एक कहानी .....बवाल.......पार्ट-1

   बवाल  पार्ट -1

 
             

                .....बवाल.....


आज उत्तर प्रदेश के भिमारी जिले में मेरी पहली पोष्टिंग भिमारी जिले की डी.एम गौरी संघाल के रूप में,मुझे मेरा ऑफिस मिला सामने मेरी कुर्सी यह देख मैं मन ही मन बहुत खुश हुई |आज डी.एम की कुर्सी पर बैठ ऐसा लगा मानो जिंदगी की सारी थकान मिट गयी| बड़ी मुसीबत झेल के यहाँ तक पहुँची थी मैं |ऑफिस में सभी लोगों द्वारा मिल रहा सम्मान देख मैं फूली न समा रही थी अाज खुद की किस्मत पर भी खुद को जलन सी हो जाये बस खुश ही खुश थी मैं..
कुछ दिनों में हमने महसूस किया कि यहाँ सभी मुझे अजीब नज़रों से क्यों देखते हैं...पता नहीं ये कुछ अजीब था|
मैंने सोचा कि दुनिया कहाँ की कहाँ पहुँच गयी और ये लोग यहीं टिके हैं जो आज भी महिला अघिकारी को इस तरह धूरतें हैं..ताज्जुब है.इन लोगों का कुछ नही हो सकता...
मैंने ऑफिस में पूरे जिले के भ्रमण की इच्छा जाहिर की जाहिर की..कि मैं जिले के गाँव - कस्बों को नजदीक से देखना चाहतीं हूँ फिर मैं उन लोगों को उनकी परेशानियों से निजात दिलाने की पूरी कोशिस करना चाहूँगी|
अॉफिस के लोग यह सुन कर खुश थे पर चेहरा कुछ और ही बोलता था उनका..मैने निश्चय किया कि ये अजीब व्यवहार क्यों में एक दो दिन में इनसे पूछँगीं|
दूसरे दिन
हम और ऑफिस के कुछ लोग गाड़ी में बैठ जिला भिमारी छोटे से शहर को घूमने निकले..
गाड़ी में बैठी खिड़की से जब हमने नजारे देखे तो मुझे बहुत गुस्सा आया...
    सामने पुल की दीवारों गन्दी हो रखीं हैं उन पर लिखा है...देखो! गधा मू.... रहा हैं..
लोग उसी लिखे पर टॉयलेट कर रहे हैं...
फिर देखा..प्लाट बिकाऊ है
कफिला पशु आहार खिलायें भैस रानी का दूध बढ़ायें....ऐसे घटिया तरीके से प्रचार हो रहा ... फिर आगे लिखा देखा... बाबा बंगाली मनचाहा प्यार पाने के लिये वशीकरण के लिये सम्पर्क करें|
बाबासीर खूनी पेचिस ..दस्त कब्ज के लिये मिलें ....
दयानंद ऐकेडमी..प्ले स्कूल....में आयें बच्चों का फ्यूचर चमकायें ..... 
देखो तो किस तरह शहर की दीवारों को बेसर्मी से गन्दा कर रखा है ओफ! हो!
मैं अपने ऑफिस लौट आयी और कहा कि मुझे शहर,कस्बे और गाँव सब साफ -सुथरे चाहिये और तुरन्त पुल पर दीवारों पर लिखे ये घटिया प्रचार सब सााफ करवाओ और फिर दोबारा कोई लिखे तो पूरे पाँच हजार रूपये जुर्माना होगा ये बात समाचार पत्रों में छपवा दीजिये प्लीज........
मीडिया के कुछ लोग आये और कुछ बात करके चले गये |ऑफिस के लोग मुझे टकटकी लगा के देख रहे थे |हमने कहा क्या बात है तो तुरन्त सब अपने कार्यों में लग गये|
हमने सोचा इन निगाओं में कुछ तो खास छिपा है जो मुझे पता करना है ये सब लोग कुछ छिपा रहें हैं,जो मैं पता करके रहूँगी|मैं कुछ सोच ही रही थी कि तभी बाहर किसी लड़की की रोने की आवाज आयी और शोर मच गया | हमने अपने पास ही बैठे कमप्यूटर ऑपरेटर शशांक मिश्रा से कहा जो लड़की रे रही है उसे अंदर लाओ प्लीज...वो बोले जी मेड़म | लड़की सामने आयी और बोली बचा लो मेड़म ! मैं उसके पास गयी और बोली क्या हुआ ? लड़की बोली,"मैम,दो महीने हुऐ शादी को देवर भी जबरजस्ती करता है और ससुर भी पति कहता है कि मेरे घरवाले तुम से कुछ भी करें या कुछ भी करें मुझसे ना कहना समझी | मेड़म फोन भी नही देते माँ से बात करने भी नही देते जब मैने चिल्लाना शुरू किया तो नन्द ने बहुत मारा और फिर में घर के सामने का गेट खुला देखा तो भाग निकली|मैं कुछ पूछती उसने हाँथ- पाँव पर जलाने पीटने के गहरे निशांन दिखाये |ये देख मेरे आँशू आ गये मैंने उसका हाँथ पकड़ा और तभी वो गिर पड़ी और बोली मेड़म बहुत भूक लगी है चार दिन से कुछ नही खाया मैम और उसको जोर की हिचकी आयी वो बोली मैम शायद !भगवान याद कर रहे|" मैं चिल्लायी ऐम्बूलेंस बुलवाओ जल्दी|..और तभी वो मेरे कुर्ते को पकड़े थी वो छूट गया और वो मुझे देखते देखते मर गयी | मैं वहीं बैठी रह गयीं और मैं जोर से रो पड़ी |मिश्रा जी बोले,"मैम,|मैं उठी और कुर्सी पर बैठी |ऑफिस के बाहर हंगामा मचा हुआ था |लड़की के परिवारी लोग ने ऑफिस के बाहर तोड़-फोड़ शुरू कर दी |मैं सोच भी  नहीं सकती थी कि उन्होने मेरी गाड़ी फूँक डाली ऐसा बवाल मच गया कि मैन रोड़ जाम कर रखा था जनता की भारी भीड़ चिल्ला रही थी| लेखिका अरूणा नारंग को इंसाफ दिलाओ न्याय चाहिये ससुरालियों को सजा-ए -मौत चाहिये|जब मैने सुना ये लड़की इतनी फेमस लेखिका जिससे मैं भी मिलना चाहती थी |किसी ने सही कहा है कि दुख इंसान की शक्ल बिगाड़ देते हैं मैं तो उनकोपहिचान ही न पायी कि ये अरूणा जी हैं| उनके साथ इतना बुरा हुआ जिनसे कभी इतना मिलना चाहती थी नहीं पता था इस तरह पहली और अंतिम मुलाकात होगी |
मैने कहा मिश्रा जी पुलिस इंस्पेक्टर से हमारी बात करवाइये अभी |मिश्रा जी ने फोन दिया हमने कहा,नमस्ते बाद में आपका नाम बताइये|अच्छा सावन,नाम है आपका |आप ये जो जनता की आवाजें सुन रहें हैं ना तो तुरन्त जाओ अरूणा नारंग जी की ससुराल और सावन नाम है ना आपका तो बस बरसो वो भी झूम के |मुझे सब आरोपी जेल में चाहिये आप जानो आप क्या करें कैसे करें और दूसरी बात यह जो बवाल मचा है इसको भी शांत करवाइयेगा प्लीज इससे समाज में असंतुलन हो रहा है |और तभी मीडिया के लोग आकर बोले मैड़म आपकी गाड़ी जल गयी है आप क्या कहेंगी| मैने कहा किसी की बेटी चली गयी वो ज्यादा जरूरी है मेरे लिये और उनको न्याय जरूर मिलेगा |
मीडिया,"ये जो बवाल मचा है आप क्या कहेगीं| मैंने कहा जिसकी बेटी के साथ ऐसा हुआ उससे पूछो जाकर गुस्सा फूटना स्वाभाविक है पर लोग अब धैर्य रखें कानून दोषियों को कड़ी सजा देगा |
मिश्रा जी बोले मैडम बॉडी पोसमार्टम के लिये भेज दी गयी है|
मैंने हाँ में सिर हिलाया तभी मैने देखा ऑफिस के लोग मुझे ही घूर रहे|
मैं खड़ी हुई और कुछ बोल पाती....कि सभी एक साथ खड़े होकर बोले मैम आपको देख ईरा मैड़म की याद आ गयी|
हम लोग आपको जब भी देखते तो हर पल उनको आप में देखते हैं|
अब हमारे समझ आया कि ये लोग मुझे क्यूँ घूरते थे|
मैंने कहा,"कौन ईरा?"
मिश्रा जी बोले,"आज से पाँच साल पहले इस जिले की पहली महिला डी.एम आदरणीय ईरा सिंघल जी थीं|"
हमने सोचा आदरणीय शब्द का इस्तेमाल,हमने कहा चलो उनको फोन लगाओ हम सब उनसे बात करते हैं|
यह सुन वो सब की आँखे भर आयीं |
हमने सोचा लगता है उन्होने इस जिले के लिये बहुत अच्छा काम किया है तभी ये लोग कितनी इज्जत से उनको याद कर रहें है काश! मैं भी अच्छे काम कर पाऊ जो मुझे भी ऐसी इज्जत नशीब हो|
हमने कहा अरे! चलो मिलाओ नम्बर ...क्या हुआ?
सामने खड़ा चपरासी बोला,मैडम, वो ईरा मेड़म गुमनाम हो गयीं कोई नहीं जानता वो कहाँ गयीं |
मिश्रा जी बोल,"हाँ, कोई नहीं जानता वो कहाँ गयीं, इतना कह कर वो रो पड़े....
मैं तो देखते रह गयीं कि सब के सब आँसू पोछ रहें हैं |
हमने कहा,"आप लोग हमारी मदद करोगे अगर हम उनको ढूढ़े|"
वो सब बोले,"हाँ|"
हमने कहा,"पहले आप लोग हमको उनके बारे में सबकुछ बतायें जो भी आप जानते हों....
मिश्रा जी बोले,"मैम,वो सब तो मीडिया में बहुत हाईलाइट था |याद करो आज से पाँच साल पहले राष्ट्रपति भवन का वो लाखों करोड़ो महिलाओं का धरना जिसमें बड़ी संख्या में पुरूष भी शामिल थे इस धरने को देश का सबसे बड़ा बवाल नाम दिया जा चुका है और ईरा मैड़म को उनके विरोघी "बवाली "  ही कहते थे |बोलते डी.एम नहीं बवाली आ रहीं है कचहरी में ऑफिस की दशा सुधार लो वरना बवाल ही मचेगा चारों ओर |
मैंने कहा,"हाँ, मैंने टी.वी पर देखा था पर अचानक प्रसारण रोक दिया गया और फिर कोई बात बाहर न सकी ....है ना
मिश्रा जी बोले,"हाँ मैम,क्योंकि ईरा मैम स्टेज से माइक से बोल रहीं थी फिर उनके प्रशंसको के बीच आने को वो मंच से नीचे उतरीं और वहीं भीड़ में गुम हो गयीं |
उनके गुम होने के बाद वो बवाल मचा पूरे देश में आगजनी मची थी ना जाने कितने लोगों ने उनके लिये ट्रेन के सामने बिछा दिया बहुत लोग मरे देश की जेलें औरतों लड़कियों से भर गयीं थी .........
हमने गौरी सिंघल, कहा उस समय मेरा एग्जाम था और मैंने खुद को रूम में कैद कर लिया था पढ़ने के कारण .....कड़ी मेहनत में जुटी थी उन दिनों....इसलिये ये सब देश में जो हुआ हमने कुछ करीब से जानने की कोशिस नहीं की |
पर मिश्रा जी इतनी महान महिला अचानक चुप कैसे हो गयी ..... 
मिश्रा जी बोले......पूरा देश यही तो जानना चाहता है मैम...!
