... ..वक्त बदलाव का....






          व्यवस्था परिवर्तन 

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भारत विश्व का केन्द्रबिन्दु है | यहाँ लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन का जो भी सिस्टम लागू होता है वह पूरे विश्व में लागू होता है | भारत की लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन की पूर्वनिर्धारित व पूर्वप्रचलित संगठन एंव विकास की यूनाइट रूल ऑफ लॉ एण्ड़ आर्डर की पंजीकृत, बीमाकृत, लाईसैंसीकृत यानि बिजीलैंसीकृत भारतीय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ परिवार न्यायपालिका की संघात्मक कार्यप्रणाली है जिसका लागू होने का आगाज देश व दुनिया के परिवारों में हो चुका है | भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व विघटन एंव विनाश का दुष्परिणाम झेल कर अब संगठन एंव विकास की ओर भागने लगा है | 15 अगस्त 1942 को भारत की स्वतंत्रता, आजादी व मुक्तता का तिंरगा सिंगापुर में फहरानेवाले, वैरिस्टर जानकीदास बोस के अंतिम पुत्र, राजर्षि स्वामी विवेकानन्द जी के हठ योगी शिष्य, आई.सी.एस. ऑफीसर, कलेक्टर, आजाद हिंद फौज के इंचीफ तथा भगवान बृह्मा जी, विष्णु जी व महेश जी के आत्मज भगवान चित्रगुप्त जी के अंतिम पुत्र भगवान राघौराम वाल्मीकि जी के परिवारी, अपने पंजीकृत, बीमाकृत व लाईलैंसीकृत यानि बिजीलैंसीकृत भारतीय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ परिवार के मुखिया व मुख्य जनप्रतिनिधि नेताजी, इस सिस्टम के भारत के राष्ट्रपिता, अपने व देश के संघ परिवारों के भारतीय नागरिकों के जन्म, विवाह व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण यानि बिजीलैंसीकरण के मुख्य रजिस्ट्रार, भारत के विशेष राष्ट्रीय अखण्ड़ उत्तर प्रदेश इलाहाबाद उच्च परिवार न्यायालय  के पूर्व निर्धारित मुख्य न्यायाधीश, भारत की बिजीलैंसीकृत संघ परिवार न्यायपालिका की संघात्मक लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन की कार्यप्रणाली के जनक, स्वंय में भारतरत्न, स्वंय में विश्वशांति नोबेल सम्मानित, पूरे जगत को यूनाईट रूल ऑफ लॉ एण्ड़ आर्डर के ज्ञानदाता जगतगुरू, अपने पूर्वजों की भांति इच्छा मृत्यु वरदानी, अपने परिवारी श्री कृष्णचन्द्र वासुदेव जी के समान देश दुनिया के सबसे बड़े भगवान एंव हैवान, नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस जी ने अपनी फौज से कहा था कि फिर मिलेगें, देश की स्वतंत्रता, आजादी व मुक्तता की लड़ाई जारी रखना, हिन्दुस्तान को कोई भी अपना गुलाम नहीं बना सकता, हिन्दुस्तान अपनी स्वतंत्रता, आजादी एंव मुक्तता से युक्त होकर रहेगा, इसके लिये हमें कुछ भी क्यों ना करना पड़े | काश! नेताजी की संगठन एंव विकास की बात देश व दुनिया ने मानी होती तो देश व दुनिया के परिवारों एंव समाजों को अपने विघटन व विनाश का दुष्परिणाम न भुगतना पड़ता | चूँकि देश व दुनिया में संगठन एंव विकास की कार्यप्रणाली लागू हो चुकी है | निकट भविष्य में भारतीय नागरिकों के पहिचान के राजनीतिक समाजी सरकारी व मतकारी दस्तावेजों में, आर्थिक समाजी अर्द्धसरकारी व कर्मचारी दस्तावेजों