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Showing posts from 2017

सौ वर्ष से जलते एक शहर की हकीकत :

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धरती का नर्क बना, 'झरिया'
( देश के बेशकीमती जलते हुये शहर की खामोश हकीकत : ) 
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दोस्तों! आपने शेर-ओ-शायरी में यह लाइन की बार सुनी हुई होगी कि 'एक आग का दरिया है' पर यहाँ हम कोई प्यार मोहब्बत की मखमली बातें नहीं कर रहे बल्कि देश के झारखण्ड राज्य के झरिया शहर की वो खुरदरी आग उगलती जमीन की जमीनी हकीकत की बात कर रहे हैं जिनसे आज बहुत लोग अनजान हैं। आपको बता दूँ कि झरिया जो पिछले सौ वर्षों से अपने ही हालातों पर धूँ-धूँ करके हर पल जल रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि झारखंड का झरिया शहर जो सुलगते कोयले की दुनिया है। झरिया गाँव का तापमान इतना ज्यादा है कि जूतों-चप्पलों के तलवें कुछ ही देर में पिघला दें। इसे जलते हुये कोयले का शहर कहें,  खान कहें या 24घंटे आग उगलती धरती कहें तो अतिश्योक्ति नही होगी।हालात यह हैं कि जलते कोयलों की धरती से निकलती हानिकारक गैसों के कारण पूरे गाँव के घरों में बड़ी - बड़ी दरारें आ चुकी हैं और इन्हीं दरारों के कारण ऑक्सिजन धरती के अंदर पहुंचती है जिससे कोयला और भी तेजी से जल उठता है। बस यही झरिया की कभी न बुझने वाली…

अगली पहल- अखबार ढ़ाके‌ं, कीटाणु भागें (एक वादा स्वच्छता वाला)।

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अगली पहल-  अखबार ढ़ाकें, कीटाणु भागें |

खाद्य पदार्थों पर ढ़ाक दिये अखबार और बांटे अखबार |
(बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ को अखबार/साफ पेपर से ढ़ाकते हुये - सभी दुकानदार भाईलोग इतने अच्छे हैं कि आप समझाओगे तो चीजें ढ़ाक कर ही बेचेगें -चीजें मक्खी से बचेगीं तो हम सब स्वस्थ्य रहेगें | कृपया हमारी छोटी सी मुहिम/पहल को आप भी आगें बढ़ायें  | सभी से लीजिये |एक वादा स्वच्छता वाला |
बदलाव बदलाव कहने से और किसी दूसरे से उम्मीद रखने से
कुछ नही होता, बदलाव की शुरूवात होती है खुद से |

(हम छोटे स्कूल -कॉलेज में पढ़ने वाले  स्टूडेन्ट्स जो भी इस पेज से जुड़े हैं, से कहना चाहूंगी कि बदलाव के लिये ढ़ेर सारे धन और बड़े पद की जरूरत नही बस जरूरत है तो मजबूत इच्छाशक्ति की | आप भी अपने शहर में पुराने अखबारों से शुरूवात कीजिये |
सत्य आपके साथ है |)
🙏🙏🙏

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम
















🙏धन्यवाद 🙏













शोध पत्र

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...🙏धन्यवाद🙏....

बॉजीराव मस्तानी का सही इतिहास : उनके ही वंशज की जुबानी

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एक खास साक्षात्कार कुछ खास सवालों के साथ
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सेलेब टॉक : नवाब शादाब अली बहादुर ऑफ
बांदा स्टेट साहब जी 
नमस्ते दोस्तों 🙏 आइये आज आपको रूबरू करातें हैं देश की उन महान शख्शियत से जिनके पूर्वजों का नाम भारतवर्ष के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा गया है |जोकि, किसी परिचय के मोहताज़ नही है | जिनका नाम है सर्वसम्माननीय नवाब शादाब अली बहादुर ऑफ बांदा स्टेट साहब जी |  🙏🙏🙏
श्रीमंत बाजीराव पेशवा और मस्तानी साहिबा जी|





नवाब शादाब अली बहादुर जी

आकांक्षा- नमस्ते सर | आपका हमारे सोसल अवेयरनेस ब्लॉग  'समाज और हम' में सहृदय ससम्मान स्वागत है| नवाब साहब- नमस्ते |
सवाल - सर आपका पूरा नाम ?
जवाब-  नवाब शादाब अली बहादुर ऑफ बांदा स्टेट |

सवाल- आपका जन्मस्थान माँ पिता का नाम सर?
जवाब - हमारा जन्म स्थान सीहोर म.प्र है |पिता का नाम नवाब अशफाक़ अली बहादुर और माता का नाम बेगम अंजुम जहॉ |
सवाल -  आपने कहाँ तक शिक्षा प्राप्त की है?
जवाब- हमने मास्टर ऑफ कॉमर्स और सोफ्टवेयर में डिप्लोमा किया है |
सवाल- आप इस समय कौन से बिजनिस प्रोजेक्ट से जुड़े है?
जवाब- हम गोल्ड एण्ड …

शिक्षा पर सभी का हक : कभी स्कूल न जाने वाले बच्चों का करा दिया आज दाखिला |

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कभी स्कूल का मुँह न देखने वाले बच्चों का कराया आज दाखिला |
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शिक्षा क्यों जरूरी है ये बात समझायी और सचकहूँ तो काफी देर चर्चा के बाद उनके घर के बड़े बुजुर्गों ने हाँमी भरी | बस फिर क्या था बच्चों को बाजार ले जाकर तुरन्त फोटो बनवायी और सभी को साथ लेकर फिर सरकारी स्कूल में पहुंचकर बच्चों का दाखिला कराया  | स्कूल का स्टॉफ बहुत ही गुड नेचर था सभी मेहनत से बच्चों को पढ़ा रहे थे | वो सब भी नये बच्चों को पाकर बहुत खुश थे | बाद में यथासम्भव शिक्षकों का सम्मान कर हम सभी अपने-अपने घरों को लौट गये | इस वादे के साथ सभी बच्चे रोज स्कूल आयेगें |  सरकार से यहीं हाथ जोड़कर यही प्रार्थना है कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी शर्दी गर्मी बरसात आँधी तूफान में सड़क पर गाड़ी में ऊपर तम्बू तान के रहना पड़ता है | उनको लौगपीट या भरगड्डे कहकर अभद्रभाषा में पुकारा जाता है | क्या दर्द नही उठता कि बेचारों की बच्चियाँ और महिलायें कहाँ कहाँ छिपकर नहाने जाती होगीं शौच के लिये जाती होगीं | कभी रात अधाधुंध वाहन उनकी भट्टियाँ रौंदते हुये निकल जाते हैं | कब तक सहेगें ये दुख यह सब लोग | सरकार की मददरूपी एक …