जब माँ ने कहा," बुनाई भी सीखो ?" हमने कहा," जी माँ बिल्कुल |" - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Tuesday, October 3, 2017

जब माँ ने कहा," बुनाई भी सीखो ?" हमने कहा," जी माँ बिल्कुल |"


घरेलू मैट

जब माँ ने कहा," बुनाई भी सीखो ?" 
हमने कहा," जी माँ बिल्कुल |"
जब माँ ने देखा! मैट काफी बन गयी हैं तो उन्होने कहा,"इतनी क्यों ?
हमने कहा," जरूरतमंदों के लिये |"
माँ मुस्कुरायीं और बोलीं,"ठीक है |"



'यह सब मैट जरूरतमंदों के लिये हैं यह हमारा श्रद्धा एवं सेवाभाव है'...
ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना







ब्लॉगर
आकांक्षा सक्सेना



" धन से ही नहीं बल्कि वेस्ट मैटेरियल से भी
  कर सकते हैं समाज सेवा"


नमस्ते दोस्तों,
आपने देखा होगा कि आर्ट एण्ड़ क्राफ्ट के अंतरगत, जूट की गुड़िया, मूंगफली के छिलकों व दालों व पुरानी बटनों तथा रंगें कंकड़ों  से सजी पैंटिग तथा खाली कोल्ड ड्रिंक की बोतलों से बने खूबसूरत गुलदस्ते बनाये जाते हैं जो घरों की सजावट में काम आते हैं| दोस्तों!  ठीक इसी क्रम में एक बेहद उपयोगी चीज के बारे में बतातें हैं जो है घर के बक्सों में पड़ी फटी- पुरानी साड़ियाँ और पुराने दुपट्टे इत्यादि कपड़ों से घरेलू चटाई बुनना जो कि अच्छा प्रयोग साबित हुआ है |
आइये! जानते हैं घरेलू मैट बनाने की विधि और
प्रयोग  :


मैट बनाने की विधि 

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घरेलू मैट कहें या आसन/ बैठका/ छोटी चटाई/या पांवदान जैसा उपयोग वैसा नाम आप कोई भी नाम दे सकते हैं | दोस्तों! इसकी विधि बेहद आसान है | आप पुरानी साढ़ियों या कपड़ों को सबसे पहले अच्छे से धो लें और सुखा लें फिर किसी बिना सितारे के कढ़ी साड़ी लें अगर सितारें, जरी और मोती लगें हो तो हटा दें | अब कैंची से साड़ी की लम्बाई में एक समान लम्बाई की पतली-पतली धजीरें काट लीजिये | अब इन धजीरों के गोले बना कर रख लें | गोल मैट बनाने में दो और बड़ी गोल मैट में तीन साड़ियों की धजीरें पूरी लग जाती हैं | अब आप गोल मैट बनाने के लिये धजीरों की चौड़ाई के हिसाब से 6,7,8,11 नम्बर की अलमोनियम की सही नोक वाली सलाईं का प्रयोग करते हुये छोटी गोल मैट बुनने के लिये 45 फंदे ले कर बुनाई शुरू करें | एक लाईन बिल्कुल सीधी बुन लें फिर उल्टें में आकर तीन फंदे या जल्दी मैट बनें तो पांच फंदे बिना बुने छोड़ कर बुनते जायें और सलाई पूरी होने पर फिर सीधी बुन जायें और उल्टी सलाई आने पर फिर पांच फंदे छोड़ दें | बस इसी तरह लगातार बुनने से दो या तीन दिन में एक छोटी मैट बनकर तैयार हो जाती है और अगर चोकोर  मैट बुननी हो तो चौढ़ाई के हिसाब से 40,60,80,90 जैसी आप चाहें फंदे लीजिये और उल्टी सलाई बिनते जाइये | लगातार बुनने से छोटी चोकोर मैट दो दिन में बनकर तैयार हो जाती है | इसमें हर पांच सलाई के बाद दूसरे रंग की धजीप या पट्टियाँ को लगाकर बुने इससे रंगबिरंगी सुन्दर डिजायन बन जायेगी जो देखने में सुन्दर लगेगी | जब आपकी ये घरेलू मैट बनकर तैयार हो जाये तो आप सुन्दर सी लैश मैट के चारो तरफ लगा दें ध्यान रखे कि लैश सिम्पल हो मोती - सितारा ना हो वरना पांव में चुभेगा | 


सद्प्रयोग 

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सबसे अच्छी बात तो यही है कि आपके पुराने कपड़ों की बँधी पोटली को खोलतीं हुई यह घरेलू मैट सुन्दर सार्थक और टिकाऊ सद्प्रयोग है | तथा,
बुनाई से मन शांत और एकाग्रचित् होता है|
इन पुराने कपड़ों से हाँथों से 6-7-11 नम्बर की सलाई से बुनी सुन्दर मैट जमीन पर बैठकर पूजा, ध्यान, योग व खाना खाने या पढ़ने-लिखने व शर्दी से बचने के लिये बिछाने व गीले पांव पोछने के लिये उपयोगी है |

बुनाई से समाज सेवा

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इन घरेलू मैट बनाने में समय लगता है पर धन नहीं | यह सस्ता और टिकाऊ विकल्प है | सबसे खूबसूरत बात यह है कि आप बुनाई से समाज से सेवा भी कर सकते हैं |
इन गोल और चोकोर आकार की मैट बुनकर आप किसी जरूरतमंद जो जमीन पर बैठ कर काम किया करते हैं उन्हें दान करके उनकी मदद और सहयोग कर सकते हैं |



बुनाई, विचार, सुझाव, फोटो,
लेख 
आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'




.....धन्यवाद....

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