हमने कहा मिश्रा जी आप पाँच साल पुराने सभी अखबार मंगवाइये और बस जुट जाइये आज और अभी से ठीक है और जिसको जो भी पता चले हमको बताइयेगा |अगर कुछ स्पेशल गुप्त लोग की टीम बनानी हो तो बना लीजिये हम सब साथ हैं पर यह सारी बातें अभी अपने तक रखना |
गौरी संघाल ने नेट पर अपने तरीके से खोजबीन करना शुरू किया और फिर उन्होने 
यू ट्यूब पर ईरा जी के वीडियो सर्च किये |
वो रात भर इस केश से जुड़ी कड़ी को ढ़ूढ़ने और जोड़ने का प्रयास करती रहीं|
  सुबह ऑफिस पहुँच कर काम निपटाकर ऑफिस सब लोग पुराने मंदिर पर पहुचें...
वहाँ पहुँच कर मिश्रा जी बोले मैम ये तस्वीर देखो ! मैम मंच से उतर रहीं हैं और ये महिलायें उनके हाथ पकड़े हंस रही हैं...
तभी विनय शर्मा बोले मैम में आपके पत्र टाईप करता हूँ आपके ऑफिस में..मैंने पता किया  कि ये महिलायें क्रिमिनल्स हैं..मैंने इनकी तस्वीर एक बार पेपर में देखी थी ट्रेन में सक्रिय महिला जहरखुरानी गैंग ......
हमने कहा मिश्रा जी और कुछ पता चला...तभी इस्पेक्टर सावन आकर बोले आप सब यहाँ एक साथ|
गौरी संघाल बोलीं ये लो तस्वीरें और सिर्फ पता नहीं करो बल्कि पकड़ो तुरन्त.....
सावन बोला ईरा जी ये सब फोटो ये अखबार
मैं जो समझ रहा क्या वो सच है....
गौरी जी हाँ ......लग जाओ....बस काम पर सावन हो बस बरस जाओ जाकर बस|
सावन,"बिल्कुल,ईरा जी के लिये के लिये कुछ भी करूँगा|"
सब लोग अपने घरों को चले गये|
गौरी अपने ड्राईवर से बोली,जगत भाई.....गाड़ी जरा पास के गाँव जगतपुरा की तरफ ले चलो...
जगत भाई ये जगतपुरा गाँव का नाम तुम्हारे नाम के कारण पड़ा क्या ?
ड्राईवर मुस्कुराया क्या मैड़म आप भी...शायद  उस गाँव के नाम मेरा नाम पड़ा हो....यह सुन कर गौरी संघाल हँस पड़ी और जगत भी हंस पड़ा|
गौरी ने गाँव के बाहर ही गाड़ी रोक दी|
और गाँव में किसी को किसी को ढ़ूढ़ने लगी और तभी एक बुजुर्ग बोले किसे ढूढ़ रहें हैं आप लोग?
गौरी कुछ कहती तभी एक महिला बोली बाबा तुम्हारे नाती का फोन आया है....तभी गौरी ने उस महिला के घर में घुसने लगी ..बाबा और वो महिला बोली अरे! कौन हो..मैं तुम्हें नहीं जानती|
गौरी पर मैं तुम्हें जानती हूँ तुम्हारा नाम जानकी बाई तुम्हारे बाबा का नाम केशव दयाल और ये देखो अखबार ईरा जी के साथ कई जगह तुम्हारी फोटो है पीछे छिपी सी खड़ी |जो जानती हो बताओ?
वो बोली आप मेरा नाम कैसे जानती हैं |
गौरी,"साइन्स ने बड़ी तरक्की की है नेट है पहिचान पत्र निवास प्रमाण पत्र आय जात सब नेट पर है पूरी वोटर लिस्ट ऑनलाईन है....आज |सब पता चल जाता है|अब बताओ जो भी जानती हो?
वो बोली,"मैडम,में क्या लाखों लड़कियाँ उनके साथ थीं|"उन्होंने समाज से दहेज़ खत्म कर देने का बीड़ा उठा लिया|" वो लड़कियों के आँशुओं में ही कहीं डूब के गुम हो गयीं|
वो फूट के रो पड़ी कि उनका जाना और देश की हर लड़की का असुक्षित हो जाना ...
गौरी संघाल ने कहा,"तुम किसी को जानती हो जो उनके बारे में हमें कुछ भी बता सकें...हम उनको ढ़ूढ़ रहें हैं,प्लीज बताओ|
वो बोली क्या सच ... उनके लिये प्लीज कहने की जरूरत ही नही है....हाँ मैं जानती हूँ जो उनके बारे में सब जानते है पर....
गौरी पर क्या?
वो बोली,"आप खुद ही जाकर देख लो..
गाँव के बाहर शमशान है वहीं बीहड़ में एक सूखे पेड़ के नीचे लेटा एक पागल दिखेगा ....
गौरी ने कहा,"पागल?"|
जानकी बाई बोली,"वो पागल पाँच साल पहले माना हुआ पत्रकार था और ईरा मेड़म का दोस्त भी|
गौरी ने कहा,"धन्यवाद,जानकी बाई|
मैड़म और ड्राईवर दोनो गाँव के बाहर आये गाड़ी में बैठ गये |
ड्राईवर बोला,"मैड़म,चलें|"
गौरी,"हाँ|"
गौरी और ड्राईवर दोनो शमशान के वीराने में उस पत्रकार को ढूढ़ने लगे तभी देखा! कि सामने दो छोटे बच्चे अपने सिर और कन्धों पर लकड़ी का भारी गट्ठर रखें हुऐ चले आ रहें
हैं उनके साथ शायद उनका पिता भी है जो कुछ लकड़ियाँ हाँथ में पकड़े हुऐ है|
गौरी उनके पास जाकर बोली,"छोटे बच्चों के कन्धों पर इतना भार ?
वो गरीब बोला," मैड़म, इससे ज्यादा तो इनके बस्ते भारी हैं इनके|" वैसे में बच्चों से न उठवाता पर इनको ये सीख देनी जरूरी है कि हम कितनी मेहनत से लकड़ियाँ लाते हैं ताकि ये पढ़े कुछ बने ताकि इनको अपने बाप कि तरह जंगलों शमशान में लकडियाँ बीनना ना पड़े और ये रोज ज्यादा ज्यादा लकड़ियाँ इधर उधर फेंकते हैं और बिना वजह जला डालते हैं तो अब ये इनकी कीमत जानेगें और फिर ऐसा न करेगें| वहीं पास में खड़े बच्चे बोले,"बाबा अब  कभी लकड़ी बर्बाद नहीं करेगें|"
गौरी बोली ," आप जैसे पिता के बच्चे देश का नाम करतें हैं जंगलों में लकड़ियां नहीं बीनते| 
गौरी संघाल ने कहा,"क्या यहाँ कोई सूखा बड़ा सा पेड़ है जहाँ कोई पागल रहता है?|"
वो ग्रामीण बोला उधर वो देखो! सूखा पेड़...
और वो पागल वहीं कहीं होगा|" पर मैड़म वो पागल पहले पत्रकार था ईरा मेड़म के गायब होने के बाद ये भी पागल हो गये |यह कहकर वो ग्रामीण आगे बढ़ गया |
हमने सोचा कि वो क्या शख्सियत होगी हर कोई उनको जानता है और इज्जत करता है|
हम दोनों किसी तरह उस पेड़ तक पहुँचे देखा! कोई वहीं लेटा हुआ है|
ड्राईवर बोला,"मैड़म मेरा तो यहाँ दिन में डर से बुरा हाल है दूर- दूर तक कोई भी नहीं ना जाने ये रात में कैसे यहाँ रह पाते हैं...मैम इंसान इतना भी अकेला रह सकता है मैंने आज जाना |
गौरी ने उस पत्रकार के पास जाकर कहा,"सर|"
वो आँखे खोल के धीरे से बोला,"कौन?"|
गौरी संघाल बोली,"सर,मैं गौरी संघाल डी.एम भिमारी, प्लीज मुझसे बात कीजिये |"
वो बोला,"डी.एम और उनकी सूखी सीआँखों में जैसे चमक आ गयी वो मुझे देखते रह गये और उनकी श्वांसे तेज चलने लगीं और वो उठे उनके होंठ हल्के से हिले तभी अचानक वो वहीं गिर के बेहोश हो गये|
ड्राईवर जगत ने उनको गोद में उठाया और गाड़ी में लिटा लिया |
गौरी संघाल ने कहा,"सीधे मेरे घर ले चलो वहीं इनके स्वास्थ्य की पूरी व्यवस्था करेगें |
ड्राईवर जगत,"यही ठीक रहेगा|"
       गौरी ने तुरन्त नम्बर मिलाया और वो खुश थी|घर पहुँचते ही डॉक्टर बंसल और उनके साथी मौजूद थे उन्होने तुरन्त पत्रकार जी को बैड पर लिटाया और इलाज शुरू कर दिया |इधर तभी गौरी के पास कॉल आयी मैम आप तुरन्त इस पते पर आयें आपका काम हो गया है|गौरी ने कहा,"धन्यवाद, कौन कहता है कि फेसबुक के दोस्त काम नहीं आते आपका फिर से शुक्रिया|वो दोस्त बोले,"मैम,ईरा मैम के लिये देश के लिये कुछकरनेको बड़े नशीब से मिलता और जब दोस्त बोला तो धन्यवाद कह कर शर्मिंदा ना करें|गौरी ठीक है मैं निकलती हूँ पता व्हाट्सअप कर दो |
गौरी ने डॉक्टर बंसल से कहा कि इनको जैसे ही होश आये मुझे कॉल कर दीजिये |
   गौरी ने ड्राईवर से कहा,"जगत, तुम थके हो तो आराम करो या घर चले जाओ मैं खुद ड्राईव कर लूँगी |
ड्राईवर जगत ने कहा,"मैम, जब तक आपसफल नहीं हो जातीं तब तक मैं कहींनहीं जाऊँगा और आपसे हाँथ जोड़कर प्रार्थना है आप अब कभी मुझे आराम के लिये नहीं कहेगीं अब तो आराम तब ही होगा जब आप सफल होगीं|
गौरी संघाल ने कहा,"मुझे तुम पर गर्व है कि तुम मेरे साथ हो दोस्त की तरह |"
दोस्त शब्द सुन वो जमीन पर बैठ गया और आँखों में नमी के साथ बोला मुझे आपका ड्राईवर ही रहने दो मैं एक अच्छा ड्राईवर सिद्द होना चाहता हूँ प्लीज मैम|"
गौरी ने कहा,"जैसा तुम ठीक समझो,अब चलो जल्दी|"
      दो घंटे के सफर के बाद गौरी और जगत दोनों ठीक पते पर पहुँचते हैं|वहाँ गौरी के दोस्त सामने से आकर हाँथ मिलाते है और उस बिल्डिंग के एक फ्लैट में ले जाते हैं और कहतें है यही है उस पत्रकार का ठिकाना और ये पुराना लैप टॉप और जमीन पर दरबाजे के पास से ये दो सी.डी कैसैट मिलीं हैं|
गौरी तुरन्त पहला पार्ट शुरू करो|
गौरी ने देखा ये तो राष्ट्रपति भवन के धरने की सी.डी ओफ हो! इतनी भीड़ आखिर !इतनी बड़ी भीड़, क्या अमिट और दमदार आवाज है है...और तभी डॉक्टर बंसल की कॉल आ गयी मैम इनको होश आ गया है और ये कुछ कहने की कोशिश कर रहें हैं|
   गौरी ने लैपटॉप बंद किया सी.डी बैग में रखी |सीधे गाड़ी में आकर बैठ गयीं और उनके दोस्त भी अपनी गाड़ी से वापस हो गये| गौरी सीधे ही अपने रूम में पहुँचीं |
जहाँ पत्रकार बिल्कुल साफाई से लेटे हुयें हैं
उनकी दाड़ी भी साफ हो चुकी थी चेहरा साफ सिर पर घने बाल वो साफ दिल किन्तु बैचेन दिख रहे थे|
मैने उनसे कहा,"पत्रकार जी,अब कैसे हैं आप?|"
वो बोले,"ठीक नहीं हूँ|"
गौरी ने कहा," सच है,ईरा जी को जानने वाला को जानने वाला कोई भी ठीक नहीं पर आप ठीक कर सकते है मुझे उनकी बिल्कुल शुरू
से पूरी कहानी सुननी है प्लीज हाँ बोलियेगा|"
पत्रकार ने कहा," मैं आपको जरूर सुनाऊँगा जो भी मैं जानता हूँ, आप में मुझे सत्य दिखता है और आजतक में सत्य खोजता ही रहा पूरे पाँच साल बीत गये हाँ आज सत्य को में सच जरूर सुनाऊँगा|"
