ भी नहीं 
संसार है माया जान लिया 

हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया।।

मेरी आस है तू विश्वास है तू 
तुझपे मर मिटना सीख लिया 
हे श्याम शरण मै लो अपनी 
तेरा ही तुझको सोंप दिया 
हे श्याम हमें अब दर्शन दो 
आखरी बस ये इंतजार बचा 
...............................................................................ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  जय श्री कृष्णा ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ 
                                         
                                   आकांक्षा सक्सेना 
                                   बाबरपुर,जिला-औरैया 
                                    उत्तर प्रदेश 
............................................................................... 
       हे भगवान  आप सभी की रक्षा करें ।।  





Comments

  1. ye he to leela hai.... sirf apna dhram palan karna he mukti ka karan ho sakta hai..... leela ko samjho....man jahan shuru hota hai dhram whan khtam hota hai jhan tak man hai whahn tak chah hai ... agar tum kaho main aastik hu tab bhi tum manke bheetar ho .... darasal parmatma to haan ya na ke paar hai....

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