Monday, February 22, 2016

सर्वसुलभ हो भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र :

भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र की अनिवार्यता :

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देश के प्रत्येक विवाहित, जन्में व मृतक स्वदेशी एंव विदेशी भारतीय लाभार्थी नागरिक को अपने राष्ट्रीय मानवाधिकार व कर्तव्य के तहत अपने विवाह जन्म व मृत्यु का पंजीकृत वैधानिक, बीमाकृत संवैधानिक व लाईसैंसीकृत कानूनी सर्वोच्य निर्णायक भारतीय लाभार्थी नागरिकता का प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र अनिवार्य एंव परमावश्यक रूप से चाहिये ताकि उसकी भारतीय नागरिकता की प्रमाणिकता व सत्यता के पहिचान के सभी प्रकार के राजनैतिक समाजी सरकारी व मतकारी दस्तावेजों में तथा सभी प्रकार के आर्थिक समाजी अर्धसरकारी व कर्मचारी दस्तावेजों एंव सभी प्रकार के सामाजिक समाजी निजि व श्रमकारी दस्तावेजों में दाखिल विवाहित नागरिकों की विवाह तिथि की,दाखिल विवाहित व अविवाहित नागरिकों की जन्मतिथि की एंव खारिज मृतक नागरिकों की मृत्यु तिथि की पंजीकृत वैधानिक संख्या, बीमाकृत संवैधानिक संख्या एंव लाईसेंसीकृत कानूनी संख्या सम्बंधित कार्यालय के नाम पता सहित अनिवार्य एंव परमावश्यक रूप से दर्ज की जा सके यही सभी का विशेष एंव सामान्य राष्ट्रीय उच्चन्यायिक संरक्षण तथा भारतीय सर्वोच्य न्यायिक आरक्षण है|इन सभी भारतीय नागरिकों को अपने जीवन का उद्देश्य पूरा किया जाने हेतु इन्हें इनकी इच्क्षा व योग्यतानुसार निर्विवादित समान राजनैतिक समाजी सरकारी आजीविका व मतकारी पैंसन, समान आर्थिक समाजी अर्धसरकारी आजीविका व कर्मचारी पैंसन एंव समान सामाजिक समाजी निजी आजीविका व श्रमकारी पैंशन तथा बुनियादी सेवायें एंव बुनियादी सुविधायें अनिवार्य एंव परमावश्यक रूप से प्राप्त हो सकें|जिससे इन भारतीय नागरिकों का जनजीवन सुखमय व्यतीत हो सके ताकि कोई भी भारतीय लाभार्थी नागरिक वैधानिक, संवैधानिक व कानूनी रूप से दस्तावेजी लावारिस, बेरोजगार, गरीब, निराश, भूखा, निर्वस्त्र, बेघर, आत्महत्या करने को अथवा आतंकी, भ्रष्टाचारी व अन्यायी व बनने को कमजोर व मजबूर न हो सके और स्वदेश एंव विदेशों में अपनी भारतीय नागरिकता की प्रमाणिकता एंव सत्यता के लिये हैरान व परेशान न हो सके|
उपरोक्त कार्यप्रणाली देश-दुनिया के न्यायिक विकाश की है|


लेखिका
आकांक्षा सक्सेना
जिला-औरैया
उत्तर प्रदेश


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