गौरी संघाल ने कहा,"पहले आप पूरी तरह स्वस्थ्य हो जाईये तभी डॉक्टर बंसल ने कहा मैड़म ! गौरी उठीं और रूम से बाहर चलीं गयीं |बाहर डॉक्टर बंसल ने बताया कि मैड़म अभी उनको बहुत कमजोरी है और दिमाग भी कमजोर है अगर इन्होने कोई गम्भीर बात सोची तो इनकी याददास्त जा सकती है|आगरा में डाॉक्टर गुरनानी है जो ऐशिया लेवल के मस्तिष्क की बीमारियों के डॉक्टर है|पत्रकार जी को आगरा दिखा दें |इनका अधिक सोचने के कारण ये कुछ बोलते हैं और कुछ बड़बड़ाने लगतें हैं |गौरी संघाल ने कहा,"डॉक्टर साहब हम पत्रकार जी की जिम्मेदारी आप पर सोंपतें हैं अगर आप चाहें और डी.एम कुछ बोल पातीं कि डॉक्टर बंसल बोले कि मैम मुझे खुशी होगी अगर मैं आपके काम आ सकूँ|डी.एम बोली उनको आज ही ले जाओ और पहुँच कर बात करना |
    गौरी ये बात कर अंदर आयीं तो पत्रकार बैड़ पर खड़े होकर बोल रहे कि मैम दिल्ली की तैयारी हो गयी हाँ हो गयी...
गौरी ने पीछे मुड़कर देखा तो पीछे खड़े डॉक्टर बंसल बोले,"मैम, देखा!आपने इनको
बस ऐसे ही ये पूरी तरह पागल हो सकते हैं |"
गौरी,"पर,डॉक्टर साहब अभी तो ये ठीक थे ये अचानक कैसे ?"
डॉक्टर बंसल बोले,"मैम,इस बात का जबाव तो डॉक्टर गुरनानी ही दे सकतें हैं|"
गौरी,"इनको गुरनानी जी को दिखाने को ले जाइये,अब देर ना लागाइये |"
डॉक्टर बंसल बोले,"जी,मैम|"
और थोड़ी देर में बंसल क्लीनिक के कुछ डॉ डॉक्टर अपनी ऐम्बूलेंस के साथ आये और पत्रकार जी को अपनी गाड़ी में लिटा कर आराम से ले जाने लगे तो गौरी ने पत्रकार जी से कहा आप घूमने जा रहें है जल्दी वापस आना|पत्रकार जी बोले,"ऐम्बूलेंस में कोई घूमने जाता है मुझे पागल समझती हो प्लीज मुझे मत भेजो और बच्चों की तरह रोने लगे और गिर कर बेहोश हो गये|
गौरी उनकी ये हालत देख रो पड़ी तभी डॉक्टर बंसल पास आकर बोले,"मैम, चिन्ता ना करें हम आपको अब तभी बुलायेगें जब देश के इस महान पत्रकार जी को बिल्कुल स्वस्थय कर लूँगा | गौरी संघाल ने कहा,"धन्यवाद डॉक्टर साहब अब आप ही देखो |"डॉक्टर बंसल बोले,"डॉन्ट वरी,कह कर गाड़ी मैं बैठ कर आगरा रवाना हो गये|"
गौरी अंदर रूम में आकर चुपचाप बैठ गयी और पुराने अखबारों को देखने लगी और तभी
ड्राईवर जगत आकर बोला,"मैम,|
डी.एम बोली,"आओ,कुछ कहना चाहते हो?"
जगत ने कहा,"मैम,आपको पता होगा कि इन पत्रकार जी के माँ-बाप दोनों पत्रकार थे उनकी लव मैरैज थी और सबसे खास बात कि उन्होंने अपने पुत्र का नाम पत्रकार ही रख दिया |अाज इतने मजबूत इरादों वाले पत्रकार को यूँ डॉक्टरों के साथ जाते देख काफी दु:ख हो रहा है|गौरी संघाल बोली,"हाँ,ये नाम की कहानी हमने नेट पर पढ़ी थी वो जल्दी अच्छे हो जायेगें ईश्वर से प्रार्थना करो| जगत ने कहा,"बिलकुल मैम|"
तभी गौरी के पास कॉल आयी |गौरी ने कहा,"हैलो,कोई उधर से बोला," चुपचाप बीस हजार भेज सवाल न करना समझीं|
गौरी ने कहा,"जगत,बैंक चलो|"
जगत," आप बताओ मैं काम कर आऊँ बैंक में क्या काम है?"
गौरी ठीक है ये लो इस खाते में बीस हजार डाल आओ अरजेन्ट|
जगत," ठीक है मैम|"
        दूसरे दिन ऑफिस पहुँचती है और कहती है मिश्रा जी जगतपुरा के प्रधान को बुलवाओ|मैं उसदिन जगतपुरा गयीं गाँव की हालत बहुत खराब थी नालियाँ भरीं बजबजा रहीं थीं कितनी गंदगी और गाँव की पुलिया टूटी हुई मिली|उसको बोलो कि मैं कल फिर आ रहीं हूँ मुझे हर तरफ सफाई चाहिये और गाँव के सरकारी स्कूल की भी सफाई देखूगीं आकर|इधर जैसे ही आस पास के गाँव में पता चली कि डी.एम आने को हैं तो पूरे गाँव में दिन-रात सफाई का काम होने लगा|
गौरी ने कहा,"मिश्रा जी,दीवारें साफ हुईं वो जो लिखा था बाबा बंगाली बवावसीर के लिय् मिलें|ये सुन कर आफिस में सब लोग हँस पड़े|मैड़म ने कहा,"कल गाँव के सभी प्रधानों
और नगरपालिका के लोगों और सभी आधिकारियों की मीटिंग बुलाओ कि वे लोग आठ दिन के अंदर सब सफाई कर दें वरना सबका एक महीने का वेतन कट जायेगा|
       इस मीटिंग के खत्म होने के बाद से सूबे में सबकी हालत पस्त थी |डर के कारण चारों तरफ सफाई चल रही थी|डी.एम ने अचानक तहसील और कचहरी का निरीक्षण किया वहाँ
हड़कम्प सा मच गया सब लोग फाईलें समभालनें में लग गये|डी.एम ने कहा,"आप सभी अधिवक्ता लोग यूनीफोर्म में आया कीजिये प्लीज और मुकदमों को जल्दी फाईनल करने की कोशिस करो ताकि लोगों को तुरन्त न्याय मिले |दो पीड़ी बीत जातीं है तब तक दो बीघा खेती का बटवारा सुलझ नहीं पाता और लड़की तारीख पर आ आकर बूढ़ी हो जाती पर उसकी समस्या का निदान नहीं होता अरे!आप लोग अपना काम तो ईमानदारी से और जल्दी निपटाने की कोशिश करें अपनी शक्ति को पहिचाने गल्त इल्जाम में फंसे लोगों के आप ही भगवान हैं इस बातको समझें|वकील धीरे से बोले,"ईरा जैसी ही लगती हैं |"और फिर दूर खड़े क्लाईन्ट लोगों से उनकी समस्यायें सुनी और उनको भरोसा दिलाया कि मैं ऊपर पत्र लिखूँगी कि देश में तुरन्त न्याय की व्यवस्था हेतु सरकार कुछ ठोस कदम उठाये|
वो गाड़ी में बैठ अपने ऑफिस वापस आ रहीं थीं कि उन्होंने देखा कि चारों तरफ पुल की दीवारें साफ हो रहीं हैं चारों तरफ लोग सफाई में जुटे पड़े हैं|गौरी संघाल को यह देख बहुत खुशी हुई|गौरी संघाल ने अपने घर के अंदर जैसे ही पाँव बढ़ाया कि तभी एक फोन आया गौरी ने कान में लगाया और तभी किसी ने  कहा कि पाँच हजार भेजो |गौरी ने उदास चेहरे से कहा,"ओके,अभी भेजती हूँ|"
पीछे ड्राईवर जगत ने कहा,"क्या बात है मैम?" गौरी ने कहा,"जगत,ये पाँच हजार रूपये इस खाते में डाल देना|जगत ने कुछ पूछने कि कोशिश की पर वह हिम्मत न कर सका|जगत चला गया |इधर गौरी संघाल ने डॉक्टर बंसल को फोन मिलाया हैलो!
डॉक्टर बंसल ने कहा,"मैम,उनकी हालत में थोड़ा सुधार हुआ है हाँ पर किसी को सोच कर ये फूट-फूट कर रो पड़ते हैं|गौरी ने कहा,"डॉक्टर गुरनानी क्या कहते हैं?"
डॉक्टर बंसल ने कहा,"वो कहते है धैर्य रखो सब ठीक हो जायेगा|गौरी ने कहा,"ठीक है,कहकर फोन रख दिया|गौरी ने कुछ देर बाद खाना खाना शुरू किया तभी कुछ सोचकर एक कॉल की पर किसी ने फोन नहीं उठाया |गौरी ने भरी आँखों से खाना खाया और कुछ देर टहलीं फिर उन्होंनें इंस्पेक्टर सावन को कॉल की हैलो,इंस्पेक्टर सावन,"वो लेखिका अरूणा नारंग जी के कैस का क्या हुआ ?"इंस्पेक्टर सावन ने कहा,"मैम,सब आरोपी हिरासत में हैं बेलौस बजा है सब पर कोई बकसा नहीं जायेगा मैड़म जी,वो बेहतरीन उम्दा लेखिका थीं बस उनके शब्द ही रह गये पर वो न रहीं ताज्जुब इस बाक का है कि वो महिलाओं पर हो रहे शोषण पर लिखतीं थी और उन्हीं के साथ ये हुआ|गौरी ने कहा,"यही तो विड्म्बना हैं इस देश की |इतना कह कर गौरी ने फोन रख दिया और फिर लैप टॉप पर देर रात तक इरा सिंघल जी के बारे में जानकारियाँ जुटाती रहीं उसके बाद वो लैटने चली तो उनकी खाना बनाने वाली बोली,"मैम,वो ड्राईवर भाई ये पैकेट रख गये |गौरी ने कहा,"ओह! पासबुक ठीक है अब तुम जाओ|
आज एक महीना बीत गया.......
पूरे भिमारी जिले में चारो ओर सफाई थी|सब ठीक चल रहा था|गौरी अपने ऑफिस में बैठीं हुईं थीं और सभी लोग अपने-अपने कार्य में व्यस्त थे |गौरी ने दैनिक जागरण अखबार उठाया और पढ़ने लगी तो देखा कि दहेज़ के लालच में घर से निकाली गयी नव विवाहिता, गहेज़ के लालच में गर्भवती को पीट कर मार डाला |पेज पलटा तो देखा कि होटल मालिक ने किया बाल मजदूर बच्चों के साथ कुकृत्य हल्ला मचाने पर की पाँच बाल मजदूरों की हत्या, बी.एड बोरोजगारों को धरना, बेरोजगार करेगें अब जंतर - मंतर पर राष्ट्रव्यापी धरना , पाँच साल की बच्ची के साथ उसके चाचा ने किया दुष्कर्म मुगल रोड पर भारी जाम चारो तरफ आगजनी मचा है पूरे गेश में बवाल |गौरी ने कहा,"मिश्रा जी,आपने जागरण पढ़ा?"मिश्रा जी सुस्त मन से बोले,"हाँ,मैम पढ़ा |गौरी ने कहा,"आप लोग बताओ आखिर!