प्रिंट मीडिया के इतिहास में पहली बार ' एक कड़वे सत्य ' का करारा साक्षात्कार : - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Friday, August 25, 2017

प्रिंट मीडिया के इतिहास में पहली बार ' एक कड़वे सत्य ' का करारा साक्षात्कार :



यह सिर्फ साक्षात्कार नही बल्कि युवा युग के आमंत्रण का आगाज़ है |




'रूद्र प्रताप सिंह'


"ब्लॉग" इतिहास में पहली बार "कड़वे सत्य का साक्षात्कार" यानि 'देश के युवा बेरोजगार' का साक्षात्कार  :

दोस्तों ! आप सभी ने यह अनुभव किया होगा कि आजतक देश की किसी भी नामी - गिरामी मैग्जीन और बड़े न्यूज पेपर में हमेशा जानी-मानी शख्शियतों के ही इंटरव्यू प्रकाशित होते रहे हैं जिनसे युवाओं ने आगें बढ़ने की प्रेरणा ली और फिर मेहनत भी की पर देश की खराब नीतियों के परिणामस्वरूप आज देश का 12 करोड़ युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहा है और सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इनमें पढ़े-लिखे युवाओं की संख्या सबसे अधिक है और बेरोजगारों में 25 % 20 - 24 आयुवर्ग के हैं, जबकि 25 - 29 वर्ष की उम्र वाले युवकों की संख्या 17 % है | 20 वर्ष से ज्यादा उम्र के 14.30 करोड़ युवाओं को नौकरी के लिये सिर पीट रहें हैं | इस साल बेरोजगारी दर 3.8 % होने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जो पिछले साल 3.7% थी | सच्चाई जान कर भी सभी सत्ताशीन मौन हैं और किसी को उसकी परवाह नही है | जब वोट का समय आता है तो हम बेरोजगार युवाओं को बड़ी रैलियों में बुलाकर सुन्दर भविष्य के सपने दिखाकर जिंदाबाद के नारे लगावाये जाते हैं और हम बेरोजगार युवा भविष्य में मिलने वाले रोजगार की अनजानी उम्मीद लगा लेते हैं और वोट दे देते हैं सिर्फ यह सोच कर कि हमारा जनप्रतिनिधि हमारी तकलीफ़ समझेगा पर वोट के बदले हमें हमेशा "धोखा" और "अन्याय" ही मिलता | इसलिये अबकी बार उस आम बेरोजगार युवाओं की भीड़ में एक युवा चेहरे का इंटरव्यू लेते हैं यही वो आम भीड़ है जो आम को खास बना देती है चाहे नेता हो या अभिनेता तो क्यूँ ना इस आम उपेक्षित बेरोजगारों की भीड़ की बात सरकार तक कुछ इस तरह पहुँचायी जाये कि सरकार और न्यायालय दोनों इस बढ़ती बेरोजगारी के प्रति व प्रत्येक भारतवासी के रोजगार के मौलिक अधिकार के प्रति सजग हो सकें क्योंकि अगर देश के प्रधानमंत्री अगर पूरे देश से विनम्रता से वोट मांग सकते हैं तो देश का प्रत्येक बेरोजगार भी विनम्रता से अनिवार्य रोजगार की मांग कर सकता है| आज देश का युवा बेरोजगार डिग्री पकड़े सिर धुन रहा और लोन का पैसा चुकाते वह ओवरऐज हो गया | इसी दर्द को आज हम लिखित शब्दों की बातचीत के जरिये आप सभी के सामने रख रहे हैं जोकि युवा बेरोजगारों की आवाज बन चुके उस युवा बेरोजगार की जुबानी | जिनका नाम है :  'रूद्र प्रताप सिंह'

रूद्र जी ब्लॉग 'समाज और हम' में आपका स्वागत है |

सवाल = आप कहाँ के निवासी हैं और आपने कहाँ तक शिक्षा प्राप्त की तथा रोजगार को लेकर आपका क्या संघर्ष रहा ?


