साक्षात्कार : बिहार से मायानगरी तक का सफर : - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Friday, October 13, 2017

साक्षात्कार : बिहार से मायानगरी तक का सफर :








सेलेब टाक : चर्चित "विलेन"

                 'विजय कुमार' जी 


'विलेन का कभी विलय नही होता'


नमस्ते दोस्तों !
आइये आपको रूबरू कराते हैं टीवी सीरियल की दुनियाँ की जानी-मानी शख्शियत 'विजय कुमार' जी से | जो स्टार भारत टीवी चैनल पर नये कॉन्सेप्ट के साथ आपके बीच आपकी आशाओं पर खरा उतरने के लिये एक बेहतरीन इंटरटेनिंग शो निमकी मुखिया के जरिये आपके दिलों में उतरने के लिये पूरी सत्यनिष्ठा से अहम नकारात्मक सशक्त भूमिका के साथ दस्तक दे रहे हैं | जोकि मनोरंजन के महारथी, टीवी दुनिया के चर्चित विलेन, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, बेमिशाल बेदाग सच्ची शख्शियत, सम्मानीय व्यक्तित्व 'विजय कुमार' जी से 
बातचीत के कुछ अंश :

आकांक्षा -नमस्ते सर! आपका पूरा नाम क्या है?


नमस्ते ! मेरा पूरा नाम विजय कुमार है |


आकांक्षा -आपके जन्म स्थान के बारे में कुछ बतायें?


विजय - मैं बिहार के पटना जिले में  नौबटपुर कस्बे के छुटकी कोपा गांव का रहने वाला हूँ | 


आकांक्षा - आपने कहाँ तक शिक्षा प्राप्त की है ?


विजय-  मैंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से सन् 1994 में ग्रेजुऐशन किया | इसके बाद फिल्म इंस्टीट्यूट पुणे से एक साल का स्पेशल एक्टिंग कोर्स किया | शिक्षा का सही मतलब है सीखना तो मैं तो आज भी सीख रहा हूँ |


आकांक्षा- आपको एक्टिंग का सुरूर कब चढ़ा?


विजय-  बात सन् 1978 की है | मैं छोटा ही था | तब, उम्र रही होगी लगभग 13-14 साल | किसी कार्यक्रम के चलते फुफेरी बहन की ससुराल गया था | वहाँ जीजा जी ने मुझे दो फिल्म दिखाई दीवार और गूंज उठी शहनाई | यह मेरे लिये बिल्कुल नयी और अद्भुद चीज थी | मैं सोचता रह गया वाह! ये तो कमाल है अलग और अद्भुद ! मैं भी एक्टिंग सीखूंगा | बस फिर क्या था सन् 1986 में दिल्ली पढ़ने के लिये गया और पढ़ाई के साथ-साथ वहीं थियेटर भी करता रहा |


आकांक्षा-  आपका अभिनय की दुनियाँ में आने का अब तक का क्या जीवन संघर्ष रहा?


विजय-  संघर्ष ही जीवन है इसे शब्दों में बताना कठिन है |
हाँ, संघर्ष बहुत रहा अब भी जारी है |


आकांक्षा- ऐक्टिंग के क्षेत्र में सबसे बड़ा सहयोग किसका मिला?


विजय-  एक्टिंग के फील्ड में बहुत अच्छे लोगों का बहुत सहयोग मिला और किसी एक का नाम लेना तो उचित नही होगा | 


आकांक्षा-  आपने निगेटिव रोल (विलेन) के अभिनय को ही प्राथमिकता क्यों दी ?


विजय-  लोगों ने बोला कि मैं निगेटिव रोल में ज्यादा फिट हूँ | सभी को मेरी निगेटिव एक्टिंग पसंद आयी तो सच कहूँ तो मुझे भी निगेटिव रोल करना अच्छा लगने लगा |


आकांक्षा-  आपने अब तक कितने टीवी शो, एड,फिल्म की हैं?


विजय-  आप सभी की दुआ से मुझे काम मिलता रहा | मैंने कई ऐड फिल्में की है : फिनोलैक्स, रिलाइंस मोबाइल, स्कॉट ट्रेक्टर जैसे अलग- अलग समय पर अलग-अलग ऐड किये और सत्यमेव जयते जैसे सामाजिक शो का प्रोमो भी किया |

आकांक्षा-  आपको निमकी मुखिया शो कैसे मिला ?