क्या होना चाहिये अब तो अति हो गयी है |मिश्रा जी ने कहा,"हर जिले में एक दो फाँसीघर हों और रोज़ जनता ऐसे कुकर्मी चाचाओं को पकड़ कर अंतिम झूला झुला दे बस क्राईम खत्म आज डर तो है नहीं इनको कानून को पैसे के दम पर छूट जातें हैं |गौरी बात काटते हुईं बोली,"मिश्रा जी हम बवाल नहीं शान्ती चाहतें हैं|"अच्छा तो एक सेमिनार का आयोजन करो जिसमें सभी कॉलेज स्टूडेन्ट्स को बुलाओ हम उनकी राय लेगें|मिश्रा जी ने कहा,"मैम,परसो से चुनाव हैं हर तरफ सरकारी अध्यापक-अध्यापिकायें प्रदर्शन कर रहीं हैं कि उनकी चुनाव ड्यूटी से बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्व होती है|आधार संहिता लगी है ऐसे में बच्चों की भीड़ मतलब बवाल |बात हो ही रही थी कि तभी मीडिया के लोग आ गये तो गौरी ने कहा,"आप लोग पेपर में निकालो कि हर आयोग का अपना स्टॉफ है तो चुनाव आयोग का क्यों नहीं और नहीं तो जितने बेरोजगार हैं उनको ट्रैनिंग दो और उनका मेहनताना दो और चुनाव ड्यूटी करवाओ इससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई भी बाधित नहीं होगी और बेरोजगारों को धनलाभ भी हो जायेगा और एक बात सरकारी स्कूल में केवल रविवार का दिन ही निश्चित करें वरना कोई और बिल्डिंग उपयोग करें|ये पूरी बात पेपर में निकालो कि इस बात में हाईकोर्ट ध्यान दें|मीडिया वाले बोले," और कुछ मैम|" गौरी ने कहा,"शुक्रिया|"मीडिया वाले बोले,"किस बात का शुक्रिया?"गौरी संघाल ने कहा,"आप सभी की मेहनत के कारण हमको अपने जिले और देश-दुनिया की जानकारी मिलती है|मीडिया वाले बोले कि ये हमारी ड्यूटी है मैम कहकर ऑफिस से बाहर चले गये |तभी गौरी संघाल ने इंस्पेक्टर सावन से फोन पर बातचीत की और ऑफिस के कुछ लोगों के साथ बाहर निकलीं और जगत से कहा," आमावता गाँव चलो देखते हैं लड़की को क्यों निकाला है आखिर!फिर चलेंगें केशव गंज जहाँ गर्भवती को...और फिर चलेगें बच्ची के घर .... अब चलो|अमावता पहँचती हैं तो नवविवाहिता गौरी से लिपटकर रो पड़ती है और कहती है कि मैं बी.एड हूँ टी.ई.टी में पास नहीं हुई मतलब मुझे नहीं मेरी कमाई चाहिये बस जब मेरी सरकारी नौकरी नही मिली तोमार-पीटकर घर से निकाल दिया |गौरी ने कहा,"तुम एनजीओ चलाओगी बोलो अपने जैसी और भी लड़कियों की मददगार बनना इसके  लिये सरकार तुमको पैसे भी देगी बोलो?"वो बोली,"मैम, मैं जरूर करूगीं मेरी और भी सहेलियाँ हैं उनको भी जोड़ूगीं |गौरी ने कह,"शाबाश! आगे बढ़ो और बढ़ाओ इससे जुड़ी सारी जानकारी मैं तुमको दूँगीं और मैड़म सुचित्रा जी हैं उनसे में तुमको मिलवाऊँगीं ये लो उनका नम्बर वो देश के सबसे बड़े एन जी ओ की सदस्या हैं|वो लड़की, गौरी के पाँव छूने लगी तो गौरी ने कहा,पाँव छुओ नही पाँव मजबूत करो और अपने ससुरालवालों का नम्बर इन महिला पुलिस मंजिल सैनी को दो और पूरी बात बताओ|सारी बात के बाद डी.एम गौरी संघाल उस गर्भवती महिला के गाँव केशवगंज पहुँची तो लोगों की भारी भीड़ उनपर चिल्लाने लगे और उग्र भीड़ ने उनकी गाड़ी के शीशे फोड़ दिये| बड़ी मुश्किल से गौरी उस घर में पहुँची तो उसकी माँ उस नवविवाहिता की मिट्टी पर बुरी तरह तड़प के रो रहीं थीं |गौरी ने उनको गले से लगा लिया और बोली कि मत रो, वों बोलीं कि इसका पति जीते जी मर गया और बेटा पेट में जिंदा दफ़न हो गया कौन देगा इसकी चिता को आग और चिता को आग वही देगा जो इसको न्याय दिलायेगा|यह सुनकर चारों तरफ हल्ला मता रहे लोग इकदम खामोश हो गये|उस बेटी का पिता आँसू पोछते हुऐ बोला,"अरी!रामराजा रात होने से पहले अर्थी लग जान दे तू कबतक सेंतें रखेगीं मरी बेटी को|माँ चिल्लाई मेरी बेटी मरी नहीं मारी गयी है और तुमको ज्यादा जल्दी है तो मैं भी चलूँगीं शमशाम तक वरना मुझे मेरी बेटी केसाथ अकेला छोर दो|
इससे अच्छा तो मेरी बेटी किसी के साथ भाग कर शादी कर लेती जहाँ रहतीं खुश रहती कम से कम जिंदा तो होती |देख लो मिल गयी शान्ती समाज लोग अरेन्ज मैरेज आपकी नाक बच गयी पर मेरी बच्ची मर गयी अब समाज दिलायेगा मेरी बच्ची को न्याय बोलो पायल के पापा बोलो कह कर रो पड़ी|वो बोले,"तुम भी चलो शमशान तक |और मिट्टी उठी तो चारो तरफ चिल्ला चीख मच गयी मैं भी रो पड़ी और सभी शमशान में पहुँचे जब आग लगाने की बारी आयी तो उसकी माँ ने सब की तरफ देखा कोई आगें नहीं आया तो माँ चिल्लायी मैं पैदा कर सकती हूँ तो आग भी दे सकतीं हूँ मैं दिलाऊँगीं मेरी बच्ची को न्याय|और आँखों में न्याय के दहकते अंगार भर कर एक माँ ने बेटी को मुखाग्नि दे डाली ये देख गौरी बोली माँ तेरे कलेजे को प्रणाम है और चुपचाप वहाँ से निकलने लगीं तो एक औरत बोली पुरानी वाली डी.एम ईरा जी होतीं तो वो उस माँ को मुखाग्नि देने नहीं देती इतना कहकर वो महिली आगे बढ़ गयी|गौरी ने मिश्रा जी क्या मतलब इस बात का?"तो मिश्रा जी ने कहा कि डी.एम ईरा सिंघल होती तो मुखाग्नि वो स्वंय देतीं आगे बढ़कर|
गौरी बोली,"क्या ?"तो मिश्राजी ने हाँ में सर हिला दिया|उसके बाद गौरी पाँच साल की बच्ची दो अस्पताल में थीं वहाँ पहुँचीं तो देखा
पुलिस प्रशासन डी.एम मुर्दाबाद के नारे लग रहे थे पूरा मुगल रोड़ जाम था|ट्रक बाईक सब फूँक डाले थे लोगों ने बुरा हाल मचा था पुलिस पानी की भारी बोछार से लोगों को भगा रहीं थीं लोग सड़क परलेटे हुऐ थे पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी उन प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटाने में किसी तरह गौरी अस्पताल के अंदर बच्ची के रूम में पहुँचीं| बच्ची ने आँख खोलकर गौरी की तरफ देखा और फिर उसकी आँखे हमेशा के लिये बन्द हो गयीं पास मैं बैठी उसकी माँ बेहोश हो गयी गौरी ने उस बच्ची को गोद में उठा कर सीने से लगा लिया और तभी वो बच्ची जी उठी गौरी खुशी से बोली बेहोश पड़ी माँ से कि लो आपकी बच्ची जिन्दा है तो डॉक्टर ने कहा कि नो मोर वे मर चुकी हैं कमजोर दिल की थी सह ना सकी ये सब|
गौरी ने कहा,"इस बच्ची का पिता!"
पास खड़े लोग बोले वो इस  दुनिया में नहीं|
गौरी ने कहा,"कोई नहीं,आज से मैं हूँ इस बच्ची की माँ|"और उस बच्ची को गोद में लेकर वो गाड़ी की तरफ बढ़ गयीं वहीं खड़ी महिलायें बोली पहलेवाली डी.एम होतीं तो वो भी यही करतीं यह सुनते हुऐ गौरी चुपचाप गाड़ी में बैठ गयीं |
एक हफ्ते बाद फिर एक कॉल आयी कि दस हजार रूपये भेजो |गौरी स्वंय जाकर उस खाते में रूपये डाल आयीं ये देख ड्राईवर जगत से रहा नहीं गया और वो सवालिया नजरों से बोला,"मैम,?" गौरी ने कहा,"हाँ,बोलो तभी गौरी का फोन बजा और गौरी ने कहा,"हाँ, डॉक्टर साहब|उधर से डॉ बंसल बोले कि मैम पत्रकार इकदम ठीक हैं दीमागी रूप से पर अभी भी थोड़ी मानसिक और शारीरिक कमजोरी है हमको बताया गया है कि आयुर्वेद और योग इनको मजबूत बना सकता है तो हम इन्हें 'भण्डारी योगा आयुर्वेदा
अरोग्या धाम हिमालया संस्थान के माने हुऐ डॉक्टर, डॉ अशोक धींगरा (आदि), जयपुर ले जा रहें हैं और भगवान ने चाहा तो वो कुछ ही दिनों में अच्छे हो जायेंगें|गौरी बोली,बस वो अच्छे हो जायें|दूसरे दिन जब गौरी ऑफिस पहुँचीं तो ऑफिस के बाहर लोगों की भीड़ लगी देखी हो हल्ला मचा कुछ समझ नहींआ रहा था कि तभी गौरी ने कहा,आराम से बताओ बात क्या है|इक आदमी बोला जिले में देखो कुछ लड़कियों ने डांस बार खोला है रातभर ड़ीजे बजता है गलत काम होता है बच्चे नहीं बिगड़ेगें बोलो |गौरी ने कहा,"बार कहाँ खोला है ?वो आदमी बोला," सरकारी कॉलेज के सामने| गौरी ने कहा,"जगत गाड़ी निकालो और मैड़म सीधे ही कॉलेज रोड़ पर आकर गाड़ी खड़ी की और मैड़म ऑफिस के लोग सब उस डांस बार में पहुंचे तो देखा तेज आवाज में गाना बज रहा जिस्म की आवाज को रोज सुना तुमने मेरे यार .....डी.एम को देख तुरन्त गाना बन्द हुआ गौरी ने कहा किसका आईडिया है ये कौन है मुखिया सामने आओ|एक लड़की मात्र दो बहुत ही छोटे महीन (इनर वेयर) कपड़े में कुर्सी खींच के बोली बैठो मैडम और दूसरी कर्सी खींच खुद बैठ गयी और बोली बाहर मीडिया हैक्या बुलनाओ न यार तभी मीडिया के लोग भी अंदर आ गये वहाँ खड़े सभी लोग उसको देख नज़रे नीची करे हुऐ खड़े थे क्योंकि पूरा शरीर खुला था|गौरी कुर्सी पर बैठ गयी और बोली,"ये सब क्यों?  तुम जानतीं हो क्यों का मतलब बताओ बस? तभी पुलिस भीवहाँआ गयी कॉलेज के अध्यापक भी और भारी भीड़ इक्ट्ठा हो गयी कॉलेज के लड़के वीडियो बना रहे थे पुलिस वाला बोला,"चुप क्यों है बोल अब नंगापन फैला रखा है मस्ती चढ़ी है बेशर्म ना जाने किस माँ की गंदी औलाद इतना सुनकर वो आँखों में अंगारभर गुस्से में कुर्सी उठा कर बोली," चुप हो जा तुम किस माँ की गन्दी औलाद हो जो रात के अंधेरे में मुझे अपनी जॉन और दिन के उजालों में बदजात कहते हो बोलो.... गौरी बोली,"तुम अपनी बात कहो शान्ती से|
