बवाल पेज-1 /नये अवतार में - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Wednesday, January 10, 2018

बवाल पेज-1 /नये अवतार में





        





        .....बवाल.....         

           (एक अश्रु कथा) 



आज उत्तर प्रदेश के भिमारी जिले में मेरी पहली पोष्टिंग भिमारी जिले की डी.एम गौरी संघाल के रूप में, मुझे मेरा ऑफिस मिला सामने अपनू कुर्सी देख मैं मन ही मन बहुत खुश हुई |आज डी.एम की कुर्सी पर बैठ ऐसा लगा मानो जिंदगी की सारी थकान मिट गयी क्योंकि बड़ी मुसीबत झेल के यहाँ तक पहुँची थी|ऑफिस में सभी लोगों द्वारा मिल रहा सम्मान देख,  मैं फूली न समा रही थी। ऐसा लगता रहा था मानो,  अाज खुद की किस्मत पर भी खुद को जलन सी हो जाये। सच कहूँ तो आज में बहुत खुश थी। 
कुछ दिनों में मैंने महसूस किया कि यहाँ सभी मुझे अजीब नज़रों से देखते हैं...पता नहीं पर कुछ तो बात है| जिसे मैं पता कर के रहूंगी। मैंने सोचा कि दुनिया कहाँ की कहाँ पहुँच गयी और ये लोग यहीं अटके हुये हैं जो आज भी महिला प्रशासनिक अधिकारी को इस तरह धूरतें हैं। मैं मन ही मन सोचने लगी कि सचमुच इन लोगों का कुछ नही हो सकता। मैंने ऑफिस में बैठ-बैठे पूरे जिले के गाँव - कस्बों को नजदीक से देखने  का मन बनाया। क्योंकि  मैं उन लोगों को उनकी परेशानियों से निजात दिलाने की पूरी कोशिस करना चाहती थी|अॉफिस के लोग यह विचार  सुन कर खुश तो थे पर उनकी आँखें और चेहरा कुछ और ही बोल रहा था। मैंने सच जानने का  निश्चय किया कि ये अजीब व्यवहार मेरे साथ आखिर! क्यों? मैंने निश्चय किया कि मैं एक दो दिन में इनसे स्पष्ट  पूछँगीं|दूसरे दिन हम और ऑफिस के कुछ लोग गाड़ी में बैठ जिला भिमारी छोटे से शहर को घूमने निकले। जब मैंने गाड़ी में बैठे-बैठे खिड़की से बाहर के नजारे देखे तो मुझे बहुत गुस्सा आया। 
    सामने पुल की दीवारें बेहद भद्दे विज्ञापनों से रंगी पड़ी थीं। उन पर कुछ यूँ लिखा था...देखो! गधा मू.... रहा हैं और हद तो तब हो गयी जब मैंने देखा! कि उसी दीवार पर लोग टॉयलेट कर रहे हैं। पुल की दूसरी दीवार पर लिखा था 'यह प्लाट बिकाऊ है'। वहीं दूसरी तरफ लिखा था कि काफिलाज़ पशु आहार खिलाए और भैंस रानी का दूध बढ़ायें। ये सब देख मैं हैरान थी कि कैसे घटिया विज्ञापनों से जिले के फ्लाई ओवर को गंदा किया जा चुका है। फिर आगें बढ़ी तो देखा कि लोगों ने सड़क के किनारे लगे पेड़ों तक को नही बख़्शा  था जिन पर लिखा था, बाबा बंगाली मनचाहा प्यार पाने के लिये वशीकरण के लिये सम्पर्क करें|बाबासीर खूनी पेचिस , दस्त कब्ज के लिये मिलें। दयानंद ऐकेडमी प्ले स्कूल में आयें और अपने बच्चों का फ्यूचर चमकायें लोगों का यह बेशर्मी से भरा मनमाना रवैया देखकर मैं अपने ऑफिस लौट आयी। ऑफिस में आकर बैठी ही थी कि मिश्रा जी ने कहा, ''मैडम, अब क्या सोचा आपने?''मैंने कहा कि मुझे शहर,कस्बे और गाँव सब साफ -सुथरे चाहिये और तुरन्त पुल पर दीवारों पर लिखे ये घटिया प्रचार सब सााफ करवाओ अगर फिर भी कोई न माने और दोबारा लिखे तो पूरे पाँच हजार रूपये का जुर्माना देय हो।  ये बात समाचार पत्रों में छपवा दीजिये आप। फिर थोड़ी देर बाद मीडिया के कुछ लोग आये और कुछ बातें करके चले गये |ऑफिस के लोग मुझे टकटकी लगा के देख रहे थे | हमने कहा क्या बात है?  यह सुनकर सब तुरन्त अपने कार्यों में लग गये| हमने सोचा इन निगाओं में कुछ तो खास छिपा है जो मुझे पता करना है ये सब लोग कुछ तो छिपा रहें हैं,जो मैं पता करके रहूँगी|मैं कुछ सोच ही रही थी कि तभी बाहर किसी लड़की की रोने की आवाज आयी और शोर मच गया | हमने अपने पास ही बैठे कमप्यूटर ऑपरेटर शशांक मिश्रा से कहा जो लड़की रो रही है उसे अंदर लाओ प्लीज...वो बोले जी मेड़म | लड़की सामने आयी और बोली बचा लो मेड़म ! मैं उसके पास गयी और बोली क्या हुआ ? लड़की बोली,"मैम,दो महीने हुऐ शादी को देवर भी जबरजस्ती करता है और ससुर भी पति कहता है कि मेरे घरवाले तुम से कुछ भी करें या कुछ भी करें मुझसे ना कहना समझी | मेड़म फोन भी नही देते माँ से बात करने भी नही देते जब मैने चिल्लाना शुरू किया तो नन्द ने बहुत मारा और फिर में घर के सामने का गेट खुला देखा तो भाग निकली|मैं कुछ पूछती उसने हाँथ- पाँव पर जलाने पीटने के गहरे निशांन दिखाये |ये देख मेरे आँशू आ गये। मैंने उसका हाँथ पकड़ा तभी वो गिर पड़ी और बोली मेड़म बहुत भूक लगी है,  चार दिन से कुछ नही खाया मैम। मैं उसके पास गयी कि तभी उसको जोर की हिचकी आयी और वह बोली, '' मैम शायद मुझे भगवान याद कर रहे|" मैं चिल्लायी मिश्रा जी ऐम्बूलेंस बुलवाओ जल्दी|मैंने उस लड़की की तरफ देखा!  वो मेरे कुर्ते को पकड़े थी और एकाएक अचानक उसके हाथ की पकड़ ढ़ीली पड़ी और वो हाथ छूट गया। मैने उसका सिर अपनी गोद में रख लिया और उसने मुझे एकदक देखते हुये अपनी अंतिम श्वांस ली | मैं वहीं बैठी रह गयी और मैं उसे गले से लगा कर जोर से रो पड़ी | मुझे रोते देख!  मिश्रा जी बोले,"मैम,प्लीज| मैं  उठी और कुर्सी पर बैठी |ऑफिस के बाहर हंगामा मचा हुआ था | लड़की के परिवारी लोग ने ऑफिस के बाहर तोड़-फोड़ शुरू कर दी थी |मैं सोच भी  नहीं सकती थी कि उन सब लोगों ने मेरी गाड़ी फूँक डाली थी। इस घटना से पूरे जिले में ऐसा बवाल मचा था कि लोगों ने मुगल रोड़ जाम कर रखा था। हर जगह जनता की भारी भीड़ बड़ी - बड़ी तख्तियां लेकर चिल्ला रही थी कि '' लेखिका अरूणा नारंग को इंसाफ दिलाओ''। '' न्याय चाहिये ससुरालियों को सजा-ए -मौत चाहिये। '' जब मैने सुना ये लड़की  फेमस लेखिका अरूणा नारंग थी जिससे कभी मैं भी मिलना चाहती थी |किसी ने सही कहा है कि दुख इंसान की शक्ल और सूरत दोनों ही बिगाड़ देते हैं। मैं तो उनको पहिचान ही न पायी कि ये अरूणा जी हैं। ओह! माई गॉड उनके साथ इतना बुरा हुआ?''जिनसे कभी मैं इतना मिलना चाहती थी पर नहीं पता था कि इस तरह मेरी उनसे पहली और अंतिम मुलाकात होगी।'' मैंने कहा मिश्रा जी पुलिस इंस्पेक्टर से हमारी बात करवाइये अभी | मिश्रा जी ने फोन दिया हमने कहा,नमस्ते बाद में पहले अपना नाम बताइये? अच्छा सावन,नाम है आपका |आप सड़कों पर ये जो जनता का गुस्सा देख और सुन रहें हैं। आप अरूणा नारंग जी के ससुरालियों पर  तुरन्त ऐक्शन लो और सावन नाम है ना आपका,  तो अपराधियों पर  बरसो वो भी झूम के | मुझे सब आरोपी जेल में चाहिये। आप जानो आप क्या करेंगे, कैसे करें। दूसरी बात यह जो बवाल मचा है इसको भी शांत करवाइयेगा क्योंकि  इससे समाज में बहुत असंतुलन हो रहा है। मैने फोन रखा ही था कि तभी मीडिया के लोग आकर बोले, ''मैड़म आपकी गाड़ी जल गयी है आप क्या कहना चाहेंगी?''  मैने कहा, ''किसी की बेटी चली गयी,  वो ज्यादा जरूरी है मेरे लिये और उनको न्याय जरूर मिलेगा। '' मीडिया ने कहा,"ये जो बवाल मचा है आप क्या कहेंगी?''  मैंने कहा, ''जिनकी बेटी के साथ ऐसा हुआ उनसे जाकर पूछो! गुस्सा फूटना स्वाभाविक है पर मेरी सभी लोगों से अपील है कि अब धैर्य रखें, कानून दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देगा। मिश्रा जी बोले, ''मैडम बॉडी पोसमार्टम के लिये भेज दी गयी है|'' मैंने हाँ में सिर हिलाया तभी मैंने  देखा ऑफिस के लोग रोज की तरह आज भी मुझे घूर रहे हैं| मैं खड़ी हुई और कुछ बोल पाती....कि सभी एक साथ खड़े होकर बोले, ''मैम आपको देख ईरा मैड़म की याद आ गयी।''  