विजय-  मुझे मेरे शुभचिंतकों से जानकारी मिली कि बिहार पर एक प्रोजेक्ट आने वाला है और फिर एक दिन मेरे दो होनहार स्टूडैण्ट सुजीत और तरून का फोन आया कि सर क्या आप ऑडीशन के लिये आ सकते हैं क्या ?फिर कुलविंदर और बक्शीश और जमा हबीब जी से बात हुई | मैंने ऑडीशन दिया जाकर और सभी के सहयोग से मुझे इस कमाल के टीवी शो निमकी मुखिया टीवी में काम करने का मौका मिला | 



आकांक्षा-  निमकी मुखिया टीवी शो में अपनी भूमिका के बारे में बतायें?


विजय-  निमकी मुखिया में मैं निगेटिव रोल में हूँ और यह मजेदार मिक्स कॉमेडी शो है | उम्दा डाईरेक्टर है साथ ही एक बेहतरीन टीम है और शो इंटरटेनिंग है | 


आकांक्षा-   विलेन की भूमिका निभाना कितना मुश्किल है इसे लोगों का कितना प्यार मिलता है आपका क्या अनुभव रहा?


विजय-  विलेन की भूमिका निभाना कठिन तो होता है क्योंकि आप जो हैं नहीं और वो और उससे भी ज्यादा आपको साबित करना होता है | किसी भी नाटक हो या फिल्म हो निगेटिव किरदारों को भुलाया नही जा सकता | नकारात्मक अभिनय की भी अपनी एक ताकत है अगर रावण है तो श्री राम है, कंस है तो श्री कृष्ण है और शैतान है तो इंसान है और विलेन है तो हीरो है| विलेन का कभी विलय नही होता | यूँ कह सकते हैं कि दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू हैं दोनों ही परमात्मा की शक्ति हैं दोनों का अपना अलग वजूद है | हाँ, निगेटिव रोल करने पर भी आप सभी का अपनापन और सम्मान मिलता है और मैं अपनी नकारात्मक अभिनय छवि से संतुष्ट हूँ |

आकांक्षा-  अगर कोई फिल्म ऑफर होती है तो विलेन का रोल करना चाहेगें ?



विजय-  हाँ, बिल्कुल करना चाहूंगा क्योंकि मुझे नकारात्मक भूमिकायें करना निहायत ही पसंद है तथा मैं पूरी ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ अपना बेस्ट देने का पूरा प्रयास करता हूँ |


आकांक्षा - खुद को एक लाईन में कैसें परिभाषित करेगें ?

विजय- बस यही कहूँगा कि मैं एक व्यहारिक पारिवारिक व्यक्ति हूँ | मैं आज जो कुछ भी हूँ उसमें मेरी फैमिली और सभी शुभचिंतकों के प्यार सपोर्ट के कारण हूँ |

आकांक्षा -   जो युवा, विलेन के अभिनय के लिये टीवी और फिल्म की दुनियाँ में आना चाहते हैं उनको आप क्या संदेश देना चाहेगें ?



विजय-  आकांक्षा !  संदेश देने वाला मैं कौन होता हूँ | 
मैं उस स्थिति में खुद को खड़ा नही पाता कि मैं किसी को 
ज्ञान दूँ | आपने पूछा है तो इतना ही कहूंगा कि विलेन पर्दे पर ही अच्छे लगते हैं कृपया अपनी निजि लाइफ में समाज और राष्ट्र के विलेन कभी ना बनियेगा | युवा कलाकारों से यही कहूंगा कि खुद में कुव्वत हो तो ही एक्टिंग फील्ड में आयें और पूरी लगन से डूब कर काम करें और सच कहूँ तो रोल पॉजीटिव मिले या निगेटिव मिले एक सच्चे कलाकार को अपना किरदार पूरी ईमानदारी और आत्मीयता से निभाना चाहिये | आप में जज्बा है तो फिल्मों में आयें आप सभी का स्वागत है |


विजय सर जी आपने अपना कीमती समय हमें दिया इसके लिये आपका ससम्मान सहृदय आत्मिक धन्यवाद |


कवरेज :
ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना


Published blog interview















......धन्यवाद....


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