वह बोली,"मैड़म क्या बोलूँ, बेदख़ल की एक ही जगह होत है वो है|ससुराल वालों ने गाड़ी की डिमाण्ड की पूरी नहीं तो हमेसा के लिये जाओ जब चली आई तो बदनामी उड़ा ड़ाली कि मैं गलत हूँ चरित्रहीन हूँ जब मैं रात को पुलिस स्टेशन गयीं तो पुलिसवालों ने जबरजस्ती मेरी किस ले ली मतलब चुब्बन और मजे लेने चाहे तो मैं वहाँ से भागी| सुबह सोचा इस कॉलेज में डेली बेसेज पे पढ़ाने लगूँ तो ये प्राचार्य महोदय बोले मस्त मॉल हो अपनी एक रात मुझे दे दो |ये समाज कमजोरों के लिये नही है| यहाँ लड़की को देखते ही नोच खाने वाले ये लोग इंसान नहीं बल्कि चील हैं|ससुराल में जाओ तो ससुर समाज में रहो तो ये चील तो जब यही करना है तो खुलेआम दिन में और इस कॉलेज में रात बिताने पर जॉब पक्की होती हैं तो दिन में मौज़ क्यों ना हो फिर|पापी पेट है मैड़म जब बदनाम हो ही गये तो बदनाम ही मेरा नाम है, बजाओ गाना |गौरी ने जगत से कहा,गाड़ी से मेरा एक दुपट्टा उठा लाओ|जगत ने तुरन्त सफेद दुपट्टा लाकर दिया|मैड़म गौरी ने कहा,"सुनो और वो दुपट्टे से उसका तन ढ़क दिया और उसे गले से लगाकर बोली,"मेरे साथ रहोगी आज से और वहाँ खड़ी तमाम लड़कियों से कहा," तुम सब भी जाओ जाकर दुपट्टे डाल के आओ|
वो लड़की बोली,"लेकिन मैड़म,वो..और रो पड़ी|गौरी ने कहा,"ये सफेद दुपट्टा नहीं हिन्दुस्तान की तिरंगा है याद रखना इस पर कोई दाग ना लगने पाये और कोई पापी इसे छू ना पाये| मैं पढ़ाऊँगीं तुम सबको जिससे तुम सब डी.एम बनके देशकी सेवा कर सको चलो घर|वो लड़की डी.एम गौरी संघाल के गले से लगकर खूब रोयी|भीड़ ये देख घीरे-धीरे से खिसकने लगी तो मैड़म बोली,"मिश्रा जी इस कॉलेज के प्राचार्य और न पुलिसवालों को तुरन्त सस्पेण्ट करो अभी और इंस्पेक्टर सावन से कहो कि इन सभी बेटियों के ससुरालियों को तुरन्त पकड़ो और सुधरने का टॉनिक दो|
शाम को घर आकर डी.एम गौरी अपनी छोटी सी बेटी को दुलारने लगी जिसे अस्पताल से लायीं थीं और उन सभी बेटियों को इलाहाबाद सिविल सर्विसेस की तैयारी के लिये रवाना कर दिया और जाते समय कहा मेहनत से पढ़ना और किसी बात की चिन्ता ना करना ठीक है|
दो हफ्ते बाद..
शाम को डी.एम अपने घर पहुँचीं तो देखकर दंग रह गयीं सामने डॉ बंसल और पत्रकार बैठे हैं...वो खुशी से बोली,"अरे!आप ये तो गलतबात ना कॉल ना मैसैज कहीं खुशी से मर ना निकलूँ |डॉ बंसल बोले मैम हम मरने निकलने देगें तब ना और सब लोग हँस पड़े पत्रकार जी बोले,"धन्यवाद मैम ...आगे क्या कहूँ मैं....गौरी बोली,"कुछ ना कहो चलो चाय हो जाये |बाद मैं गौरी बोली,"बंसल जी शुक्रिया, तो बंसल बोले,"मैम,नो हम सब दोस्त हैं हाँ पर डॉ अशोक धींगरा जी ने खूब आसन करवायें हैं उनकी मेहनत का शुक्रिया कर दीजिये आप ये लो नम्बर मिला दिया है आप बात कर लो |गौरी ने कहा,"डॉ धींगरा जी आपका शुक्रिया हम आपको एक गिफ्ट पार्सल कर रहें हैं प्लीज ऐसेप्ट कर लेना प्लीज|वो बोले,"नहीं,मैम आपकी खुशी ही मेरा गिफ्ट कहकर खुशी से बॉय कहकर फोन कट गया|सब लोग खाना खाकर अपने घर लौट गये तब रात को गौरी ने पत्रकार जी से कहा,"सर,अब आप कैसा महसूस कर रहें हैं?"पत्रकार बोले कि कॉफी हल्का सा अच्छा फील कर रहा हूँ पर मेरा ये शरीर यादों के  वजन मतलब भार से ज्यादा और कुछ नही|
गौरी ने कहा,"अपना थोड़ा भार हमें दे दो सर
और मेरे कुछ सवालों के जवाब दे दो बस प्लीज जो सिर्फ आप ही दे सकते हैं|पत्रकार ने कहा,"पूछो|"
गौरी,"आपका सही नाम क्या है?"
पत्रकार ,"मेरा नाम भी पत्रकार और काम भी पत्रकार |"
गौरी,"डी.एम ईरा सिंघल केबारे में जो भी पता हो शुरू से बताओ जब से आप उनको जाने तब से...
पत्रकार ने कहा," ईरा सिंघल जी जब से इस भिमारी जिले में आयीं तब से हर छोटे बड़े अधिकारी की नींद छिन चुकी थी वो रात को काम देखने निकलतीं थीं और रोज ही नया बवाल मचता तो हमको आना पड़ता इंटरव्यू लेने |एक दिन बड़ी दर्दनाक घटना हुई कि पास के नौली गाँव की दो नवविवाहिता ईरा मैड़म के ऑफिस के बाहर रोतीं आयीं और वहीं खत्म हो गयीं ससुरालवालों ने ऐसिड से उनको पूरा नहला रखा था मैड़म कुछ कह पातीं की उग्र भीड़ ने बवाल खड़ा कर दिया चारो तरफ भीड़ और मुर्दाबाद के नारे तभी तुरन्त दो लड़कियाँ रोतीं आयीं कि ससुरालवाले बहुत पीटतें हैं मैम ये सब देख मैड़म की आँखों से लावा घधक उठा और वो बोली या तो ईरा सिंघल रहेगी या तो अब दहेज वायरस ही रहेगा |आप लोग थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाइये जाकर फिर ईरा है ना|ईरा जी फिर थाने गयीं तो पता चला दहेजलोभी धनवान पढ़े-लिखे लोग हैं कोई वकील कोई इंजीनियर कोई  डॉक्टर वो बोली कमाल है धिक्कार है आपकी पढ़ाई-लिखाई पर जो रहम एक शब्द  सीख ना सके |उस थाने का इंस्पेक्टर खान जो पटा(बेल्ट) बजाने के लिये फेमस था वो दोषी को बाहर पेड़ में बाँधता और विकट मारता पटे की आवाज दूर तक जाती और हर कोई उसे देखकर काँप जाता था|ईरा ने कहा,"खान,छोड़ना नहीं इन सबको|और मुझ से बोली,"पत्रकार जी बनाओ इन सभी के पिटते हुऐ वीडियों और नेट पर वायरल कर दो ताकि फिर कोई दहेज माँगने में चालीस बार सोचे बस मैं यही सब कवरेज करता था|दूसरे दिन ईरा जी ने खुद के पैसों से पूरे थाने में वीडियो कैमरे लगवाये और चौराहों पर भी एक हफ्ते के अंदर पूरा थाना ऑनलाईन हो गया |सही सब मैनेअपने अखबार में खूब छापा|
फिर एक दिन एक भाई अपने बहिन की लाश उठाये ऑफिस के बाहर रख के बोला मैड़म न्याय करो|जब बाहर जाकर देखा तो लाखों की भीड़ और बुरी तरह हल्ला मचा रूह काँप गयी उसकी बहन की लाश देखकर दो लोहे के मोटे बेलचा खून में सने वे भाई पकड़े खड़ा तभी एक बुजुर्ग बोले मैड़म इस बच्ची के साथ रोज दुस्कर्म करते थे इसके ससुराली लोग जब रात ये भाग निकली तो रास्ते में मुझे जाता देऱ बोली बाबा बचा लो तब सारी बात बता ही पायी कि पीछे से गाड़ी से कुछ लोग उतरे और बीच सड़क पर सबने गलत काम किया मुझे मुझे भी बहुत पीटा बाद में मैने देखा कि दो बेलचे इस बच्ची के शरीर के आर-पार कर दिये ये भयानकता देख मैं बेहोश हो गया सुबह होश आया तो देखा लाश पड़ी तो याग आया उसने अपने भाई और पास के गाँव का नाम बताया मैंने इस भाई को जैसे बताया इसने तुरन्त अपनी बहन के शरीर से बेलचे निकाले और दौड़ता ही चला गया और सीधे बहन की ससुराल पहुँच कर ससुर और जीजा के शरीर में ये बेलचे आर -पार कर दिये नन्द सास चिल्लाई तो उन्हीं बेलचों से उन दोनों को बहुत मारा दब तक दोनों बेहोशना हो गयीं और फिर ये देख देवर दूर कहीं भाग निकला तब ये बाद में अपनी बहन को देख बहुत  रोया है और आपके पास आया है मैड़म यह सुन ईरा मैड़म जमीन पर बैठ रों पड़ी थीं और बोली,"पॉसमार्टम के लिये भेजो रिपोर्ट आने दो कागज हाँथ में आने दो....चिंता ना करो भाई तुमने जो किया इकदम सही किया मेरा वादा है बहन को न्याय मिलेगा और तुमको भी सजा मैं होने नहीं दूँगीं|
दूसरे दिन ईरा मैड़म डॉक्टरों से मिलीं तो पता चला कि डॉक्टर साहब खुद लड़की ससुराल से प्रताणित घर मायके बैठी है पूछा तो बोले कि कौन कोर्ट कचहरी करें समाज में बदनामी ले|ईरा मैड़म थाने पहुँचीं तो देखा कि धाकड़ आदमी इंसपेक्टर खान फोन पर बात करते हुऐ रो रहे हैं|ईरा जी ने पूछा तो पता चला खान की भी लड़की ससुराल से प्रताणित हो किसी अस्पताल में ऐडमिट है वो बोले,"मैड़म क्या करू कुछ समझ नहीं आता मैं ड्यूटी करूँ या घर देखूँ या कोर्ट कचहरी करूँ इज्जत और पैसा दोनों की बरबादी बेटी कहती है कि उनको कुछ न कहना मैड़म
फिर भी मैने केश कर दिया तो रोज छुट्टी तारीख कहीं जज का तबादला कचहरी में जेंबें खाली की जातीं हैं और तारीखें दी जातीं हैं बस न्याय कहीं नहीं| बेटी को कचहरीलियें फिरूँ या ड्यूटी करूँ| मैने इतना दिया फिर भी ...कोई और नहीं मेरे सीनियर है उसके ससुर क्या बोलूँ मैं वकीलों को मोटी रकम देने को कहाँ से लाऊँ पैसा! कह कर सिर पकड़ कर बैठ गये|ईरा जी और मैं चुपचाप वहाँसे चले आये और ईरा जी के घर आकर हम दोनों ने चाय पी वो बोलीं,"आप ही कोई रास्ता बतायें इस समस्या से निजात कैसे मिले पत्रकार जी|हमने कहा मिलकर सोतते हैं तो वो मुस्कुरायीं और बोलीं ठीक है|
कुछ देर बाद बोलीं आप कल अपने और अपने जानकार वाले सभी समाचारपत्रों में ये लिखो कि जिले में जितनी भी दहेजपीड़ित बेटियाँ हैं वो सभी कल रविवार को जिले के सबसे बड़े लाल बाग स्टेडियम में एकत्र हों डी.एम ईरा सिंघल आप सभी से बात करना चाहतीं हैं|
दूसरे दिन स्टेडियम खचाखच भरा था और पीरा रोज़ जाम था  इतनी भीड़ की मैड़म हैरान खड़ी देख रहीं कि ओफ हो!जब एक जिले में इतनी दहेजपीड़ित बेटियाँ हैं तो पीरे देश में बेटियों की क्या हालत होगी|हजारों बेटियों की भारी भीड़ को मैड़म नेअपने भाषण में बोला,"मेरी बहनों हम सब एक हैं अाप दुखी तो हम दुखी इसलिये परेशान ना हो तुम काँच हो तो चुभती हो सभी की आँखों में बनोगी जिस दिन शीशा दुनिया खुद को तुम में देखेगी जो भी हुनर हो तुम में बस दिखा दो दुनिया को |चारों तरफ तालियाँ बज उठीं|
