ये प्यार है या कोई जंग प्रभु - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Thursday, January 3, 2013

ये प्यार है या कोई जंग प्रभु


                                      


ये प्यार है या कोई जंग प्रभु 

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 ये प्यार है या कोई जंग प्रभु 
लेन-देन का खेल यहाँ 
ये व्यापार है या कोई बाज़ार प्रभु 

ये प्यार है या कोई जंग प्रभु 
बस आगे जाने की होड़ यहाँ 
ये घर है या घुड़दौड़ मैदान प्रभु 

ये प्यार है या कोई जंग प्रभु 
जब पैसा ही भगवान बना 
ये इंसान है या रोबोट प्रभु 

ये प्यार है या कोई जंग प्रभु 
गौ माता को काट बना हत्यारा 
ये इंसान है या कोई दैत्य प्रभु 

ये प्यार है या कोई जंग प्रभु 
ये संसार है या कोई स्वप्न प्रभु 
जो घट रहा है वो असहनीय है प्रभु 

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आकांक्षा सक्सेना 
जिला -औरैया 
उत्तर प्रदेश 



1 comment:

  1. समकालीन ज्वलंत समस्यायों को बखूबी अपने काव्य में उकेरा है.विचार सम्प्रेषण भी अच्छा बन पड़ा है.

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