हम लोग आपको जब भी देखते तो हर-पल उनको आप में देखते हैं| अब मेरे समझ आया कि ये लोग मुझे क्यूँ घूरते थे| मैंने कहा,"कौन ईरा?" मिश्रा जी बोले,"आज से पाँच साल पहले इस जिले की पहली महिला डी.एम आदरणीय ईरा सिंघल जी थीं|" हमने सोचा! आदरणीय शब्द का इस्तेमाल,हमने कहा चलो उनको फोन लगाओ हम सब उनसे बात करते हैं| यह सुन उन सब की आँखे भर आयीं | हमने सोचा लगता है उन्होंने  इस जिले के लिये बहुत अच्छा काम किया है तभी ये लोग इतनी इज्जत से उनको याद कर रहें है। काश! मैं भी अच्छे काम कर पाऊं जो मुझे भी ऐसी इज्जत नशीब हो| हमने कहा अरे! चलो मिलाओ मोबाइल नम्बर ...क्या हुआ?'' सामने खड़ा चपरासी बोला,'' मैडम, वो ईरा मेडम गुमनाम हो गयीं कोई नहीं जानता वो कहाँ गयीं | मिश्रा जी बोल,"हाँ, कोई नहीं जानता वो कहाँ गयीं, इतना कह कर वो रो पड़े....। मैं तो देखते रह गयीं कि सब के सब आँसू पोछ रहें हैं |हमने कहा,"आप लोग हमारी मदद करोगे अगर हम उनको ढूढ़े़ं?" वो सब बोले,"हाँ|"हमने कहा,"पहले आप लोग मुझे उनके बारे में सबकुछ बतायें जो भी आप जानते हों।मिश्रा जी बोले,"मैम,वो सब तो मीडिया में बहुत हाईलाइट था |याद करो आज से पाँच साल पहले राष्ट्रपति भवन का वो लाखों करोड़ो महिलाओं का धरना जिसमें बड़ी संख्या में पुरूष भी शामिल थे। इस धरने को देश का सबसे बड़ा '' ''बवाल''  नाम दिया जा चुका है और ईरा मैड़म को उनके विरोधी "बवाली'' ही कहा करते थे |वह सब बोलते थे डी.एम नहीं ''बवाली''  आ रहीं है। कचहरी में ऑफिस की दशा सुधार लो वरना चारों ओर बवाल ही मचेगा | मैंने कहा,"हाँ,कुछ साल पहले मैंने टी.वी पर देखा तो था पर अचानक प्रसारण रोक दिया गया था। फिर कोई बात बाहर न सकी ....है ना। मिश्रा जी बोले,"हाँ मैम,क्योंकि ईरा मैम स्टेज पर माइक से बोल रहीं थी फिर उनके प्रशंसको के बीच आने को वो जैसे हीं मंच से नीचे उतरीं बस वहीं भीड़ में कहीं गुम हो गयीं या गुम कर दीं गयीं | उनके गुम होने के बाद वो 'बवाल'  मचा था कि पूरे देश में आगजनी मची थी। ना जाने कितने लोगों ने उनके लिये ट्रेन के सामने लेट कर प्रदर्शन किया था और  बहुत लोग मारे-पीटे भी गये। वह ऐसा साल था जब देश की जेलें नवयुवतियों, नवविवाहिताओं महिलाओं और पुरुषों से भर गयीं थीं। मैंने कहा कि हाँ, उस समय मेरा एग्जाम का समय नजदीक था और मैंने खुद को स्टडी रूम में कैद कर लिया था। मैं उन दिनों कड़ी मेहनत में जुटी थी। इसलिये ये सब जो देश में हुआ हमने कुछ करीब से जानने की कोशिश नहीं की पर मिश्रा जी इतनी महान महिला अचानक चुप कैसे हो गयी? यह बात सुनकर मिश्रा जी बोले, '' यही तो पूरा देश जानना चाहता है मैम...! हमने कहा मिश्रा जी आप पाँच साल पुराने सभी अखबार मंगवाइये और बस  आज और अभी से जुट जाइये ठीक है। दूसरी बात यह कि जिसको जो भी पता चले मुझे बताना |अगर कोई खास गुप्तचर टीम बनानी हो तो बना लीजिये हम सब साथ हैं पर यह सारी बातें अभी अपने तक ही रखना |मिश्रा जी ने कहा, '' ओके मैम।'' गौरी संघाल ने नेट पर अपने तरीके से खोजबीन करना शुरू किया और फिर उन्होंने यू ट्यूब पर ईरा जी के वीडियो सर्च किये |वो रात भर इस केश से जुड़ी कड़ी को ढूँढ़ने  और जोड़ने का प्रयास करती रहीं| सुबह ऑफिस पहुँच कर काम निपटाकर सब लोग पुराने मंदिर पर पहुचें। वहाँ पहुँच कर मिश्रा जी बोले मैम ये तस्वीर देखो ! मैम मंच से उतर रहीं हैं और ये महिलायें उनके हाथ पकड़े हंस रही हैं। यह सुनकर विनय शर्मा बोले मैम में आपके ऑफिस में पत्र टाईप करता हूँ और मैंने पता किया है कि ये महिलायें क्रिमिनल्स हैं। मैने कहा, '' क्या सच, पूरी बात साफ-साफ कहो?'' मैंने इन सब महिलाओं की तस्वीर एक बार  पेपर में छपी खबर 'ट्रेन में सक्रिय महिला जहरखुरानी गैंग'  में साफ देखी थी। मैंने कहा, '' बहुत अच्छा, हम सब जल्द सच के करीब होगें। हम लोग बात कर ही रहे थे कि तभी इस्पेक्टर सावन आकर बोले आप सब यहाँ एक साथ?'' गौरी संघाल बोलीं, ''ये लो तस्वीरें और सिर्फ पता नहीं करो बल्कि पकड़ो तुरन्त।'' सावन बोला ये सब फोटो! ये अखबार! मैं जो समझ रहा हूँ क्या वो सच है? मैने कहा, ''हाँ ......लग जाओ....बस काम पर।  सावन हो बस बरस जाओ जाकर बस| सावन,"बिल्कुल,ईरा जी के लिये के लिये कुछ भी करूँगा|"सब लोग अपने घरों को चले गये | गौरी अपने ड्राईवर से बोली,जगत भाई! गाड़ी जरा पास के गाँव जगतपुरा की तरफ ले चलो। जगत भाई ये जगतपुरा गाँव का नाम तुम्हारे नाम के कारण पड़ा क्या ? ड्राईवर मुस्कुराया क्या मैड़म आप भी...शायद  उस गाँव के नाम मेरा नाम पड़ा हो....यह सुन कर गौरी संघाल हँस पड़ी और जगत भी हंस पड़ा| गौरी ने गाँव के बाहर ही गाड़ी रोक दी और गाँव में आकर  किसी को ढूँढ़ने  लगीं और तभी एक बुजुर्ग बोले किसे ढूढ़ रहें हैं आप लोग? गौरी कुछ कहती तभी एक महिला बोली बाबा तुम्हारे नाती का फोन आया है....तभी गौरी उस महिला के घर के अंदर जाने लगीं। यह देखकर  वह बाबा और वह महिला बोली अरे! कौन हो तुम लोग। मैं तुम्हें नहीं जानती | गौरी ने कहा पर मैं तुम्हें अच्छी तरह से जानती हूँ। देखो! तुम्हारा नाम जानकी बाई और तुम्हारे बाबा का नाम केशव दयाल है न। यह सुन वह महिला मुझे हैरानी से देखने लगी। मैंने कहा,'' ये देखो! अखबार ईरा जी के साथ कई जगह तुम्हारी फोटो है पीछे छिपी सी खड़ी हो तुम | देखो! जो जानती हो बताओ? वह बोली आप मेरा नाम कैसे जानती हैं?'' गौरी ने कहा,"साइन्स ने बड़ी तरक्की की है,  नेट है पहिचान पत्र,  निवास प्रमाण पत्र,  आय - जात और   पूरी वोटर लिस्ट ऑनलाईन है....आज | सब पता चल जाता है|अब बताओ जो भी जानती हो? वह बोली,"मैडम,मैं क्या लाखों लड़कियाँ ईरान मैडम के  साथ थीं|"उन्होंने समाज से दहेज़ खत्म कर देने का बीड़ा उठा लिया था|" वो लड़कियों के आँसुओं में ही डूब के कहीं गुम हो गयीं। '' यह कहते-कहते वह फूट-फूट के रो पड़ी कि उनका जाना और देश की हर लड़की का असुक्षित हो जाना। गौरी संघाल ने कहा,"तुम किसी को जानती हो जो उनके बारे में हमें कुछ भी बता सकें क्योंकि हम उनको ढूंढ़  रहें हैं,प्लीज कुछ तो बताओ|वह अपनी साड़ी के पल्लू से अपने आँसु पोंछते हुयी बोली क्या सचमुच।  उनके लिये प्लीज कहने की जरूरत ही नही है....हाँ मैं जानती हूँ वही जो उनके बारे में सब जानते हैं पर....। गौरी ने कहा पर क्या? वो बोली,"आप खुद ही जाकर देख लो। गाँव के बाहर शमशान है वहीं बीहड़ में एक सूखे पेड़ के नीचे लेटा एक पागल दिखेगा। गौरी ने कहा,"पागल?"|जानकी बाई बोली,"वो पागल पाँच साल पहले देश का माना हुआ पत्रकार था और ईरा मेड़म का खास दोस्त भी था| गौरी ने कहा,"धन्यवाद,जानकी बाई| मैड़म और ड्राईवर दोनों  गाँव के बाहर आये गाड़ी में बैठ गये | ड्राईवर बोला,"मैड़म,चलें|" गौरी,"हाँ|" गौरी और ड्राईवर दोनों  शमशान के वीराने में उस पत्रकार को ढूँढ़ने  लगे तभी देखा! कि सामने दो छोटे बच्चे अपने सिर और कन्धों पर लकड़ी का भारी गट्ठर रखें हुऐ चले आ रहें हैं और उनके साथ शायद उनका पिता भी है जो कुछ लकड़ियाँ हाँथ में पकड़े हुऐ है| गौरी उनके पास जाकर बोली,"छोटे बच्चों के कन्धों पर इतना भार?'' वो गरीब बोला," मैड़म, इससे ज्यादा तो इनके बस्ते भारी हैं|" वैसे में इतना भार बच्चों से न उठवाता पर इनको ये सीख देनी जरूरी है कि हम कितनी मेहनत से लकड़ियाँ बीन के लाते हैं ताकि ये पढ़ें  कुछ बनें और इनको अपने बाप कि तरह जंगलों,  श्मशान के वीरानों  में लकड़ियाँ   बीनना ना पड़े और ये रोज ज्यादा- ज्यादा लकड़ियाँ इधर- उधर फेंकते हैं और बिना वजह जला डालते हैं तो अब ये इनकी कीमत जानेगें और फिर ऐसा न करेगें| वहीं पास में खड़े बच्चे बोले,"बाबा अब  कभी लकड़ी बर्बाद नहीं करेगें|" गौरी बोली ,"आप जैसी अच्छी सोच वाले पिता के बच्चे देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करतें हैं।'' गौरी संघाल ने कहा,"क्या यहाँ कोई सूखा बड़ा सा पेड़ है जहाँ कोई पागल रहता है?