Tuesday, October 4, 2016

कैसे रूकें महिलाओं पर होने वाले अपराध ....???










कैसे रूकें महिलाओं पर होने वाले 

              अपराध ?

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प्रत्येक परिवार, समाज व इस देश में अपराधीकरण,अन्यायीकरण एंव बेरोजगारीकरण अपनी चरम सीमा पर है | देश की सभी अदालतें क्षमता से अधिक बहुत बड़े पैमाने पर निर्वाध तीव्र गति से बढ़ते जा रहे निरर्थक विचाराधीन करोड़ों मामलों के बोझ से दबीं पड़ी हैं |
        देश में आये दिन कन्या लिंग परीक्षण,  कन्या भ्रूण हत्या, कन्या जन्म उपरान्त उसकी तुरन्त हत्या, बालिकाश्रम, छेड़खानी, अपहरण, बलात्कार, कार्यस्थल पर उसके साथ व्यभिचार, परिवार समाज व देश में उसके विरूद्ध छुआ- छूत, भरण - पोषण, महिला उत्पीड़न, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज हत्या, पुनर्विवाह, तलाक, उनके तन, मन व धन के शोषण व उन्हें हड़पने के मामले, उन्हें अपना गुलाम बनाने के मामले, महिला  तस्करी के मामले, वैश्यावृत्ति में जबरन धकेलने के मामले, उनके शारीरिक अंगों की तस्करी के मामले व उनके प्रति संवेदनहीनता के मामले, उनकी इज्जत-आबरू लूटने के मामले किसी भी परिवार, समाज और देश की सरकार व न्यायालय से छिपे
नहीं है|
   कोई भी व्यक्ति जन्मजात अपराधी नहीं होता | उसे तो किसी देश के मुट्ठीभर गद्दार सत्तासीन, पूँजीपति व कानूनविद् ही अपने विभाजन एंव विनाश की बदनियति एंव बदनीति के (डिवाइड एण्ड रूल ऑफ लॉ एण्ड ऑर्डर) पूर्वनियोजित धोखाधड़ी के षड़यंत्र के तहत उसका तन,मन व धन हड़पने एंव उसे अपना गुलाम बनाये रखने के लिये उसके विवाहित, जन्में व मृतक जनजीवन को उसके पहिचान के सभी प्रकार के दस्तावेजों में अवैधानिक, असंवैधानिक एंव गैरकानूनी दस्तावेजी लावारिस बनाकर रखने के लिये उसे अपराधयुक्त, अन्याययुक्त एंव रोजगारमुक्त बनाकर रखते हैं | देश को प्रत्येक विवाहित, जन्में एंव मृतक स्त्री, पुरूष एंव किन्नर नागरिक का विवाहित, जन्मा व मृतक जीवन पंजीकृत वैधानिक,बीमाकृत संवैधानिक एंव लाईसैंसीकृत कानूनी अपराधमुक्त, अन्यायमुक्त व रोजगारयुक्त न होने के कारण महिलाओं के विरूद्ध अपराध एंव अन्याय होते हैं | इन्हें रोकने का नेक व एक ही तरीका है कि देश की भारतीय अपराध दण्ड संहिता (इंडियन पेनल कोड/ आई.पी.सी ) में  अपरिभाषित विवाहित, जन्में व मृतक स्त्री, पुरूष व किन्नर भारतीय नागरिकों के विवाह, जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण एंव लाईसैंसीकरण के अधिनियमों का उल्लंघन गैर जमानती संज्ञेय अर्थदण्ड़नीय एंव मृत्युदण्डनीय अक्षम्य अपराध दर्ज किया जाकर इनका ट्रायल भारतीय अपराध दण्ड प्रक्रिया संहिता (इंडियन क्रिमिनल प्रोसीजर कोड/ सीआर .पीसी.) में दर्ज किया जाये तथा इन अधिनियमों का उल्लंघन देश के अन्य सभी अधिनियमों एंव कानूनों में दर्ज किया जाये |यह करवाने का काम देश के मा. सर्वोच्च न्यायालय एंव देश की संसद का है |
