- समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Wednesday, November 7, 2012


हर कोई आज व्यस्त है 

धन ही आज धन है 

आकांक्षा सक्सेना 
बाबरपुर ,औरैया 
उत्तर प्रदेश 

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