जवाब = मैंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कॉमर्स में की और परास्नातक तक की शिक्षा अपने 'गृह नगर गोरखपुर' से प्राप्त की फिर उसके बाद कि शिक्षा ग़ाज़ियाबाद के मैनेजमेंट कॉलेज से की और शिक्षा के अनुरूप रोजगार मिले, इसके लिये बहुत संघर्ष किया और मैने देखा कि प्राईवेट कम्पनियों में हम युवाओं का जबरजस्त शोषण होता, एम.बी.ए जैसी बड़ी डिग्रियाँ करें युवा 6-7 हजार रूपये में 12 घण्टे लेवरी कर रहा और कम्पनी के घातक कैमिकल्स प्रदूषण से वह घातक बीमारियों से अकाल काल के गाल में समाने को मजबूर है | मैंने सरकारी विभागों में भी घोर भ्रष्टाचार देखा कि एक ड्राईविंग लाईसेंस भी बनवाने जाओ तो कितना लूटा जाता है|पूरे देश में ठेकेदारी कुप्रथा व्याप्त है जो देश को खोखला कर रही है पर सरकार को युवाओं की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है उनको तो बस युवाओं को झूठे सुनहरे सपने दिखाकर बस वोट लेने है |हाँ, मैने बेरोजगारी के दर्द को जिया है |

सवाल - रूद्र जी आप सोसल मीडिया और जमीनी स्तर पर युवा ग्रुप चला रहे हैं|इसका क्या उद्देश्य है ?


जवाब = iyuva युवाओं की एक सामाजिक संस्था है जिसके माध्यम से हम युवाओं को प्रोत्साहित करते हैं राजनीति की मुख्यधारा में आने के लिए , क्यों कि एक युवा में ही शक्ति जोश और ज्ञान का समन्वयन है जिसका इस्तेमाल राष्ट्रहित मे होना जरूरी है और वो तभी होगा जब युवा राजनीति की मुख्यधारा में हो |इसके साथ ही हम उन युवाओं की मदद करते हैं जो रोजगार के लिए भटक रहे हैं |हम उनको निशुल्क सेवा प्रदान करते हैं, उनके उचित रोजगार के लिए ।

सवाल = आज के समय में देश में युवाओं का भविष्य क्या है ?


जवाब =  आज देश के युवाओं की स्थिति बहुत ही दयनीय है इसका मुख्य कारण हमारी शिक्षा और रोजगार की नीतियां है , सरकार कोई भी हो, उसने अपने फायदे के लिये युवाओं का शोषण ही किया |जिस देश मे 40 करोड़ लोग वेरोजगार हो उस देश मे रोजगार पर कोई चर्चा नही कर रहा है ,आज जहां सरकार के पास 1करोड़ से ज्यादा रिक्क्त पद हैं जो नही भरे जा रहे हैं उससे सरकारों की मनसा जाहिर होती है

सवाल - अगर आप प्रधानमंत्री होते तो पहला काम क्या करते ?


जवाब = अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो सब से पहले जो रिक्त पद हैं उन पर नियुक्ति करता कि काम करने के लिए लोग तो होने चाहिए ,आज कोई भी विभाग नही है जहाँ पर रिक्त पद न हों | शिक्षा के क्षेत्र में सुधार, युवाओं को राजनीति में स्थान, महिला आरक्षण, और उस आखरी व्यक्ति का विकास जहाँ आज भी हम नही पहुच सके हैं|

सवाल - कॉमन मैन 'मतदाता'
की परेशानियों का कारण किसे समझा जाये ?


जवाब= आम आदमी की समस्या अशिक्षा है क्यों कि उनको अपने अधिकारों के बारे में पता ही नही होता जिसका फायदा उठा के उनको आसानी से उनका शोषण किया जाता है , और कुछ सरकार की नीतियों की जटिलता है जिसके कारण योजनाओं का लाभ उन तक पहुंच नही पाता है ।

सवाल - यंग पॉलटिक्स अवार्ड की शुरूवात जो आपने की है उसका क्या उद्देश्य है ?