फिर बोलीं यहाँ से जाने के बाद एक काम करना अपनाअपना शादी का कार्ड निकालना और आपने  अपनी शादी में जिसको भी न्योता दिया था एक बार फिर से सभी रिश्तेदारों नातेदारों मित्रों सभी को फोन से नेट से सूचना दो कि अब मेरा रिश्ता खत्म हो रहा है उस दुखत दावत में आप सब लोग लाल बाग स्टेडियम में पधारें जरूर यहाँ उपस्थित हरबेटी ऐसा करेगी और सब बेटियों के सभी रिश्तेदारों आदि को यहाँ ऐने को कहेगी कब अगले रविवार को|जय हिन्द मेरी बहनों ईरा सिंघल आपके साथ है कह कर वो वहाँ से चल कर अपनी गाड़ी में आकर बैठ गयीं कैसे कैसे भीड़ क थामा गया ये तो इंस्पेक्टर खान और उनकी टीम ही जाने|हम लोग कुछ ही आगे बढ़े कि कुछ वकीलों ने गाड़ी रोक ली और बोले,"ये तरीका ठीक नहीं क्या कहते हो पत्रकार साहिब|"मैड़म तुरन्त बाहर निकल के बोली,"ये बताओ कि क्या आप सभी की बेटियाँ अपने ससुरालों में खुश हैं?"तो वहाँ खड़े कुछ वकील बोले,"हम अपनी बेटियों को कोर्ट में खड़ा कैसे करें हमारी इज्जत का क्या होगा क्लान्ट कहेगा पहले अपना रायता तो बटोर लो फिर हमारा बटोरना|
ईरा जी गुस्से से बोलीं,"आप लोग अपनी सामाजिक इज्जत के कारण अपने घरों में अपनी बहन बेटियों को घुट-घुट के मरने दे रहे हो बोलो क्या आप लोग भी दोषी नहीं हो?आगे आप समझदार हो|इतना कहकर गाड़ी मैं बैठ हम दोनों घर लौट रहें थे तभी दूर एक कॉलेज की बिल्डिंग बन रही थी पर ये क्या वहाँ बाहर इतनी भीड़ क्यों हैं?मैड़म ने कहा तो मैं बोला कि लगता है कोई बवाल है चलो चलकर देखें क्या?"मैड़म बोली बिल्कुल |जब वहाँ पहुँचे तो सब चुप हो गये तो ठेकेदार बोला कि अरे आप आइये बैठिये|मैम की सवालियाँ आँखें देख वह बोला," इन मुँह ढ़के लेवर में कुछ लड़कियाँ भी हैं ये सब लेवर जवान लड़के हैं कुछ गलत हुआ तो होगा बवाल इसलिये मैने इन सबको बाहर कर दिया है चाहे कहीं जाकर काम करें मुझ पर गौर करो चाहे जिस पर दौड़ पड़ो जाओ|
तब ईरा मैड़म ने कहा,"आप लोग अपने मुँह खोलो और साफ बोलो सच बोलो, कोई एक बोलो जो मुझे समझ आये|
भीड़ ने जब चेहरों से रूमाल और स्टॉल उठाये तो मैड़म और मैं दंग रह गये ये सब तो पढ़े लिखे अच्छे घरों के बच्चे है|उनमें से एक बोला कि मैम हम सामान्य जाति के बेरोजगार हैं ना हम किसी स्वतंत्रता सेनानी कोटे में आते हैं और ना ही विकलांग ना हमारे पास रिश्वत हैं देने को ना नेताओं की जुगाड़ें |सरकारी नौकरी तो कोटे वालों को ही मिलती है आज और जब हम प्राईवेट जॉब के लिये स्कूल कॉलेजों में गये तो दो तीन महीने लटका के पैसा देते हैं फिर दिल्ली बैंग्लौर गये तो रूपैया छै हजार उसी में रहना खाना आना जाना और अच्छे कपड़े ना हों तो लोग मजाक बनाते हैं और हम यू पी बीहार वालों के साथ अच्छा सलूक नहीं करते तो क्या करें वापस घर लौट आये तो पता चला की माँ बीमार सरकारी अस्पताल का आलम यह है कि बस एक सी गोलियाँ चूरन की तरह सबको बाँट देते हैं चाहे पेट दर्ग हो या मलेरिया ज्यादा परेशानी तो बोलते दिल्ली एम्स में जाओ और जब ऐम्स जाओ तो नेताओ की सिफारिस हो हम जैसे लोग को उनकी और उनकी रिपोर्टों की तगड़ी फीस वहाँ से भगा देती है
और तब गाँव कस्बों में झोलाझाप डॉक्टर और भगत झाड़ फूँक मरीज की जॉन ले डालते हैं |आज दाल भी सौ रूपये के ऊपर है|तो मंहगाई और घर के इन हलातों को देखकर चुपचाप घर में बैठने से अच्छा है मुँह ढ़ककर लेवरी कर लें |हम में से कोई पुकाई कपता है कोई खिड़की लगाता है कोई मिस्त्री है और ये कुछ लड़कियाँ हमारी दोस्त हैं जिनको उनके ससुराल वालों ने दहेज के कारण मार पीट कर घर से निकाल दिया और इनके छोटे बच्चे को खिलाने के लिये मेहनत मजदूरी कर हम पेट पाल रहें तो क्या गलत है मैड़म जी|मजदूर होना गलत है क्या?"
ईरा मैड़म बोली कि इस दुनिया में हम सब मजदूर हैं |मुझे खुशी है कि तुम सभी ने मेहनत का रास्ता चुना|चलो मसाला कौन अच्छा बनाता है आज हम भी लगायेहें कुछ ईंटें और मैड़म को ईंटे लगाता देख में ये खबर कवरेज कर रहा था बाद में मैड़म ने कहा,"ये लो कुथ नम्बर जो भी सिविल की तैयारी करना चाहता हो मैं मदद करूगीं और तुम लोग तैयारी भी करते रहना दो भी परेशानी होगी वो अकेली तुम्हारी नहीं अब हमारी होगीऔर वहाँ खड़ी लड़कियों से कहा समय हो तो लाल बाग स्टेडियम में आना सब लोग अपने जिले की डी.एम को अपने बीच पाकर वहाँ बहुत खुश थे|जब हम गाड़ी में बैठे तो मैड़म बोली कि मुझे दुख है कि इस बेरोजगारी ने इतने पझ़े लिखे बच्चों को लेवर बना दिया|मैंने कहा,"बेरोजगारी ने भी और वोट के लालच इस कोटे ने भी मैंड़म जी|
दूसरे दिन अखबार में ईरा मैज़म छा गयीं थीं हर पेपर में....
फिर सुबह मेरे पास फोन आया कि ये बवाली डी एम तेरी रखैल है या मासूक तू उसे खुश करने का और कोईआडिया नेट से ढ़ूढ़ अखबार में हम नेता लोग की कोई खबर ही नही होती आजकल तेरी इस डी.एम ने अगर विधायक और मंत्री बनने का सपना देख रहा हो तो बता दे कि वो पूरा होमे नहीं देगें और उससे कहो जितने भी ख्वाब देखने हैं ख्वाब में ही देखे आज से और हकीकत करने की कोशिस की तो तुझे तो मैं सोने नहीं दूँगा और तेरी उस बावाली को कभी जागने नहीं दूँगा अब रख मोबलिया और बोल राम राम |मैने कहा,"राम राम तुम हो कौन?"
बह बोला,"तुम जैसी भटकती आत्माओं के लिये में अघोरी हूँ अघोरी हा हा हा ,सच बताऊँ तो उसकी आवाज में काउी दहसत थी मेरा तो पूरा शरीर काँप सा गया था|
मैं तुरन्त डी.एम ऑफिस पहुँचा ऐर ईरा जी को पूरी रिकार्डिंग सुना दी तो वो बड़ी शान्ती से बोली गोबारा फोन आये तो कहना मुझे कोई चुनाव नहीं लड़ना कोई मंत्री नहीं बनना में बस अपना फर्ज ईमानदारी से निभा रहीं हूँ बस और समाज से दहेद रूपी वायरस को खत्म करना चाहतीं हूँ फिर वो लोग भी शान्त हो जायेंगें और तभी वो भाई आ गया जिसकी  बहन के शरीर में बेलचे आर पार कर दिये हये थे वो बोला मैड़म हमने अभी तक अपनी बहन की लाश नही जलायी है|
मैं मैड़म और उस लड़के को वहीं बात करता छोड़ वापस अपने ऑफिस लौट आया तभी फिर फोन आया सुन पत्रकार काल रविवार है और अपनीमैड़मसेबोल कोई जनता जनार्दन कोइकट्टठा करनेकी जरूरत नहीं है तभी मैं उसकी बातकाटते हुऐबोला कि मैड़म कोईचुनाव नहीं लड़ेगीं वो बस अपनी ड्यूटी कर रहीं हैं वो जोर सेहंसा औरबोला हरपागल यही कहता किमैंपागल नहीं हूँ कल अगर कोई सभा हुई तो समझ ले मुझे अघोरी कहते हैं काट मुबलिया बोल राम राम |मैंने कहा,"राम राम|"शाम को मैं ईरामैड़म केघरपहुँचा और फिर सीरियस बात की|इधर स्टेडियम में बेटियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये दा रहे थे पूपी मीडिया कवरेज के लिये तैयार थी काफी मात्रा में पुलिस बल भी तैयार है|
कुछ देर बाद मैड़म बोली,"पत्रकार जी यहाँ होनेदो जो तैयारी हो रहीं है |हम और आप दिल्ली चलो वो भी राष्ट्रपति भवन लेकिन रातमें भेष बदल कर ट्रेन से |पहले तो मुझे भी यह समझ नही आया कि राष्ट्रपतिभवन क्यों?पर मैड़म की योग्यता पर सवाल कैसा
हमने रात ये खबर उड़ा दी कि मैड़म बीमार हैं वो दिल्ली ऐम्स में हैं अब भाषण वहीं होगा| बस फिर क्या था हम दिल्ली पहुँच गये|
मैड़म को चाहने वाले सभी दिल्ली पहुँचने लगे और सुबह ऐम्स पर भारी भीड़ पहुँचने लगी ये देख हमने बाहरजाकर बोला कि मैड़म तो राष्ट्रपतिभवन गयीं हैं और वहीं धरने पर बैठ गयीं हैं |अब वहीं बात करेगीं आप सभी से|उस दिन अरे!भीड़ वो थी कि किसी भी नेता अभिनेता के लिये ऐसी भीड़ नहीं होती इतनी गजयब की भीड़ ये मान लो कि एक लड़की और इसके सभी रिश्तेदार तो जिलेभर की क्या देश भर की हर दहेज पीड़ित लड़की और उसके शादी में शरीख़ होने वाले सभी सम्बंधी लाखों से भी ज्यादाबेटियों और उनके परिवार की वो भीड़ जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया |
हम लोगों ने वहीं मंच बना दिया था और मंच को खाड़ने के लिये पुलिस आ गयी और लाठियाँ मारने लगी गुस्साई भीड़ ने पुलिसवालों को पीटना शुरू कर दिया बवाल और बढ़ जाता कि ईरा मैड़म वहाँ आ गयीं और बोली रूक जाओ तो
भीड़ से एक लड़की बोली,"सबसे बड़ी गद्दार ये पुलिस ही है बस हराम का मिले इन्हें खाने को... मैड़म ने कहा,"क्या नाम है आपका ?"वह लड़की बोली,"सबीना बानो|"मैड़म ने कहा,"शान्त हो जाओ|"फिर बोली पुलिस वालों की तरफदेख कर," आप लोग पुलिस वालें हैं अगर आप लोग की भी बहन बेटी की आँखों में आँसू हैं तो रूक जाओ और हमारा साथ दो|
मैड़म की बात और आँखों के सामने कोई टिक नहीं सकता था बस पुलिसवाले शान्ती से खड़े हो गये|
फिर मैड़म मंच पर पहुँची तो तालियाँ बज उठीं वो तालियाँ जिसने देश के दोनों सदनो मंत्रियों की हालत बिगाड़ दी थी|
