Friday, November 9, 2012













आओ साथ आयें 
....................

 कोहराम  ना मचाओ 

मशालों को न  बुझाओ 

आस को राखिए ज़िंदा 

विश्वास को द्रढ बनाओ 

तुम ही तो तुम्हारे 

खुद पर रखो भरोसा 

जीवन एक यात्रा है 

आँखें खुली तुम रखना
 
गर सो गए सफ़र में 

तू खुद से ही लूटेगा 

वापस नहीं मिलेगा 

ये सुनहरा वक्त तुझको 

आओ पुकारें खुद को 

आओ जगाएँ खुद को 

आओ ललकारें खुद को 

आओ पहिचाने खुद को 

बनना है सूर्य हमको 

बनना है चाँद हमको 

बनना है पर्वत हमको 

बनना है राम हमको 

बनना है कृष्ण हमको 

बनना है भागीरथ हमको 

बनना है भगत हमको
 
बनना है सुभाष हमको
 
बनना है लक्ष्मी हमको 

बनना है अवन्ती हमको 

कैसे करेगा कोई पीछा 

मन की गति से आज
 
उड़ना हैं आज हमको
 
अपने भारतवर्ष का नाम 

रोशन करना है आज हमको
..................................

।। आओ मानवता धर्म निभाएं 

अपने देश को सुन्दर और स्वच्छ बनाएँ  ।।
.............................................

       आकांक्षा सक्सेना 

       बाबरपुर,औरैया 

        उत्तर प्रदेश 

No comments:

Post a Comment