जवाब= इस अवार्ड से देश के युवाओं को एक भरोसा और और ताकत मिलेगी अपने काम को करने की और उनमें एक नई उर्जा का संचार होगा, क्यों कि आज युवाओं को आगे आने से रोका जा रहा है युवा राजनीति बस परिवार तक सिमित रह गई है इस परिस्थिति में युवाओं को उम्मीद और सम्मान की जरूरत है ,जिसे उन तक पहुंचने का प्रयास है ये अवार्ड |

सवाल= आपने देश में युवा राष्ट्रपति का मुद्दा बड़े जोर-शोर से उठाया, क्या मकसद था ?

हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही मेरा मकसद कि युवाओं को रोजगार, समानता और सम्मान मिलना चाहिये |आज जहां हम युवा देश की बात करते हैं वहीं हमारे संविधानिक पदों पर केवल बृद्ध लोग है आज चाहे हम बात राष्ट्रपति की करें या उपराष्ट्रपति की या राज्यपाल की सभी 70 से ज्यादा की उम्र के हैं , जब इन पदों की न्युनतम आयु सीमा 35 है तो क्यों नही हम किसी युवा को इन पदों पे लाते हैं , आज तक तो ऐसा नही हुआ तो क्या हासिल किया हमने, अमेरिका जैसे देश में 46 साल के बरॉक ओबामा राष्ट्रपति बन सकते हैं तो यहाँ 'भारत' में क्यों नही ।

सवाल = आज की सरकार और आज की राजनीति को सुधार की जरूरत है या सुझाव, वोट की जरूरत है या विकास की ?


जवाब=  आज देश को जरूरत है विकास की और वो तभी सम्भव है जब युवा आगें आयें क्यों कि युवा के अन्दर ही बदलाव की अद्भुद, अनंत, असीम शक्ति है और यह तभी सम्भव होगा जब युवा राजनीति की मुख्य धारा में आये ,और युवाओं को प्रेरणा दे सके |

सवाल = कौन सी ऐसी बात थी जिसे आपको युवाओं की आवाज बनने को प्रेरित किया ??


जवाब= जब मैं कॉलेज में था तभी से मैंने देखा कि
छात्रों को अपनी बात और विचारों को रखने का उचित अवसर नही मिल पा रहा | उनकी बातों को दबाया जा रहा है , सरकार ,बैंक और कॉलेजों की मिली- भगत से किस तरह से युवाओं का शोषण किया जा रहा ,रोजगार के नाम पे ठगा जा रहा और युवाओं की आवाज को कोई सुनने वाला भी नही है इस परिस्थिति में मुझे लगा कि दूसरों से उम्मीद रखने की जगह खुद ही प्रयास किया जाए|

सवाल = युवाओं की आवाज बन कर देश की सरकार, मीडिया और न्यायालय से क्या मांग करना चाहते है?

जवाब = जहाँ युवा हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रहा है वहीं राजनीति के क्षेत्र में वो बहुत पीछे है जहाँ आज देश की जनसंख्या का 65% युवा है वही राजनीति में उसकी उपस्थिति केवल नगण्य है और वो भी केवल वो लोग हैं जिनको राजनीति विरासत में मिली है |अतः हम मांग करते है कि 25 से 40 साल की उम्र के युवाओं के लिए 30 % शीट आरक्षित कर दी जाए ताकि देश को युवा नेतृत्व मिल सके|

सवाल - देश के सभी युवाओं की तरफ से क्या कहना चाहेगें ?

जवाब = सबसे पहले हम सब भारतीय है और अपने राष्ट्र के प्रति हमारी निष्ठा है, राष्ट्र निर्माण में हर व्यक्ति का योगदान जरूरी है तभी हम उस ऊँचाई पर पहुंच सकते हैं , इसके लिए जरूरी है सब को उचित शिक्षा, रोजगाए, स्वास्थ्य प्रदान किया जाए ताकि वो उसका लाभ लेते हुए राष्ट्र निर्माण में सहयोग दे सकें जिससे रोजगारयुक्त और भ्रष्टाचारमुक्त विकसित भारत के सुनहरे युवा युग की संकल्पना पूर्ण हो सके जिससे आने वाली पीढियाँ खुली हवा में निश्चिंतता की श्वांस ले सके |



आकांक्षा सक्सेना
  ब्लॉगर 'समाज और हम'






... धन्यवाद... . 
































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