|" वो ग्रामीण बोला उधर वो देखो! सूखा पेड़,वो पागल वहीं कहीं होगा|" पर मैड़म वो पागल पहले पत्रकार था ईरा मेड़म के गायब होने के बाद ये भी पागल हो गये |यह कहकर वो ग्रामीण आगे बढ़ गया | हमने सोचा कि वो क्या शख्सियत होगी हर कोई उनको जानता है और इज्जत करता है| हम दोनों किसी तरह उस पेड़ तक पहुँचे देखा! कोई वहां  लेटा हुआ है| ड्राईवर बोला,"मैड़म मेरा तो यहाँ दिन में डर से बुरा हाल है दूर- दूर तक कोई भी नज़र नहीं ना आ रहा। जाने ये रात में कैसे यहाँ रह पाते हैं...। मैम इंसान इतना भी अकेला रह सकता है मैंने आज देखा |गौरी ने उस पत्रकार के पास जाकर कहा,"सर|" वो आँखे खोल के धीरे से बोला,"कौन?"| गौरी संघाल बोली,"सर,मैं गौरी संघाल डी.एम भिमारी, प्लीज मुझसे बात कीजिये |" वो बोला,"डी.एम और उनकी सूखी सी आँखों में जैसे चमक आ गयी। वो मुझे देखते रह गये और उनकी श्वांसे तेज चलने लगीं और वो उठे उनके होंठ हल्के से हिले तभी अचानक वो वहीं गिर के बेहोश हो गये| ड्राईवर जगत ने उनको गोद में उठाया और गाड़ी में लिटा लिया | गौरी संघाल ने कहा,"सीधे मेरे घर ले चलो और अब वहीं इनके स्वास्थ्य की पूरी व्यवस्था करेगें | ड्राईवर जगत,"यही ठीक रहेगा|" गौरी ने तुरन्त नम्बर मिलाया और वो इस कहानी कि पहली और मजबूत कड़ी मिलने पर खुश थी| घर पहुँचते ही डॉक्टर बंसल और उनके साथी मौजूद थे। उन्होनें  तुरन्त पत्रकार जी को बैड पर लिटाया और इलाज शुरू कर दिया | इधर तभी गौरी के पास कॉल आयी 'मैम आप तुरन्त इस पते पर आयें आपका काम हो गया है। ' गौरी ने कहा,"धन्यवाद! कौन कहता है कि फेसबुक के दोस्त काम नहीं आते। आपका फिर से शुक्रिया|वो दोस्त बोले,"मैम,ईरा मैम के लिये देश के लिये कुछकरनेको बड़े नशीब से मिलता और जब दोस्त बोला तो धन्यवाद कह कर शर्मिंदा ना करें|गौरी ठीक है मैं निकलती हूँ पता व्हाट्सअप कर दो | गौरी ने डॉक्टर बंसल से कहा कि इनको जैसे ही होश आये मुझे कॉल कर दीजिये | गौरी ने ड्राईवर से कहा,"जगत, तुम थके हो तो आराम करो या घर चले जाओ मैं खुद ड्राईव कर लूँगी | ड्राईवर जगत ने कहा,"मैम, जब तक आपसफल नहीं हो जातीं तब तक मैं कहींनहीं जाऊँगा और आपसे हाँथ जोड़कर प्रार्थना है आप अब कभी मुझे आराम के लिये नहीं कहेगीं अब तो आराम तब ही होगा जब आप सफल होगीं| गौरी संघाल ने कहा,"मुझे तुम पर गर्व है कि तुम मेरे साथ हो दोस्त की तरह |" दोस्त शब्द सुन वो जमीन पर बैठ गया और आँखों में नमी के साथ बोला मुझे आपका ड्राईवर ही रहने दो मैं एक अच्छा ड्राईवर सिद्द होना चाहता हूँ प्लीज मैम|" गौरी ने कहा,"जैसा तुम ठीक समझो,अब चलो जल्दी|" दो घंटे के सफर के बाद गौरी और जगत दोनों ठीक पते पर पहुँचते हैं|वहाँ गौरी के दोस्त सामने से आकर हाँथ मिलाते है और उस बिल्डिंग के एक फ्लैट में ले जाते हैं और कहतें है यही है उस पत्रकार का ठिकाना और ये पुराना लैप टॉप और जमीन पर दरबाजे के पास से ये दो सी.डी कैसैट मिलीं हैं| गौरी तुरन्त पहला पार्ट शुरू करो| गौरी ने देखा ये तो राष्ट्रपति भवन के धरने की सी.डी ओफ हो! इतनी भीड़ आखिर !इतनी बड़ी भीड़, क्या अमिट और दमदार आवाज है है...और तभी डॉक्टर बंसल की कॉल आ गयी कि मैम इनको होश आ गया है और ये कुछ कहने की कोशिश कर रहें हैं| गौरी ने लैपटॉप बंद किया सी.डी बैग में रखी | सीधे गाड़ी में आकर बैठ गयीं और उनके दोस्त भी अपनी गाड़ी से वापस हो गये| गौरी सीधे ही अपने रूम में पहुँचीं | जहाँ पत्रकार बिल्कुल आराम  से लेटे हुयें हैं। उनकी दाड़ी भी साफ हो चुकी थी और सिर के बाल भी हल्के हो चुके थे किन्तु वह बहुत बैचेन दिख रहे थे| मैंने उनसे कहा,"पत्रकार जी,अब कैसे हैं आप?|" वो बोले,"ठीक नहीं हूँ|" गौरी ने कहा," सच है,ईरा जी को जानने वाला  कोई भी व्यक्ति ठीक नहीं पर आप ठीक कर सकते है। मुझे उनकी बिल्कुल शुरू से पूरी कहानी सुननी है प्लीज हाँ बोल दीजिये |" पत्रकार ने कहा," मैं आपको जरूर सुनाऊँगा जो भी मैं जानता हूँ, आप में मुझे सत्य दिखता है और आजतक में सत्य खोजता ही रहा पूरे पाँच साल बीत गये। हाँ आज सत्य को में सच जरूर सुनाऊँगा|" गौरी संघाल ने कहा,"पहले आप पूरी तरह स्वस्थ्य हो जाईये तभी डॉक्टर बंसल ने बाहर से आवाज दी मैड़म ! गौरी उठी और रूम से बाहर चलीं गयीं | बाहर डॉक्टर बंसल ने बताया कि मैड़म अभी उनको बहुत कमजोरी है और दिमाग भी कमजोर है अगर इन्होनें  कोई गम्भीर बात सोची तो इनकी याददास्त जा सकती है| आगरा में डॉक्टर  गुरनानी है जो ऐशिया लेवल के मस्तिष्क की बीमारियों के स्पेशलिस्ट हैं। पत्रकार जी को आगरा दिखा दें क्योंकि  अधिक सोचने के कारण ये कुछ बोलते हैं और कुछ बड़बड़ाने लगतें हैं | गौरी संघाल ने कहा,"डॉक्टर साहब हम पत्रकार जी की जिम्मेदारी आप पर सोंपतें हैं अगर आप चाहें। फिर आगें डी.एम कुछ बोल पातीं कि डॉक्टर बंसल बोले कि मैम मुझे खुशी होगी अगर मैं आपके काम आ सकूँ| डी.एम बोली उनको आज ही ले जाओ और पहुँच कर बात करना | गौरी जैसे ही रूम के अंदर आयीं तो पत्रकार जी को देख कर हैरान रह गयी। वह बैड़ पर खड़े होकर बोल रहे थे कि मैम दिल्ली की तैयारी हो गयी हाँ हो गयी...। गौरी ने पीछे मुड़कर देखा तो पीछे खड़े डॉक्टर बंसल बोले,"मैम, देखा! आपने? '' बस ऐसे ही ये पूरी तरह पागल हो सकते हैं |" गौरी,"पर,डॉक्टर साहब अभी तो ये ठीक थे फिर ये अचानक कैसे ?" डॉक्टर बंसल बोले,"मैम,इस बात का जबाव तो डॉक्टर गुरनानी ही दे सकतें हैं |" गौरी,"इनको गुरनानी जी को दिखाने को ले जाइये,अब देर ना लागाइये |" डॉक्टर बंसल बोले,"जी,मैम|" फिर तभी थोड़ी देर में बंसल क्लीनिक के कुछ  डॉक्टर अपनी ऐम्बूलेंस के साथ आये और पत्रकार जी को अपनी गाड़ी में लिटा कर आराम से ले जाने लगे तो गौरी ने पत्रकार जी से कहा आप घूमने जा रहें है जल्दी वापस आना| पत्रकार जी बोले,"ऐम्बूलेंस में कोई घूमने जाता है! क्या मुझे पागल समझती हो।  प्लीज मुझे मत भेजो और इतना कह कर बच्चों की तरह रोने लगे फिर एकाएक  गिर कर बेहोश हो गये| गौरी उनकी ये हालत देख रो पड़ी तभी डॉक्टर बंसल पास आकर बोले,"मैम, चिन्ता ना करें,  हम आपको अब तभी बुलायेगें जब देश के इस महान पत्रकार जी को बिल्कुल स्वस्थ्य कर देगें | गौरी संघाल ने कहा,"धन्यवाद डॉक्टर साहब अब आप ही देखो |" डॉक्टर बंसल बोले,"डॉन्ट वरी,कह कर गाड़ी मैं बैठ कर आगरा रवाना हो गये|" गौरी अंदर रूम में आकर चुपचाप बैठ गयी और पुराने अखबारों को देखने लगी। तभी ड्राईवर जगत आकर बोला,"मैम,| डी.एम बोली,"आओ,कुछ कहना चाहते हो?" जगत ने कहा,"मैम,आपको पता होगा कि इन पत्रकार जी के माँ-बाप दोनों पत्रकार थे उनकी लव मैरैज थी और सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपने पुत्र का नाम 'पत्रकार'  ही रख दिया |अाज इतने मजबूत इरादों वाले पत्रकार को यूँ डॉक्टरों के साथ जाते देख काफी दु:ख हो रहा है|गौरी संघाल बोली,"हाँ, इस नाम की कहानी हमने नेट पर पढ़ी थी।  