       ऐसा संसोधन होते ही देश के प्रत्येक विवाहित,जन्में व मृतक स्त्री, पुरूष व किन्नर नागरिक को अपने विवाहित, जन्में व मृतक होने का पंजीकृत वैधानिक, बीमाकृत संवैधानिक एंव लाईसैंसीकृत कानूनी जीवन का अपराधमुक्त व अन्यायमुक्त होने का सर्वोच्च न्याय दस्तावेजी सबूत प्रमाणपत्र प्राप्त होगा और ऐसा होते ही भारतीय नागरिकों की शक्ल के फोटो पहिचान के सभी प्रकार के राजनीतिज्ञ समाजी सरकारी व मतकारी, आर्थिक समाजी अर्धसरकारी व कर्मचारी एंव सामाजिक समाजी निजीकारी व श्रमकारी दस्तावेजों में दाखिल एंव खारिज प्रत्येक विवाहित जन्में व मृतक स्त्री व पुरूष नागरिक की विवाहतिथि, जन्मतिथि की व मृत्युतिथि की वैधानिक पंजीकृत व संवैधानिक बीमाकृत व कानूनी लाईसैंसीकृत संख्या सम्बंधित संयुक्त कार्यालय के नाम पता सहित दर्ज होगी | इन दस्तावेजों में उनके जीवन की भी दस्तावेजी पहिचान दर्ज होगी और उन्हें अपनी नागरिकता का भी पहिचानपत्र प्राप्त होगा|
       ऐसा होते ही देश का प्रत्येक नागरिक सभ्यमानवीय पंजीकृत वैधानिक राजनीतिक, बीमाकृत संवैधानिक आर्थिक एंव लाईसैंसीकृत कानूनी सामाजिक समाज का अपराधमुक्त व अन्यायमुक्त सदस्य होगा तथा सभी के जीवन को अपना पूर्व निर्धारित शांति रक्षण, सुरक्षण एंव संरक्षण अर्थात् सर्वोच्च न्यायिक आरक्षण प्राप्त होगा |जिससे प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन का श्रजनशील उद्देश्य पूरा किये जाने हेतु उसकी इच्क्षा व योग्यतानुसार बिना किसी बाधा के समान सरकारी व मतकारी, अर्धसरकारी व कर्मचारी एंव निजीकारी व श्रमकारी आजीविका व पैंसन तथा समान बुनियादी सेवायें व सुविधायें स्वत: ही प्राप्त होगीं |
      इस प्रकार भारतीय जनजीवन अपराधमुक्त, अन्यायमुक्त, रोजगारयुक्त, आदर्शगौरवशाली, महान प्रतिभाशाली एंव महानतम् मर्यादाशाली, स्मृद्धिशाली, वैभवशाली व शिक्षित, अनुशाषित, विकासशील एंव विश्वविजय सैन्यशक्तिशाली, आपसी प्रेम व विश्वास के साथ निर्विवादित व्यतीत होगा | यह देश अपनी आंतरिक एंव बाहरी स्वतंत्रता,आजादी व मुक्तता से युक्त होगा | यहाँ स्वछंदता, उदण्डता, गुण्डता नजर ही नहीं आयेगी | इसके लिये देश के शहीदों की कुर्बानी व त्याग व्यर्थ नहीं जायेगा | तब इस देश में किसी भी आयु की महिला के साथ अपराध व अन्याय होने का कोई प्रश्न ही नही उठता | यह देश विश्व का एक प्रेरणादायक एंव आश्चर्य पर्यटन स्थल होगा |
          देश के सभी जागरूक प्रिन्ट एंव इलैक्ट्रॉनिक मीडियाकारों तथा समाजसेवी संस्थाओं को इस योजना को हाई लाईट करना चाहिये |
    अत:, भारत की प्रत्येक मर्यादित लिवासी महिला को अपने आत्मसम्मान की सुरक्षा के लिये सदैव अपने साथ अपने जीवन के पहिचान का सर्वोच्च निर्णायक दस्तावेजी सबूत प्रमाणपत्र अथवा पहिचान पत्र तथा लाईसैंसी पिस्टल या कटार रखना चाहिये और वह सशक्तिवान दिखनी भी चाहिये एंव होनी भी चाहिये | क्योंकि यह महिलाओं की इज्जत - आबरू की हिफ़ाजत का सवाल है | समय की माँग है कि अपनी सुरक्षा अपने हाथ |



आकांक्षा सक्सेना            
ब्लॉगर 'समाज और हम'
जिला - औरैया
उत्तर प्रदेश

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