में एंव सामाजिक समाजी निजि व श्रमकारी दस्तावेजों में दाखिल अविवाहित, विवाहित एंव मृतक नागरिकों की जन्मतिथि, विवाहतिथि व मृत्युतिथि की पंजीकृत, बीमाकृत व लाईसैंसीकृत यानि बिजीलैंसीकृत संख्या सम्बंधित कार्यालय के नाम पता सहित अनिवार्य रूप से दर्ज होगी| जिससे प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन का उद्धेश्य पूरा करने हेतु समान सरकारी आजीविका व मतकारी पैंसन, समान अर्द्धसरकारी आजीविका व कर्मचारी पैंसन एंव समान निजी आजीविका व श्रमकारी पैंसन अर्थात् समान आधारित सेवायें एंव सुविधायें अनिवार्यरूप से प्राप्त होगीं | देश का कोई भी नागरिक इस सिस्टम के तहत बेरोजगार, गरीब एंव दरिद्र तथा भूखा, निवस्त्र एंव बेघर तथा आत्महत्या करने को अथवा आतंकी, भ्रष्टाचारी एंव दुराचारी अर्थात् अन्यायी बनने को कमजोर एंव मजबूर नहीं होगा | देश के प्रत्येक नागरिक का तीनों प्रकार का जीवन वैधानिक, संवैधानिक एंव कानूनी अर्थात् न्यायी नेक नियत एंव नेक नीति का संगठन एंव विकास का प्रेमपूर्वक सुखमय अनिवार्यरूप से व्यतीत होगा | भारतीय नागरिकों के जन्म, विवाह व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के अधिनियमों का अनुपालन देश के प्रत्येक नागरिक के द्वारा तथा देश के प्रत्येक नियम, अधिनियम एंव निर्देश को करना अनिवार्य एंव परमावश्यक होगा | इनका जानबूझ कर उल्लंघन अक्षम्य दण्ड़नीय अपराध होगा | ताकि कोई भी षडयंत्रकारी नागरिक इस देश में इस कार्यप्रणाली को उन्मूलित न कर सके और वह अपनी विघटन एंव विनाश की कार्यप्रणाली लागू करने की हिम्मत न कर सके | ताकि दुनिया के सभी परिवार एंव समाज अपना संगठित विकास कर सकें| यह ध्यान रहे कि संगठन एंव विकास की फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी व इसके मुखिया ईश्वरीय एंव तपोनिष्ठ हैं | इसलिये इसे किसी की भी जरूरत नही | संगठन एंव विकास पसंद लोगों को अपनी बदनियति व बदनीति त्याग कर सच्चे मन से इसका आवाहन करना होगा | ऐन, केन व प्रकरेन प्रसिद्ध तो कोई भी प्राप्त कर लेता है | परन्तु ऋद्धि - सिद्धि व निद्धि पाने के लिये कठोर प्रकट तप करना होता है | भारत पूरे जगत की केन्द्र बिंदुत तपोभूमि/कर्मभूमि है | यहाँ शुभ व अशुभ फल तत्काल प्राप्त होता है | यदि देश के सभी लोगों को संगठन एंव विकास का नेक नियति व नेक नीति का शुभ फल चाहिये तो सभी को इस पार्टी की केन्द्र व सभी राज्यों में सरकार बनानी होगी | यह देश के उत्तर प्रदेश झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई रेजीमेन्ट की अर्थात् महिलाओं के सशक्तिकरण व उनके आत्मसम्मान की व्यवस्था है | इसलिये देश की सभी महिलाओं को इस व्यवस्था का आवाहन करना चाहिये | ताकि यह देश पूर्वकाल की भांति डचों, पुर्तगालियों, यूनानियों, मुगलों, अग्रेजों व देशी चुगलखोर अंग्रेजों का  गुलाम बनकर न रह सके |इस अखण्ड़ देश की आंतरिक एंव बाहरी सुरक्षा एंव खुफिया सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रह सके |

ब्लॉगर
आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उत्तर प्रदेश



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