वो जल्दी अच्छे हो जायेगें। ईश्वर से प्रार्थना करो| जगत ने कहा,"बिलकुल मैम|" तभी,  गौरी के पास कॉल आयी |गौरी ने कहा,"हैलो,कोई उधर से बोला," चुपचाप बीस हजार भेज सवाल न करना समझीं| गौरी ने कहा,"जगत,बैंक चलो|" जगत ने कहा," आप बताओ मैं काम कर आऊँ। बैंक में क्या काम है?" गौरी ने कहा, '' ठीक है ये लो इस खाते में बीस हजार डाल आओ अरजेन्ट। '' जगत ने कहा,"मैम ये तो आपकी पासबुक है? '' गौरी ने कहा, '' ठीक है पासबुक ही है|" जगत ने आश्चर्य से कहा, '' मुझ पर इतना भरोसा मैम? '' यह सुन गौरी मुस्कुराई और बोली, '' भरोसा इतना,  उतना नही होता, भरोसा तो भरोसा होता है और मैं तुम पर पूरा भरोसा करती हूँ। जगत नमस्कार आँखों से बोला कि आपका यह भरोसा कभी नही टूटेगा ये मेरा वादा है, कहकर पासबुक को माथे पर लगा लिया और तेज कदमों से बाहर निकल गया। दूसरे दिन सुबह  गौरी ऑफिस पहुँचती है और कहती है मिश्रा जी जगतपुरा के प्रधान को बुलवाओ|मैं उसदिन जगतपुरा गयी थी तो मैने देखा कि उस गाँव की हालत बहुत खराब थी। गंदगी से नालियाँ बजबजा रहीं थीं और गाँव की पुलिया टूटी है जिससे स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में बहुत असुविधा हो रही है। उसको बोलो कि मैं कल फिर आ रहीं हूँ। मुझे हर तरफ सफाई चाहिये और गाँव में आकर सरकारी स्कूल की भी सफाई देखूगीं|इधर जैसे ही आस - पास के गाँव में पता चली कि डी.एम आने को हैं तो पूरे गाँव में दिन-रात सफाई का काम होने लगा|गौरी ने कहा,"मिश्रा जी,दीवारें साफ हुईं? वो जो लिखा था बाबा बंगाली! बवावसीर के लिये  मिलें|ये सुन कर आफिस में सब लोग हँस पड़े|मैड़म ने कहा,"कल गाँव के सभी प्रधानों और नगरपालिका के लोगों और सभी आधिकारियों की मीटिंग बुलाओ कि वे लोग आठ दिन के अंदर सब सफाई करवा दें वरना सबका एक महीने का वेतन कट जायेगा|
       इस मीटिंग के खत्म होने के बाद से पूरे जिले के सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों  की हालत पस्त थी |डर के कारण चारों तरफ सफाई चल रही थी|डी.एम ने अचानक तहसील, कचहरी और अस्पताल का औचक  निरीक्षण किया तो वहाँ हड़कम्प सा मच गया। सब लोग फाईलें सम्भालनें में लग गये|डी.एम ने कहा,"आप सभी अधिवक्ता लोग यूनीफोर्म में आया कीजिये प्लीज और मुकदमों को जल्दी फाईनल करने की कोशिश  करें ताकि लोगों को तुरन्त न्याय मिले |दो पीड़ी बीत जातीं है तब तक दो बीघा खेती का बटवारा सुलझ नहीं पाता और लड़कियां तारीख़ पर आते-आते बूढ़ी हो जाती पर उसकी समस्या का निदान नहीं होता अरे!आप लोग अपना काम तो ईमानदारी से और जल्दी निपटाने की कोशिश करें। अपनी शक्ति को पहिचाने गलत इल्जाम में फंसे लोगों के आप ही भगवान हैं। इस बात को समझें|वकील धीरे से बोले,"ईरा जैसी ही लगती हैं |'' फिर दूर खड़े क्लाईन्ट लोगों से उनकी समस्यायें सुनी और उनको भरोसा दिलाया कि मैं पी. एम जी को पत्र लिखूँगी कि देश में तुरन्त न्याय की व्यवस्था हेतु सरकार कुछ ठोस कदम उठाये| वो गाड़ी में बैठ अपने ऑफिस वापस आ रहीं थीं कि उन्होंने देखा कि चारों तरफ पुल की दीवारें साफ हो रहीं हैं। चारों तरफ लोग सफाई में जुटे पड़े हैं| गौरी संघाल को यह देख बहुत खुशी हुई| गौरी संघाल ने अपने घर के अंदर जैसे ही पाँव बढ़ाया कि तभी एक फोन आया गौरी ने कान में लगाया और तभी किसी ने  कहा कि पाँच हजार भेजो| गौरी ने उदास चेहरे से कहा,"ओके,अभी भेजती हूँ|" पीछे ड्राईवर जगत ने कहा,"क्या बात है मैम?" गौरी ने कहा,"जगत,ये पाँच हजार रूपये, इस खाते में डाल देना|जगत ने कुछ पूछने कि कोशिश की पर वह हिम्मत न कर सका| जगत चला गया | इधर गौरी संघाल ने डॉक्टर बंसल को फोन मिलाया हैलो!डॉक्टर बंसल ने कहा,"मैम,उनकी हालत में थोड़ा सुधार हुआ है। हाँ पर किसी व्यक्ति  को सोच कर ये फूट-फूट कर रो पड़ते हैं|गौरी ने कहा,"डॉक्टर गुरनानी क्या कहते हैं?"डॉक्टर बंसल ने कहा,"वो कहते है धैर्य रखो सब ठीक हो जायेगा|गौरी ने कहा,"ठीक है,कहकर फोन रख दिया|गौरी ने कुछ देर बाद खाना खाना शुरू किया तभी कुछ सोचकर एक कॉल की पर किसी ने फोन नहीं उठाया |गौरी ने भरी आँखों से खाना खाया और कुछ देर टहलीं फिर उन्होंनें इंस्पेक्टर सावन को कॉल की हैलो,इंस्पेक्टर सावन,"वो लेखिका अरूणा नारंग जी के केस का क्या हुआ ?"इंस्पेक्टर सावन ने कहा,"मैम,सब आरोपी हिरासत में हैं माँ कसम बेलौस बजा है सब पर कोई बख़्शा  नहीं जायेगा मैड़म जी,वो बेहतरीन उम्दा लेखिका थीं। बस उनके शब्द ही रह गये पर वो न रहीं। ताज्जुब इस बात  का है कि वो महिलाओं पर हो रहे शोषण पर लिखतीं थी और उन्हीं के साथ ये सब हुआ|गौरी ने कहा,"वो आप बीती ही लिखा करतीं थीं पर कोई समझ न सका, बस यही तो विड्म्बना हैं इस देश की |इतना कह कर गौरी ने फोन रख दिया और फिर लैप टॉप पर देर रात तक इरा सिंघल जी के बारे में जानकारियाँ जुटाती रहीं। उसके बाद वो लैटने चलीं तो उनकी खाना बनाने वाली बोली,"मैम,वो ड्राईवर भाई ये पैकेट रख गये |गौरी ने कहा,"ओह! पासबुक,  ठीक है अब तुम जाओ|
आज एक महीना बीत गया.......।
पूरे भिमारी जिले में चारों  ओर सफाई थी|सब ठीक चल रहा था|गौरी अपने ऑफिस में बैठी  हुई  थी। सामने सभी लोग अपने-अपने कार्यों में व्यस्त थे |गौरी ने नव जागरण अखबार उठाया और पढ़ने लगी तो देखा कि दहेज़ के लालच में घर से निकाली गयी नव विवाहिता, दहेज़ के लालच में गर्भवती को पीट-पीट  कर मार डाला |जब पेज पलटा तो देखा कि होटल मालिक ने किया बाल मजदूर बच्चों के साथ कुकृत्य हल्ला मचाने पर की पाँच बाल मजदूरों की हत्या, बी.एड बोरोजगारों का धरना, बेरोजगार करेगें अब जंतर - मंतर पर राष्ट्रव्यापी धरना , पाँच साल की बच्ची के साथ उसके चाचा ने किया दुष्कर्म मुगल रोड पर भारी जाम चारों तरफ आगजनी मचा है पूरे देश में बवाल |गौरी ने कहा,"मिश्रा जी,आपने जागरण पढ़ा?"मिश्रा जी सुस्त मन से बोले,"हाँ,मैम पढ़ा |गौरी ने कहा,"आप लोग बताओ आखिर!क्या होना चाहिये अब तो अति हो गयी है |मिश्रा जी ने कहा,"हर जिले में एक दो फाँसीघर हों और रोज़ जनता ऐसे कुकर्मी चाचाओं को पकड़ कर अंतिम झूला,  झुला दे बस और क्राईम खत्म। मैडम आज किसी को कानून का डर ही नही है।भ्रष्टाचार का आलम तो यह है कि बहुतेरे तो पैसे के दम पर छूट भी जातें हैं |गौरी बात काटते हुईं बोली,"मिश्रा जी हम बवाल नहीं शान्ती चाहतें हैं|"अच्छा तो एक सेमिनार का आयोजन करो जिसमें सभी कॉलेज स्टूडेन्ट्स को बुलाओ। हम उनकी राय लेगें|मिश्रा जी ने कहा,"मैम,परसो से चुनाव हैं हर तरफ सरकारी अध्यापक-अध्यापिकायें प्रदर्शन कर रहीं हैं कि उनकी चुनाव ड्यूटी से बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब  होती है|आचार संहिता लगी है। ऐसे में बच्चों की भीड़ मतलब 'बवाल'  |बात हो ही रही थी कि तभी मीडिया के लोग आ गये तो गौरी ने कहा,"आप लोग पेपर में निकालो कि हर आयोग का अपना स्टॉफ है तो चुनाव आयोग का क्यों नहीं? कुछ नहीं तो जितने बेरोजगार हैं उनको ऐसी ट्रैनिंग दो जिससे उनका दो रोटी का सहारा हो।  उनसे चुनाव ड्यूटी करवाओ तो   मेहनताना भी दो।   इससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई भी बाधित नहीं होगी और बेरोजगारों को धनलाभ भी हो जायेगा और एक बात सरकारी स्कूल में केवल रविवार का दिन ही निश्चित करें। वरना कोई और बिल्डिंग उपयोग करें|ये पूरी बात पेपर में निकालो कि इस बात पर सुप्रीम कोर्ट ऐक्शन ले|मीडिया वाले बोले," और कुछ मैम|" गौरी ने कहा,"शुक्रिया|"मीडिया वाले बोले,"किस बात का शुक्रिया?"गौरी संघाल ने कहा,"आप सभी की मेहनत के कारण हमको अपने जिले और देश-दुनिया की जानकारी मिलती है|मीडिया वाले बोले कि ये हमारी ड्यूटी है मैम कहकर ऑफिस से बाहर चले गये |तभी गौरी संघाल ने इंस्पेक्टर सावन से फोन पर बातचीत की और ऑफिस के कुछ लोगों के साथ बाहर निकलीं और जगत से कहा," आमावता गाँव चलो देखते हैं लड़की को क्यों निकाला है आखिर!फिर चलेंगें केशव गंज जहाँ गर्भवती को...और फिर चलेगें बच्ची के घर .... अब चलो|अमावता पहँचती हैं तो नवविवाहिता गौरी से लिपटकर रो पड़ती है और कहती है कि मैं बी.एड हूँ टी.ई.टी में पास नहीं हुई मतलब मुझे नहीं,  मेरी कमाई चाहिये बस। जब मुझे सरकारी नौकरी नही मिली तो मार-पीटकर घर से निकाल दिया |गौरी ने कहा,"तुम एनजीओ चलाओगी बोलो अपने जैसी और भी लड़कियों की मददगार बनना। इसके  लिये सरकार तुमको पैसे भी देगी बोलो?" वो बोली,"मैम, मैं जरूर करूगीं। मेरी और भी सहेलियाँ हैं उनको भी जोड़ूगीं |गौरी ने कहा,"शाबाश! आगे बढ़ो और सभी को आगें  बढ़ाओ। इससे जुड़ी सारी जानकारी मैं तुमको दूँगीं।  मैड़म सुचित्रा जी हैं उनसे में तुमको मिलवाऊँगीं ये लो उनका नम्बर वो देश के सबसे बड़े एनजीओ की अध्यक्षया  हैं|वो लड़की, गौरी के पाँव छूने लगी तो गौरी ने कहा,पाँव मत छुओ गौरी,  पाँव मजबूत करो। और अपने ससुरालवालों का नम्बर इन महिला पुलिस मंजिल सैनी को दो और पूरी बात बताओ|सारी बात के बाद डी.एम गौरी संघाल उस गर्भवती महिला के गाँव केशवगंज पहुँची तो लोगों की भारी भीड़ उनपर चिल्लाने लगे और उग्र भीड़ ने उनकी गाड़ी के शीशे फोड़ दिये| बड़ी मुश्किल से गौरी उस घर में पहुँची तो उसकी माँ उस नवविवाहिता की मिट्टी पर बुरी तरह तड़प के रो रहीं थीं |गौरी ने उनको गले से लगा लिया और बोली कि मत रो।  वह बोलीं कि इसका पति जीते जी मर गया और बेटा पेट में जिंदा दफ़न हो गया। सब पूछ रहे हैं कि कौन देगा इसकी चिता को आग? मैं कहतीं हूँ कि चिता को आग वही देगा जो इसको न्याय दिलायेगा। यह सुनकर चारों तरफ हल्ला मची रहे लोग इकदम खामोश हो गये|उस बेटी का पिता आँसू पोछते हुऐ बोला,"अरी!रामराजा रात होने से पहले अर्थी लग जान दे। तू मरी बेटी की लाश को आखिर! कब तक सेंतें रखेगीं। वह माँ चिल्लाई कि मेरी बेटी मरी नहीं बल्कि  मारी गयी है और तुमको ज्यादा जल्दी है तो मैं भी चलूँगीं श्मशाम, मुझे भी जिंदा फूंक दो ।  वरना मुझे मेरी बेटी के साथ अकेला छोर दो|इससे अच्छा तो मेरी बेटी किसी के साथ भाग कर शादी कर लेती जहाँ रहतीं खुश रहती। कम से कम जिंदा तो होती |देख लो मिल गयी शान्ती समाज लोगों को।  हुई न जल्दबाजी में  अरेन्ज मैरेज और आपकी नाक भी बच गयी पर मेरी बच्ची मर गयी। अब यह समाज दिलायेगा मेरी बच्ची को न्याय? बोलो पायल के पापा बोलो ! कह कर जमीन पर सिर पटक कर रो पड़ी|वो बोले,"तुम भी चलो श्मशानघाट   तकऔर मिट्टी उठी तो चारो तरफ चिल्ला चीख मच गयी।  मैं भी खड़ी यह मंजर देख रो पड़ी और सभी श्मशान  में पहुँचे। फिर जब आग लगाने की बारी आयी तो उसकी माँ ने सब की तरफ देखा! पर कोई आगे  नहीं आया। तो, वह माँ चिल्लायी!  मैं मेरी बच्ची  पायल को पैदा कर सकती हूँ तो आग भी दे सकतीं हूँ। मैं दिलाऊँगीं मेरी बच्ची को न्याय|फिर,  आँखों में न्याय की शपथ लेते हुये मन ही मन बदले की भावना के दहकते अंगार भर कर एक माँ ने बेटी को मुखाग्नि दे डाली। ये देख गौरी संघाल ने कहा, ''  माँ तेरे कलेजे को प्रणाम है।'' फिर,  चुपचाप वहाँ से निकलने लगीं तो एक औरत बोली कि पुरानी वाली डी.एम ईरा जी होतीं तो वो उस माँ को मुखाग्नि देने नहीं देती। इतना कहकर वो महिला  आगे बढ़ गयी|गौरी ने मिश्रा जी से कहा कि क्या मतलब इस बात का?" मिश्रा जी ने कहा कि डी.एम ईरा सिंघल होती तो मुखाग्नि वो स्वंय देतीं आगे बढ़कर|गौरी बोली,"क्या ?"तो मिश्राजी ने हाँ में सर हिला दिया|उसके बाद गौरी पाँच साल की बच्ची जो  अस्पताल में थीं। वहाँ पहुँचीं तो देखा पुलिस प्रशासन,  डी.एम मुर्दाबाद के नारे लग रहे थे पूरा मुगल रोड़ जाम था|ट्रक बाईक सब फूँक डाले थे लोगों ने,  बुरा हाल मचा था। पुलिस पानी की भारी बोछार से लोगों को भगा रहीं थीं पर लोग सड़क पर लेटे हुऐ थे जो हटने को तैयार नहीं थे। पुलिस को उन प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी।  किसी तरह गौरी अस्पताल के अंदर बच्ची के रूम में पहुँचीं| बच्ची ने आँख खोलकर गौरी की तरफ देखा और फिर उसकी आँखें  हमेशा के लिये बन्द हो गयीं। पास मैं बैठी उसकी माँ बेहोश हो गयी। गौरी ने उस बच्ची को गोद में उठा कर सीने से लगा लिया और तभी वो बच्ची जी उठी। गौरी बेहोश पड़ी माँ से बोली कि लो आपकी बच्ची जिन्दा है पर वह चुप पड़ी थीं। यह देखकर  डॉक्टर ने कहा कि नो मोर वे मर चुकी हैं, कमजोर दिल की थी सह ना सकी ये सब| गौरी ने कहा,"इस बच्ची का पिता!" पास खड़े लोग बोले वो इस दुनिया में नहीं| गौरी ने कहा,"कोई नहीं,आज से मैं हूँ इस बच्ची की माँ|"और उस बच्ची को गोद में लेकर वो गाड़ी की तरफ बढ़ गयीं। वहीं खड़ी महिलायें बोली पहले वाली डी.एम होतीं तो वो भी यही करतीं। यह सुनते हुऐ गौरी चुपचाप गाड़ी में बैठ गयी | एक हफ्ते बाद फिर एक कॉल आयी कि दस हजार रूपये भेजो |गौरी स्वंय जाकर उस खाते में रूपये डाल आयीं। ये देख ड्राईवर जगत से रहा नहीं गया और वो सवालिया नजरों से बोला,"मैम,?" गौरी ने कहा,"हाँ,बोलो तभी गौरी का फोन बजा और गौरी ने कहा,"हाँ, डॉक्टर साहब|उधर से डॉ बंसल बोले कि मैम पत्रकार इकदम ठीक हैं पर अभी भी थोड़ी मानसिक और शारीरिक कमजोरी है। हमको बताया गया है कि आयुर्वेद और योग इनको मजबूत बना सकता है तो हम इन्हें 'भण्डारी योगा आयुर्वेदा अरोग्या धाम हिमालया संस्थान के माने हुऐ डॉक्टर, डॉ अशोक धींगरा (आदि), जयपुर ले जा रहें हैं और भगवान ने चाहा तो वो कुछ ही दिनों में अच्छे हो जायेंगें|गौरी बोली,बस वो अच्छे हो जायें|दूसरे दिन जब गौरी ऑफिस पहुँचीं तो ऑफिस के बाहर लोगों की भीड़ लगी देखी। हो हल्ला मचा कुछ समझ नहीं आ रहा था कि तभी गौरी ने कहा,आराम से बताओ बात क्या है? इक आदमी बोला जिले में देखो कुछ लड़कियों ने डांस बार खोला है रातभर ड़ीजे बजता है गलत काम होता है बच्चे नहीं बिगड़ेगें बोलो |गौरी ने कहा,"बार कहाँ खोला है ?वो आदमी बोला," सरकारी कॉलेज के सामने| गौरी ने कहा,"जगत गाड़ी निकालो और मैड़म सीधे ही कॉलेज रोड़ पर आकर गाड़ी खड़ी की और मैड़म ऑफिस के लोग सब उस डांस बार में पहुंचे तो देखा तेज आवाज में गाना बज रहा जिस्म की आवाज को रोज सुना तुमने मेरे यार, पर मेरे जज्बातों का रखा तूने खूब ख्याल। वहाँ डी.एम को देख तुरन्त गाना बन्द हुआ तो गौरी ने कहा किसका आईडिया है ये? कौन है मुखिया सामने आओ? सामने से एक लड़की जोकि मात्र दो बहुत ही छोटे महीन (इनर वेयर) कपड़े पहने कुर्सी खींच के बोली, ''  बैठो मैडम और दूसरी कर्सी खींच खुद बैठ गयी। फिर बोली बाहर मीडिया है क्या बुलवा लो न यार। तभी मीडिया के लोग भी अंदर आ गये।  