स्वप्न - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Wednesday, October 24, 2012

स्वप्न




            LoIu

||कुछ स्वप्न इतने ज़ालिम होते हैं कि स्वप्न को ही एक स्वप्न बना कर छोड़ देते हैं||  


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