मैड़म मंच से बोलीं मेरे देश की बेटियों तुम्हारा स्वागत है और धन्यवाद है|मुझे इतनी भीड़ देख बहुत दुख है कि मेरी इतनी सारी बहने दहेज से पीड़ित है दहेज समाज का कैंसर हैं| एक ऐसा वायरस जिसने आपसी प्रेम को खोखला कर दिया है|आप सभी लोग बेटी कीशादी में दावत उड़ाने शौक से सपरिवार जाते हो|हजार लोगों की उपस्थिति में एक शादी सम्पन्न होती है आप सब लोग जाते हो शादी में तो फिर उस दिन केयों नहीं जाते जब आपकी ही रिश्तेदार बहन बेटी को जलाया जाता है पीटा जाता है उसके जज्बातों का बलात्कार किया जाता है और पेट में से लोहे के बेलचे आर पार कर दिये जाते हैं तब वो पंड़ित जी कहाँ होते हैं क्या उनका दायित्व शादी की दक्षिणा मात्र है तब कहाँ चला जाता है आपका धर्म अगर आप हजारों लोग पीड़ित बेटी के साथ खड़े हो जाओ तो किसी की हिम्मत नहीं कि देश की किसी भी बेटी के आँख में आँसू आ जाये|और एक बात कि बेटी के आँसुओं को मसल कर उसको कहते हो दुख सहो हम कोर्ट जायेंगें तो बदनामी होगी आप ये बताओ आपके इंसान के जीवन से बड़ी है आपकी इज्जत अरे!इज्जत तो तब हो कि जब आप गलत के खिलाफ़ आवाज उठायें आप प्लीज अपनी बच्चियों को गबायें नहीं बल्कि उनको हिम्मती बनायें उनको प्रेम करें |हम माननीय चीफ जस्सटिस हाईकोर्ट जी से यही प्रार्थना करतीं हूँ कि आजहर काम ऑनलाईन है तो न्याय में देरी क्यों बेटियों से जुड़ा कोई भी मुकदमा एकसाल से ज्यादा ना चले और मीड़िया से भी कहूँगीं कि खबर छापें उसको चाट जैसा चेस्टी बनाने का कार्य न करें|और सबसे बड़ी बात की आप लोग पुलिस महकमे के लिये अपनी मानसिकता बदलिये|आपको पता होगा कि पुलिस कान्स्टेबल की तनख्वाय सबसे कम  और ड्यूटी सबसे सख्त होती है जब सर्दी में आप रजाई में होतो हैं तब ये मुफलर बाँधे कोहरे में आपकी सुरक्षा कर रहे होते हैं आपकी गली में सड़क पर गस्त लगा रहे होते हैं |ये कोई भी त्योहार अपनी फेमली के साथ नहीं मना पाते और आसानी से इनको छुट्टी भी नशीब नहीं होती इनके जीवन का हर पल वर्दी में कसे-कसे और परिवार की याद में घुट कर बीत जाता है कईबार तो ड्यूटी और परिवारी  उलझनों के कारण हमारे कान्स्टेबल आत्महत्या तक कर लेते हैं|बस कुछ मुट्ठी भर लोगके कारण हरपुलिसवाले को गलत मत बोलो आप प्लीज और पुलिस वालों से भीकहूँगी कि रिपोर्ट लिखने में कोई इफ और बट नहीं किया करो प्लीज आप समाज के और समाज आपका है और हम सबको मिलकर अपने समाज को खूबसूरत और सुगंधित बनाना है| यह सुनकर हर पुलिसवाले की आँख भर आई थी|फिर डी.एम ईरा सिंघल ने कहा,"आओ आज सपत लो प्रण लो कि जिस बेटी की शादी में दावत खाने जाओगे आशीर्वाद देने जाओगे तो उसके बुरे वक्त में उसका साथ देने भी जाओगे|सात वचन तो दूल्हा दुल्हन के और आँठवा वचन आप सभी ले लो आज और अभी तो उठाओ हाँथ बोलो सत्य की जीत हो दहेज़ का अंत हो|पूरी भीड़ एक स्वर में जब बोली तो मानो पूरा राष्ट्रपतिभवन हिल गया हो तभी उत्साही मीडिया की भीड़ मंच पर चढ़ गयी और  मैड़म से सवाल कर दिये कि आप राष्ट्रपति दी से क्या चाहतीं हैं?
मैड़म बोली," न्याय,इस भाई को जिसकी बहन के साथ उसके अपनो ने कुकर्म किया और बेलचों से शरीर लहुलुहान कर दिया जबये बहन की ससुराल पहुँचा तो बहन का ससुर बोला हाँमैंने किया बोल क्या कर लेगा तो इस दुखी भाई ने उसको ने उसको मार दिया तो क्या गलत किया ? जब श्री राम रावण को मारे तो भगवान जा श्री कृष्ण कंस को मारे तो भगवान अगर इस भाई श्याम ने आज के रावण को मारा तो वो दोषी कैसे?राष्ट्रपति जी इस भाई की सजा माँफ करें और देश की इतनी दुखी बेटियों को नौकरी का आश्वाशन दें वरना हम यहीं रहेंगें अब ससुराल वालों ने निकाल दिया मायकेवालों ने दान कर दिया बोलों अब कहाँ जायेंगें|
मीडिया वालेबोले,"और क्या मांग हैआपकी?"
तो मैड़म बोली,"जिस तरह गली-गली में प्राईवेट मान्यता प्राप्त विद्ध्यालय खुले हैं चाहती हूँउसी तरह जगह-जगह पुलिस थाने हों प्राईवेट मान्यताप्राप्त और सरकार दहेज़ पीड़ित बेटियों के लिये एक फूड फेक्टरी या कोई कम्पनी खोलें जहाँ इन बेटियों को रोजगार मिले |इनकी सुरक्षाहेतु सभी थाने ऑनलाईन हों चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगायें जायें बस इतना ही चाहतीं हूँ फिर मैड़म मंच से नीचे उतरी कि महिलाओं की उस भीड़ ने मैड़म को गोद में उठा लिया|इधर मेरे पास मैसैज आया कि लालबाग स्टेडियम में दो ब्लाष्ट हुऐ हैं|यह बात सुनकर राष्ट्रपति भवन के सारे प्रसारण रोक दिये गये और पूरी मीडिया मैं यह खबर भी फैल गयी कि मैड़म गायब है इस हड़बड़ी में और सरकार के सख्त रवैये के कारण सब मीडिसा को वहाँ से जल्द हटना पड़ा था फिर मैने चारों तरफ मैड़म को देखा वो मुझे कहीं नहीं दिखीं पता नहीं कहाँ उस भीड़ में गुम हो गयी मैंने सोचा कि अभी मैंने कुछ बोला तो भीड़ में भगदड़ मच सकती है कि मैड़म का अपहरण हो गया|दूसरे दिन लोगों ने उनको देवी बना दिया की वो दैवीयशक्ति थीं और काम करके अद्रश्य हो गयीं पर मझे रोना आ गया कि मैड़म किस हाल में होगीं और हमने बहुत ढ़ूढ़ा पर उनका कोई पता नहीं चला और आज तक पता नहीं चला पाया हूँ मैं नाकाम हूँमैं और मेरा जीवन कहकर रो पड़े फिर चेहरा पोछते हुऐ बोले कि उस दिन पूरी दिल्ली में भीड़ के कारण पूरा यातायात बस ट्रेन सब का बुरा हाल था इतनी  मीड़िया और पुलिस थी की राष्ट्रपतिभवन पूरा छावनी में तबदील हो चुका था बात भी इतनी गम्भीर मसले की थी कि पूरे देश का मैड़म को समर्थन मिल चुका था |पूरा देश पुलिस,वकील,डॉक्टर,इंजिनियर,मजदूर हर कोई मैड़म के साथ खड़ा था|
फिर महीनों बाद जब कुछ लोगों ने जंतर-मंतर पर अनसन किया तो देश के राष्ट्रपति दीप रिट्स जी ने कहा कि अगर उनका अपहरण हुआ है तो दोषी को कड़ा दण्ड मिलेगा और डी.एम ईरा जी की बातों पर हम गम्भीरता विचार करेंगें |बस विचार!और आज पाँच साल|इतना कह कर पत्रकार जी तो खामोश हो गये पर मैं गौरी अपने आँसुओं को रोक न सकी और फिर हम दोनों ही रो पड़े|
अब मन हल्का करने के लिये  में किचिन में गयी और दो मग कॉफी बना लायी|अब हम दोने कॉफी पीने लगे तो मैंने पूछा कि यअपने राष्ट्रपति जी का नाम दीप रिट्स इस नाम का मतलब है क्या है आखिर?तो पत्रकार जी बोले कि अपने राष्ट्रपति जी का पूरा नाम तो राजदीप रिट्स है इस रिट्स में उनकी पूरी फेमली है सुनो! र से उनका और उनके भाई का नाम, ई से उनके पिता का नाम, ट से उनकी बहन का नाम,स से उनकी माँ कानाम है|ये है उनका फेमली लव|यह सुन कर गौरी ने कहा,"वाह!ग्रेट|"अब आप आराम करिये रात बहुत हो चुकी है|पत्रकार जी बोले कि अब नींद कहाँ आप आराम कीजिये जाकर|
गौरी ने कहा,"वो जोअघोरी आपको धमकाता था कुछ पता किया कौन था?"पत्रकार जी बोले,"वो कोई नेता था नाम भी पता किया पर याद नहीं आ रहा और मेरा मोबाईल कहाँ गया मुझे याद तक नहीं मैंने ईरा मैज़म के नाम पर  कुथ पाखण्डी को पैसे कमाते देख मैं पागल सा हो गया था और शमशान में जाकर ही मुझे कुछ शान्ती मिली पर सुकून.....सुकून तो ईरा जी थीं जो ना जाने कहाँ गयीं |उनको ढ़ूढ़ने में मैं इतनी बार मरा हूँ कि मौत भी मुझे छोड़ जाती है मरा समझ कर|
यह बात सुन मैं समझ गयी कि ये ईरा मैड़म को बहुत चाहते हैं अब जब सब सामने है तोक्या पूछँ |प्रेम बहुत महान है इस दुनिया में भगवान इनको इनके प्यार से जल्द मिला दे|
सुबह के तीन बज चुके थे|हमने कहा,"मैंने उनकी लास्ट वीडियो देखा जब कुछ लड़कियों ने उनको गोद में उठाया उनमें से पता चला है एक लड़की जिसका नाम मधूलिका उर्फ रेड वियर है जो बहुत बड़ी कोकीन तस्कर और हाई प्रोफाईल कॉल गर्ल है जिसकी एक घण्टे की एक लाख रूपये है जो पेपनाह खूबसूरत है वो उस दिन चेहरा सांवला वाला मेकप किये थी मैंने सब पता कर लिया है और पूरी तैयारी भी |अब आप थोड़ा आराम करो और मैं भी चलती हूँ और तभी गौरी का फोन बजा गौरी ने फोन उठाया कि पाँच हजार भेज कल|गौरी ने कहा,"ठीक है|"और चुपचाप  अपने बिस्तर पर जाकर फूट के रो पड़ी और फिर सो गयी|
दूसरे दिन इंस्पेक्टर सावन ने दो हाईप्रोफाईल लड़को को कोकीन के साथ धर दबोचा जिसनेरेड वियर कोकीन की रानी का नाम लिया फिर क्या था रेड वियर लड़की के ठीकानों पर धापामारी शुरू हुई |दो घण्टे बाद इंस्पेक्टर सावन के पास कॉल आयी पाहल हो गया है क्या रेड वियर को भूल जा और अपनी कीमत बोल जल्दी ये सब भूलने की समझा बस फिर क्या था पता चलाया गया कि किसका नम्बर है और आया कहाँ से बस धर दबोचा जाकर उस रेड वियर के हितेसी विधायक जशवीरमणि को फिर थाने में बिठा कर उनसे कहा गया रेड वियर को बुला कैसे भी करके किसी होटल में जल्दी वरना मार सह नहीं पाओगे सोच लो|