वहाँ खड़े सभी लोग उसको देख नज़रे नीची करे हुऐ खड़े थे क्योंकि पूरा शरीर खुला था|गौरी कुर्सी पर बैठ गयी और बोली,"ये सब क्यों?  तुम जानतीं हो क्यों का मतलब बताओ बस? तभी पुलिस भी वहाँ आ गयी कॉलेज के अध्यापक भी और भारी भीड़ इकठ्ठा  हो गयी कॉलेज के लड़के वीडियो बनाने में लगे  थे। पुलिस वाला बोला,"चुप क्यों है बोल? बहुत नंगापन फैला रखा है!  बहुत मस्ती चढ़ी है! बेशर्म ना जाने किस माँ की गंदी औलाद।  इतना सुनकर वो आँखों में अंगारभर गुस्से में कुर्सी सिर पर उठा कर बोली," चुप हो जा। तू बता तू  किस माँ की गन्दी औलाद है जो रात के अंधेरे में मुझे अपनी जॉन और दिन के उजालों में बदजात कहते हो बोल।  गौरी बोली,"तुम शान्ति से अपनी बात कहो|'' वह बोली,"मैड़म क्या बोलूँ, घर से बेदख़ल लड़की की एक ही जगह होत है वो यहीइच है|ससुराल वालों ने गाड़ी की डिमाण्ड की।  पूरी नहीं कर पाये तो हमेश  के लिये निकाल दिया गया।  जब चली आई तो बदनामी उड़ा ड़ाली गयी कि मैं ही गलत हूँ चरित्रहीन हूँ।  जब मैं रात को पुलिस स्टेशन गयीं तो पुलिसवालों ने जबरजस्ती करनी चाही डाली तो मैं वहाँ से भागी| सुबह सोचा इस कॉलेज में डेली बेसेज पे पढ़ाने लगूँ तो ये प्राचार्य महोदय बोले मस्त मॉल हो अपनी एक रात मुझे दे दो |ये समाज कमजोरों के लिये नही है| यहाँ लड़की को देखते ही नोच खाने वाले ये लोग इंसान नहीं बल्कि चील हैं|ससुराल में जाओ तो ससुर और देवर,  समाज में रहो तो ये चील। अब जब यही करना है तो खुलेआम दिन में क्यों न किया जाये।  इस कॉलेज में रात बिताने पर जॉब पक्की होती हैं तो दिन में मौज़ क्यों ना हो फिर|पापी पेट है मैड़म जब बदनाम हो ही गये तो अब 'बदनाम'  ही मेरा नाम है। बजाओ रे गाना |गौरी ने जगत से कहा,गाड़ी से मेरा एक दुपट्टा उठा लाओ|जगत ने तुरन्त सफेद दुपट्टा लाकर दिया|मैड़म गौरी ने कहा,"सुनो बेटी और वो दुपट्टे से उसका तन ढ़क दिया और उसे गले से लगाकर बोली,"मेरे साथ रहोगी? ''  फिर वहाँ खड़ी तमाम लड़कियों से कहा," तुम सब भी जाओ जाकर दुपट्टे डाल के आओ| वो लड़की बोली,"लेकिन मैड़म,वो..और रो पड़ीं|गौरी ने कहा,"ये सफेद दुपट्टा नहीं हिन्दुस्तान का तिरंगा है याद रखना। इस पर कभी कोई दाग ना लगने पाये और कोई पापी इसे छू भी ना पाये| मैं पढ़ाऊँगीं तुम सबको जिससे तुम सब डी.एम बनके देश की सेवा कर सको। चलो घर|वो लड़की डी.एम गौरी संघाल के गले से लगकर खूब रोयी|यह सब देख वहाँ मौजूद भीड़   घीरे-धीरे से खिसकने लगी तो मैड़म बोली,'' इस कॉलेज के प्राचार्य और यह पुलिसवाले बाबू जल्द जेल में होगें। यह सुन सब  लड़कियां खुश हो गयीं। फिर उसी कुर्सी पर बैठे-बैठे इंस्पेक्टर सावन को इशारा करते हुये कहा कि इन सभी बेटियों के ससुरालियों को तुरन्त पकड़ो और सुधरने का टॉनिक दो| शाम को घर आकर डी.एम गौरी अपनी छोटी सी बेटी को दुलारने लगी जिसे अस्पताल से लायीं थीं और उन सभी बेटियों को इलाहाबाद सिविल सर्विसेस की तैयारी के लिये रवाना कर दिया। जब लड़कियां जाते समय रोने लगीं तो समझाते हुये बोलीं कि मेहनत से पढ़ना और किसी बात की चिन्ता ना करना ठीक है|
दो हफ्ते बाद..
शाम को डी.एम अपने घर पहुँचीं तो देखकर दंग रह गयीं सामने डॉ बंसल और पत्रकार बैठे हैं...वो खुशी से बोली,"अरे!आप ये तो गलतबात ना कॉल ना मैसैज कहीं खुशी से मर ना जाऊँ|डॉ बंसल बोले मैम हम मरने मरने दें तब ना। यह बात सुनकर  सब लोग हँस पड़े पत्रकार जी बोले,"धन्यवाद मैम ...आगे क्या कहूँ। गौरी बोली,"कुछ ना कहो चलो चाय हो जाये |बाद मैं गौरी बोली,"बंसल जी शुक्रिया, तो बंसल बोले,"मैम,नो हम सब दोस्त हैं। हाँ पर डॉ अशोक धींगरा जी ने खूब आसन करवायें हैं। उनकी मेहनत का शुक्रिया कर दीजिये आप। ये लो नम्बर मिला दिया है आप बात कर लो |गौरी ने कहा,"डॉ धींगरा जी आपका शुक्रिया हम आपको एक गिफ्ट पार्सल कर रहें हैं प्लीज ऐसेप्ट कर लेना प्लीज|वो बोले,"नहीं,मैम आपकी खुशी ही मेरा गिफ्ट कहकर खुशी से बॉय कहकर फोन कट गया|सब लोग खाना खाकर अपने घर लौट गये तब रात को गौरी ने पत्रकार जी से कहा,"सर,अब आप कैसा महसूस कर रहें हैं?"पत्रकार बोले कि कॉफी हल्का सा अच्छा फील कर रहा हूँ पर मेरा ये शरीर यादों के  वजन मतलब भार से ज्यादा और कुछ नही|गौरी ने कहा,"अपना थोड़ा भार हमें दे दो सर और मेरे कुछ सवालों के जवाब दे दो बस प्लीज जो सिर्फ आप ही दे सकते हैं| पत्रकार ने कहा,"पूछो|" गौरी,"आपका सही नाम क्या है?" पत्रकार ,"मेरा नाम भी पत्रकार और काम भी पत्रकार |" गौरी,"डी.एम ईरा सिंघल के बारे में जो भी पता हो शुरू से बताओ जब से आप उनको जाने तब से...पत्रकार ने कहा," ईरा सिंघल जी जब से इस भिमारी जिले में आयीं तब से हर छोटे बड़े अधिकारी की नींद छिन चुकी थी। वो रात को काम देखने निकलतीं थीं और रोज ही नया बवाल मचता था तो  उनका इंटरव्यू लेने के लिये हमको आना पड़ता था। एक दिन बड़ी दर्दनाक घटना हुई कि पास के नौली गाँव की दो नवविवाहिता ईरा मैड़म के ऑफिस के बाहर रोतीं आयीं और वहीं खत्म हो गयीं। ससुरालवालों ने ऐसिड से उनको पूरा नहला रखा था मैड़म कुछ कह पातीं की उग्र भीड़ ने बवाल खड़ा कर दिया चारों  तरफ भीड़ और मुर्दाबाद के नारे तभी तुरन्त दो लड़कियाँ रोतीं आयीं कि ससुरालवाले बहुत पीटतें हैं मैम। ये सब देख मैड़म की आँखों से लावा घधक उठा और वो बोली या तो ईरा सिंघल रहेगी या तो अब दहेज वायरस ही रहेगा |आप लोग थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाइये जाकर फिर ईरा है ना|ईरा जी फिर थाने गयीं तो पता चला दहेज़लोभी धनवान पढ़े-लिखे लोग हैं। कोई वकील,  कोई इंजीनियर कोई  डॉक्टर वो बोली कमाल है धिक्कार है आपकी पढ़ाई-लिखाई पर जो रहम का एक शब्द तक सीख ना सके |उस थाने का इंस्पेक्टर खान जो पटा(बेल्ट) बजाने के लिये फेमस था वो दोषी को बाहर पेड़ में बाँधता और विकट मारता पटे की आवाज दूर तक जाती और हर कोई उसे देखकर काँप जाता था|ईरा ने कहा,"खान,छोड़ना नहीं इन सबको|और मुझ से बोली,"पत्रकार जी बनाओ इन सभी के पिटते हुऐ वीडियों और नेट पर वायरल कर दो ताकि फिर कोई दहेज माँगने में चालीस बार सोचे बस मैं यही सब कवरेज करता था|दूसरे दिन ईरा जी ने खुद के पैसों से पूरे थाने में वीडियो कैमरे लगवाये और चौराहों पर भी एक हफ्ते के अंदर पूरा थाना ऑनलाईन हो गया |यही सब मैनेअपने अखबार में खूब छापा| फिर,  एक दिन एक भाई अपने बहिन की लाश उठाये ऑफिस के बाहर रख के बोला मैड़म न्याय करो|जब बाहर जाकर देखा तो लाखों की भीड़ और बुरी तरह हल्ला मचा रूह काँप गयी उसकी बहन की लाश देखकर दो लोहे के मोटे बेलचा खून में सने वे भाई पकड़े खड़ा तभी एक बुजुर्ग बोले मैड़म इस बच्ची के साथ रोज दुस्कर्म करते थे।  इसके ससुराली लोग जब रात ये भाग निकली तो रास्ते में मुझे जाता देऱ बोली बाबा बचा लो तब सारी बात बता ही पायी कि पीछे से गाड़ी से कुछ लोग उतरे और बीच सड़क पर सबने गलत काम किया मुझे मुझे भी बहुत पीटा बाद में मैने देखा कि दो बेलचे इस बच्ची के शरीर के आर-पार कर दिये।  