दहेज़ कैंसर 

ब्याह + स्वार्थ = (बाजार )

...........................................................

आज कल अख़बार मैं विज्ञापन आता है |
लड़की गोरी- सुन्दर,लम्बी,उच्च शिक्षित,ग्रह कार्य दक्ष,सरकारी नौकरी वाली को वरीयता,सर्वगुण संपन्न  कन्या चाहिए |
मांगते हैं घर जाओ तो कुछ इस प्रकार से कहते हैं की हमने अपनी बेटी की शादी तो ८ लाख मैं की थी |हाँ, एक बात और कहते हैं कुछ लोग कल ही आये थे, ७ लाख रुपैया और एक स्विफ्ट कार देने को कह  रहे थे |
देखा आपने फिर जब घर मैं लड़ाइयाँ हुईं कोर्ट के चक्कर काटे तब बोले क्या बताऊँ  बहु बहुत गलत मिली |हम फंस गए |
अरी अब क्यूँ रोते हो आपने जो मंगा वही तो मिला आपको गोरी-सुन्दर कारवाली , नौकरीवाली,ढेर सारा  दहेज़ लाये ऐसी  बहु  मिले तो मिल गई न....आपने ये तो नही कहा था की हमें  एक अच्छी संस्कारी कन्या चाहिए 'एक बहु चाहिय' |एक अच्छा इंसान चाहिए |
ये तो नहीं लिखा था न उस सदी के विज्ञापन मैं तो अब जो है उसको स्वीकार करो |
...................वास्तव मैं समाज की दशा आज दुर्दशा की कगार पर है सब कुछ स्वार्थ की भेंट चढ़        चुका है |..
..आने वाली जो पीड़ी होगी उनके सवालों का सामना क्या हम कर सकेंगे ??? 

................. ....................
                    आकांक्षा सक्सेना 
                    बाबरपुर,औरैया 
                    उत्तर प्रदेश 

Comments

Popular posts from this blog

एक अश्रुकथा / कथा किन्नर सम्मान की...

स्टार भारत चैनल का फेमस कॉमेडी सो बना 'क्या हाल मि. पांचाल' :

सेलेब टॉक : टीवी सैलीब्रिटीस 'इकबाल आजाद' जी का ब्लॉग इंटरव्यू |