जरूरत - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Monday, February 15, 2016

जरूरत

वर्तमान की जरूरत

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अपने राष्ट्रीय मानवाधिकार व कर्तव्य के तहत देश के प्रत्येक विवाहित, जन्में व मृतक स्वदेशी व विदेशी भारतीय लाभार्थी नागरिक को अपने विवाह, जन्म व मृत्यु के  पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसेंसीकरण के प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र पाने हेतु अपने मजरा, गाँव, कस्बा, नगर व महानगर के प्रत्येक मोहल्ले व कॉलोनी में भारतीय नागरिकों के विवाह, जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसेंसीकरण के आधुनिक कार्यालयों की जरूरत है ताकि इन कार्यालयों से देश के नागरिक इस प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र को प्राप्त करके इनके प्रयोग द्वारा अपने जीवन का उद्धेश्य पूरा करने हेतु अपनी इच्क्षा व योग्यतानुसार राजनीतिक समाजी सरकारी आजीविका व मतकारी पैंसन तथा आर्थिक सामाजी अर्धसरकारी आजीविका व कर्मचारी पैंसन एवंम  सामाजिक समाजी निजी आजीविका व श्रमकारी पैंसन तथा बुनियादी सेवायें व सुविधायें अनिवार्य एवम् परमावश्यक रूप से प्राप्त कर सकें और अपना,अपने देश का व अपनी दुनिया का सृजनशील विकाश कर सकें| राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त व मुख्य सचिव को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है | ताकि सभी का जनजीवन पारदर्शी, निर्विवादित, आनंदवादी, शिष्टाचारी व न्यायी
एंव वैधानिक संवैधानिक व कानूनी रूप से सुखमय व्यतीत हो सके ताकि देश दुनियां में फैली संस्कारहीनता, असमानता व अशान्ति समाप्त हो जाये | वर्तमान की
की जरूरत यही है |

ब्लागिष्ट
आकांक्षा सक्सेना
जिला-औरैया
उत्तर प्रदेश


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