ये भयानकता देख मैं बेहोश हो गया। सुबह होश आया तो देखा लाश पड़ी तो याद आया उसने अपने भाई और पास के गाँव का नाम बताया मैंने इस भाई को जैसे बताया इसने तुरन्त अपनी बहन के शरीर से बेलचे निकाले और दौड़ता ही चला गया और सीधे बहन की ससुराल पहुँच कर ससुर और जीजा के शरीर में ये बेलचे आर -पार कर दिये। यह देख नन्द और सास चिल्लायीं तो उन्हीं बेलचों से उन दोनों को बहुत मारा दब तक दोनों बेहोश न हो गयीं और फिर ये देख देवर दूर कहीं भाग निकला तब ये बाद में अपनी बहन को देख बहुत  रोया है और आपके पास आया है मैड़म यह सुन ईरा मैड़म जमीन पर बैठ रों पड़ी थीं और बोली,"पॉसमार्टम के लिये भेजो रिपोर्ट आने दो कागज हाँथ में आने दो....चिंता ना करो भाई तुमने जो किया इकदम सही किया मेरा वादा है बहन को न्याय मिलेगा और तुमको भी सजा मैं होने नहीं दूँगींं | दूसरे दिन ईरा मैड़म डॉक्टरों से मिलीं तो पता चला कि डॉक्टर साहब खुद लड़की ससुराल से प्रताणित घर मायके बैठी है। जब पूछा तो बोले कि कौन कोर्ट कचहरी करे । समाज में बदनामी ले| ईरा मैड़म थाने पहुँचीं तो देखा कि धाकड़ आदमी इंस्पेक्टर खान फोन पर बात करते हुऐ रो रहे हैं|ईरा जी ने पूछा तो पता चला खान की भी लड़की ससुराल से प्रताणित हो किसी अस्पताल में ऐडमिट है वो बोले,"मैड़म क्या करूँ  कुछ समझ नहीं आता। मैं ड्यूटी करूँ या घर देखूँ या कोर्ट कचहरी करूँ।  इज्जत और पैसा दोनों की बर्बादी और  बेटी कहती है कि उनको कुछ न कहना, मैं सहमत लूंगी वर्ना समाज हँसेगा। फिर भी मैंने  केस कर दिया तो रोज छुट्टी तारीख कहीं जज का तबादला कचहरी में जेंबें खाली हो जातीं हैं और तारीखें दी जातीं हैं बस न्याय कहीं नहीं| बेटी को कचहरी लियें फिरूँ या ड्यूटी करूँ|'मैडम कोर्ट तो वकीलों का स्वर्ग है और क्लाइंट के लिये नर्क।'  मैने इतना सब दिया फिर भी ...। कोई और नहीं मेरे सीनियर ही है मेरी बेटी के ससुर क्या बोलूँ मैं।  वकीलों को मोटी रकम देने को कहाँ से लाऊँ पैसा? यह कह कर सिर पकड़ कर बैठ गये|ईरा जी और मैं चुपचाप वहाँ से चले आये और ईरा जी के घर आकर हम दोनों ने चाय पी वो बोलीं,"आप ही कोई रास्ता बतायें इस समस्या से निजात कैसे मिले पत्रकार जी|हमने कहा मिलकर सोचते हैं तो वो मुस्कुरायीं और बोलीं ठीक है| कुछ देर बाद बोलीं आप कल अपने और अपने जानकार वाले सभी समाचारपत्रों में ये लिखो कि जिले में जितनी भी दहेजपीड़ित बेटियाँ हैं वो सभी कल रविवार को जिले के सबसे बड़े लाल बाग स्टेडियम में एकत्र हों। डी.एम ईरा सिंघल आप सभी से बात करना चाहतीं हैं| दूसरे दिन स्टेडियम खचाखच भरा था और पूरा रोड जाम था।  इतनी भीड़ की मैड़म हैरान खड़ी देख रहीं कि ओफ हो!जब एक जिले में इतनी दहेजपीड़ित बेटियाँ हैं तो पूरे देश में बेटियों की क्या हालत होगी? हजारों बेटियों की भारी भीड़ को मैड़म ने अपने भाषण में बोला,"मेरी बहनों हम सब एक हैं अाप दुखी तो हम दुखी।  इसलिये परेशान ना हो तुम काँच हो तो चुभती हो सभी की आँखों में,  बनोगी जिस दिन आईना दुनिया खुद को तुम में देखेगी। तुम में जो भी हुनर हो बस दिखा दो दुनिया को |चारों तरफ तालियाँ बज उठीं फिर बोलीं यहाँ से जाने के बाद एक काम करना अपना-अपना शादी का कार्ड निकालना और अपनी-अपनी शादी में जिसको भी न्योता दिया था। उन सभी को एक  बार फिर से सभी रिश्तेदारों, नातेदारों मित्रों सभी को फोन से नेट से सूचना दो कि अब मेरा रिश्ता खत्म हो रहा है अतैव उस दु:खत दावत में आप सब लोग लाल बाग स्टेडियम में ससम्मान निमन्त्रित हैं। यहाँ उपस्थित हर बेटी ऐसा करेगी और सब बेटियों के सभी रिश्तेदारों आदि को यहाँ आने को कहेगी। वो भी अगले रविवार को|जय हिन्द मेरी बहनों ईरा सिंघल आपके साथ है। कह कर वो वहाँ से चल कर अपनी गाड़ी में आकर बैठ गयीं। फिर कैसे - कैसे भीड़ को थामा गया,  ये तो इंस्पेक्टर खान और उनकी टीम ही जाने|हम लोग कुछ ही आगे बढ़े कि कुछ वकीलों ने गाड़ी रोक ली और बोले,"ये तरीका ठीक नहीं क्या कहते हो पत्रकार साहिब|"मैड़म तुरन्त बाहर निकल के बोली,"ये बताओ कि क्या आप सभी की बेटियाँ अपने ससुरालों में खुश हैं?"तो वहाँ खड़े कुछ वकील बोले,"हम अपनी बेटियों को कोर्ट में खड़ा कैसे करें हमारी इज्जत का क्या होगा?  क्लाइन्ट कहेगा कि पहले अपना रायता तो बटोर लो फिर हमारा बटोरना| ईरा जी गुस्से से बोलीं,"आप लोग अपनी सामाजिक इज्जत के कारण अपने घरों में अपनी बहन - बेटियों को घुट-घुट के मरने दे रहे हो। बहुत न्याय की बातें करते हो क्या यह अन्याय आपको नही दिखता? बोलो!  क्या आप लोग भी अपनी-अपनी बच्चियों के दोषी नहीं हो ?आगे आप समझदार हो|इतना कहकर गाड़ी मैं बैठ हम दोनों घर लौट रहें थे तभी दूर एक कॉलेज की बिल्डिंग बन रही थी पर ये क्या वहाँ बाहर इतनी भीड़ क्यों हैं?मैड़म ने कहा तो मैं बोला कि लगता है कोई बवाल है चलो चलकर देखें क्या?" मैड़म बोली बिल्कुल |जब वहाँ पहुँचे तो सब चुप हो गये तो ठेकेदार बोला कि अरे!  आप आइये बैठिये|मैम की सवालियाँ आँखें देख वह बोला," इन मुँह ढ़के लेवर में कुछ लड़कियाँ भी हैं ये सब लेवर जवान लड़के हैं कुछ गलत हुआ तो होगा बवाल इसलिये मैने इन सबको बाहर कर दिया है चाहे कहीं जाकर काम करें मुझ पर गौर करो चाहे जिस पर दौड़ पड़ो जाओ| तब,  ईरा मैड़म ने कहा,"आप लोग अपने मुँह खोलो और साफ बोलो सच बोलो, कोई एक बोलो जो मुझे समझ आये| भीड़ ने जब चेहरों से रूमाल  हटाये तो मैड़म और मैं दंग रह गये। ये सब तो पढ़े- लिखे अच्छे घरों के बच्चे है|उनमें से एक बोला कि मैम हम सामान्य जाति के बेरोजगार हैं ना हम किसी स्वतंत्रता सेनानी कोटे में आते हैं,  और ना ही विकलांग,  ना हमारे पास रिश्वत हैं देने को और न ही नेताओं की जुगाड़ें |सरकारी नौकरी तो कोटे वालों को ही मिलती है आज। फिर,  जब हम प्राईवेट जॉब के लिये स्कूल कॉलेजों में गये तो दो तीन महीने लटका के पैसा देते हैं। फिर दिल्ली बैंग्लौर गये तो रूपैया छै हजार उसी में रहना - खाना,  आना जाना और अच्छे कपड़े ना हों तो लोग मजाक बनाते हैं और हम यूपी बीहार वालों के साथ अच्छा सलूक नहीं करते तो क्या करें मैम हम वापस घर लौट आये। घर आकर पता चला की माँ बीमार है और सरकारी अस्पताल का आलम यह है कि बस एक सी गोलियाँ चूरन की तरह सबको बाँट देते हैं ॥चाहे पेट दर्द  हो या मलेरिया ज्यादा परेशानी तो बोलते दिल्ली एम्स में जाओ और जब ऐम्स जाओ तो नेताओ की सिफारिश  हो। हम जैसे लोग को उनकी और उनकी रिपोर्टों की तगड़ी फीस वहाँ से भगा देती है। हालत यह है कि गाँव - कस्बों में झोलाझाप डॉक्टर और भगत,  झाड़ - फूँक,  मरीज की जॉन ले डालते हैं |आज दाल भी सौ रूपये के ऊपर है| मंहगाई और घर के इन हलातों को देखकर चुपचाप घर में बैठने से अच्छा है मुँह ढ़ककर लेवरी कर लें |हम में से कोई पुताई करता है तो कोई खिड़की लगाता है, कोई मिस्त्री है और ये कुछ लड़कियाँ हमारी दोस्त हैं जिनको उनके ससुराल वालों ने दहेज़  के कारण मार - पीट कर घर से निकाल दिया और यह अपने छोटे - छोटे मासूम बच्चों  का पेट भरने  के लिये मेहनत- मजदूरी कर हम सब पेट पाल रहें तो क्या गलत है मैड़म जी? मजदूर होना गलत है क्या?" ईरा मैड़म बोली कि इस दुनिया में हम सब मजदूर ही तो हैं | मुझे खुशी है कि तुम सभी ने मेहनत का रास्ता चुना|चलो मसाला कौन अच्छा बनाता है आज हम भी लगायेगें कुछ ईंटें!  और मैड़म को ईंटे लगाता देख में ये खबर कवरेज कर रहा था बाद में मैड़म ने कहा,"ये लो कुछ  नम्बर जो भी सिविल की तैयारी करना चाहता हो मैं मदद करूगीं और तुम लोग तैयारी भी करते रहना जो  भी परेशानी होगी वो अकेली तुम्हारी नहीं अब हमारी होगी और वहाँ खड़ी लड़कियों से कहा समय हो तो लाल बाग स्टेडियम में आना सब लोग अपने जिले की डी.