To be continue...........
स्वहस्तलिखित रचना
ये कहानी काल्पनिक है इसका जीवित और मृत से कोई संजोग नहीं है|ये कहानी समाज की सबसे बड़ी समस्या और कुप्रथा दहेज के ऊपर आधारित है|इस काहानी का उद्देश्य समाज से इस प्रथा का अंत करना है|
घन्यवाद

लेखिका
आकांक्षा सक्सेना
जिला-औरैया
उत्तर प्रदेश






Comments

  1. बहुत रोचक कहानी..लेकिन कुछ अधूरी सी लगी..

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    1. अधूरी नहीं.......वो पूरी ही होगी|

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  2. Bahut Khubsurat Rachana Hai Aapki

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  3. dil pe lagegi to baat banegi...GOOD ONE

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  4. Replies
    1. Thank you so much Famous Actor Sagar saini ji

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  5. Thank you so much..Famous Film director Ground zero

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  6. Akanksha meri wish h ki tumhari es kahani pr ek n ek din hit film jarur banegi.....wish you all the best

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  7. akanksha ji is a very nice writer.m happy,very nice story.god bless you akanksha ji

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  8. mujhe lagta hai bahut hi jaldi aaki jagha aapke gao main nahi bollywpood m hogi.very6 telented,nice

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  9. mam hm poora nhi padh paye hai pr story creative hai

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  10. Wah kya baat ha,ya kahani kalpanik nahi lagti balki sachi lagti ha.aagay bhi esi tarah lagay rahay madam.

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  11. Wah kya baat ha,ya kahani kalpanik nahi lagti balki sachi lagti ha.aagay bhi esi tarah lagay rahay madam.

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  12. Maine aapki story read ki thi wakhi aap bahut acha likhti ho esa lag raha rha tha ki m jaise ye story really dekh raha hu aapki story bahut achi lagi aap likhte rahiye bas aapki manjil aapse dur nahi h best of luck my dear friend..

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  13. Maine aapki story read ki thi wakhi aap bahut acha likhti ho esa lag raha rha tha ki m jaise ye story really dekh raha hu aapki story bahut achi lagi aap likhte rahiye bas aapki manjil aapse dur nahi h best of luck my dear friend..

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  14. Nice very Nice.aapki Lekhni Aur Samridh ho..Keep it up

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  15. aachi story hai my best wishes with u

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  16. दहेज समाज के लिए घातक बीमारी केन्सर की तरह है । आपने इस कुप्रथा के बारे में कहानी के माध्यम से बहुत ही गहराई, स्पष्ट और सटीक शब्दों में समझाया है,जो व्यक्ति एक बार कहानी से जुड़ जाता है वो पूरी कहानी पढ़े बिना नही रही सकता ।

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  17. दहेज समाज के लिए घातक बीमारी केन्सर की तरह है । आपने इस कुप्रथा के बारे में कहानी के माध्यम से बहुत ही गहराई, स्पष्ट और सटीक शब्दों में समझाया है,जो व्यक्ति एक बार कहानी से जुड़ जाता है वो पूरी कहानी पढ़े बिना नही रही सकता ।

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