एम को अपने बीच पाकर वहाँ बहुत खुश थे|जब हम गाड़ी में बैठे तो मैड़म बोली कि मुझे दुख है कि इस बेरोजगारी ने इतने पढ़े -  लिखे बच्चों को लेवर बना दिया|मैंने कहा,"बेरोजगारी ने भी और वोट के लालच इस कोटे ने भी मैंड़म जी| दूसरे दिन अखबार में ईरा मैडम छा गयीं थीं।  हर पेपर में उनका ही नाम था। फिर सुबह मेरे पास फोन आया कि ये बवाली डी एम तेरी रखै़ल है या मासूक तू उसे खुश करने का और कोई आडिया नेट से ढूँढ़  अखबार में हम नेता लोग की कोई ख़बर ही नही होतीआजकल। सुनने अगर तेरी इस डी.एम ने विधायक और मंत्री बनने का सपना देख रखा हो तो बता दे कि वो तो पूरा हम होने नहीं देगें और उससे कहो जितने भी ख्वाब देखने हैं ख्वाब में ही देखें।  आज से तूने अगर अपनी माशूका को पेपर में छापने की कोशिस की तो, तुझे तो मैं सोने नहीं दूँगा और तेरी उस बावाली को कभी जागने नहीं दूँगा। अब रख मोबलिया और बोल राम राम |मैने कहा,"राम राम तुम हो कौन?" वह बोला,"तुम जैसी भटकती आत्माओं के लिये में अघोरी हूँ!  अघोरी हा हा हा। सच बताऊँ तो उसकी आवाज में काफी  दहशत  थी मेरा तो पूरा शरीर काँप सा गया था| मैं तुरन्त डी.एम ऑफिस पहुँचा और ईरा जी को पूरी रिकार्डिंग सुना दी तो वो बड़ी शान्ती से बोली दोबारा फोन आये तो कहना मुझे कोई चुनाव नहीं लड़ना। कोई मंत्री नहीं बनना ।  मैं तो बस अपना फर्ज ईमानदारी से निभा रहीं हूँ बस और समाज से दहेज़  रूपी वायरस को जड़ से ख़त्म करना चाहतीं हूँ फिर वो लोग भी शान्त हो जायेंगें और तभी वो भाई आ गया जिसकी  बहन के शरीर में बेलचे आर - पार कर दिये गये थे। वह बोला मैडम हमने अभी तक अपनी बहन की लाश नही जलायी है| मैं,  मैड़म और उस लड़के को वहीं बात करता छोड़ वापस अपने ऑफिस लौट आया ॥तभी,  फिर फोन आया सुन पत्रकार कल रविवार है और अपनी मैडम से बोल कोई जनता जनार्दन को इकट्टठा करने की जरूरत नहीं है तभी मैं उसकी बात काटते हुऐ बोला कि मैडम कोई चुनाव नहीं लड़ेगीं। वो बस अपनी ड्यूटी कर रहीं हैं। यह सुनकर वो जोर से हंसा और बोला हर पागल यही कहता कि मैं पागल नहीं हूँ। कल अगर कोई सभा हुई तो समझ ले मुझे अघोरी कहते हैं काट मुबलिया,  बोल राम राम |मैंने कहा,"राम राम|"शाम को मैं ईरामैड़म के घर पहुँचा और फिर सीरियस बात की|इधर स्टेडियम में बेटियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये जा रहे थे पूरी  मीडिया कवरेज के लिये तैयार थी काफी मात्रा में पुलिस बल भी तैयार है|कुछ देर बाद मैड़म बोली,"पत्रकार जी यहाँ होने दो जो तैयारी हो रहीं है |हम और आप दिल्ली चलो वो भी राष्ट्रपति भवन लेकिन रात में भेष बदल कर ट्रेन से |पहले तो मुझे भी यह समझ नही आया कि राष्ट्रपतिभवन क्यों?पर मैड़म की योग्यता पर सवाल कैसा। हमने रात ये खबर उड़ा दी कि मैड़म बीमार हैं वो दिल्ली ऐम्स में हैं। अब भाषण वहीं होगा| बस फिर क्या था हम दिल्ली पहुँच गये| मैड़म को चाहने वाले सभी दिल्ली पहुँचने लगे और सुबह ऐम्स पर भारी भीड़ पहुँचने लगी। ये देख हमने बाहर जाकर बोला कि मैड़म तो राष्ट्रपतिभवन गयीं हैं और वहीं धरने पर बैठ गयीं हैं |अब वहीं बात करेगीं आप सभी से|उस दिन अरे!भीड़ वो थी कि किसी भी नेता अभिनेता के लिये ऐसी भीड़ नहीं होती इतनी गजब की भीड़ ये मान लो कि एक लड़की और इसके सभी रिश्तेदार तो जिलेभर की क्या देश भर की हर दहेज़  पीड़ित लड़की और उसके शादी में शरीख़ होने वाले सभी सम्बंधी लाखों से भी ज्यादा बेटियों और उनके परिवार की वो भीड़ जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया | हम लोगों ने वहीं मंच बना दिया था और मंच को उखाड़ने के लिये पुलिस आ गयी और लाठियाँ मारने लगी गुस्साई भीड़ ने पुलिसवालों को पीटना शुरू कर दिया बवाल और बढ़ जाता कि ईरा मैड़म वहाँ आ गयीं और बोली रूक जाओ तो भीड़ से एक लड़की बोली,"सबसे बड़ी गद्दार ये पुलिस ही है बस हराम का मिले इन्हें खाने को... मैड़म ने कहा,"क्या नाम है आपका ?"वह लड़की बोली,"सबीना बानो|"मैड़म ने कहा,"शान्त हो जाओ|"फिर बोली पुलिस वालों की तरफ देख कर," आप लोग पुलिस वालें हैं अगर आप लोग की भी बहन बेटी की आँखों में आँसू हैं तो रूक जाओ और हमारा साथ दो| मैड़म की बात और आँखों के सामने कोई टिक नहीं सकता था बस पुलिस वाले शान्ती से खड़े हो गये| फिर मैड़म मंच पर पहुँची तो तालियाँ बज उठीं वो तालियाँ जिसने देश के दोनों सदनो में बैठे मंत्रियों की हालत बिगाड़ दी थी| मैडम मंच से बोलीं मेरे देश की बेटियों तुम्हारा स्वागत है और धन्यवाद है|मुझे इतनी भीड़ देख बहुत दु:ख है कि मेरी इतनी सारी बहने आज दहेज़ से पीड़ित है। दहेज समाज का कैंसर हैं| एक ऐसा वायरस जिसने आपसी प्रेम को खोखला कर दिया है|आप सभी लोग बेटी की शादी में दावत उड़ाने शौक से सपरिवार जाते हो|हजार लोगों की उपस्थिति में एक शादी सम्पन्न होती है आप सब लोग जाते हो शादी में तो फिर उस दिन क्यों  नहीं जाते जब आपकी ही रिश्तेदार बहन बेटी को जलाया जाता है।  पीटा जाता है और  उसके जज्बातों का बलात्कार किया जाता है और पेट में से लोहे के बेलचे आर - पार कर दिये जाते हैं तब वो पंड़ित जी कहाँ होते हैं? क्या उनका दायित्व शादी की दक्षिणा मात्र है?  तब कहाँ चला जाता है आपका धर्म?  अगर आप हजारों लोग पीड़ित बेटी के साथ खड़े हो जाओ तो किसी की हिम्मत नहीं कि देश की किसी भी बेटी के आँख में आँसू आ जाये और एक बात कि बेटी के आँसुओं को मसल कर उसको कहते हो दुख सहो हम कोर्ट जायेंगें तो बदनामी होगी आप ये बताओ क्या आपके बच्चों के जीवन से बड़ी है आपकी इज्जत। अरे!इज्जत तो तब हो कि जब आप गलत के खिलाफ़ आवाज उठायें। आप प्लीज अपनी बच्चियों को मत दबायें  बल्कि उनको हिम्मती बनायें। उनको प्रेम करें |हम सुप्रीम कोर्ट के  माननीय चीफ जस्सटिस जी से यही प्रार्थना करतीं हूँ कि आज हर काम ऑनलाईन है तो न्याय में देरी क्यों? बेटियों से जुड़ा कोई भी मुकदमा एकसाल से ज्यादा ना चले और मीड़िया से भी कहूँगीं कि खबर छापें उसको चाट जैसा चेस्टी बनाने का कार्य न करें|और सबसे बड़ी बात की आप लोग पुलिस महकमे के लिये अपनी मानसिकता बदलिये|आपको पता होगा कि पुलिस कान्स्टेबल की तनख्वाय सबसे कम  और ड्यूटी सबसे सख्त होती है। जब सर्दी में आप रजाई में होते हैं तब ये मुफलर बाँधे कोहरे में आपकी सुरक्षा कर रहे होते हैं। आपकी गली में सड़क पर गस्त लगा रहे होते हैं |ये कोई भी त्योहार अपनी फेमली के साथ नहीं मना पाते और आसानी से इनको छुट्टी भी नशीब नहीं होती इनके जीवन का हर पल वर्दी में कसे-कसे और परिवार की याद में घुट कर बीत जाता है कई बार तो ड्यूटी और परिवारी  उलझनों के कारण हमारे कान्स्टेबल आत्महत्या तक कर लेते हैं|बस कुछ मुट्ठी भर लोग के कारण हर पुलिसवाले को गलत मत बोलो आप प्लीज और पुलिस वालों से भी कहूँगी कि रिपोर्ट लिखने में कोई इफ और बट नहीं किया करो प्लीज। आप समाज के और समाज आपका है और हम सबको मिलकर अपने समाज को खूबसूरत और सुगंधित बनाना है| यह सुनकर हर पुलिसवाले की आँख भर आई थी|फिर डी.एम ईरा सिंघल ने कहा,"आओ आज शपथ  लो प्रण लो कि जिस बेटी की शादी में दावत खाने जाओगे आशीर्वाद देने जाओगे तो उसके बुरे वक्त में उसका साथ देने भी जाओगे|सात वचन तो दूल्हा- दुल्हन के और आँठवा वचन आप सभी ले लो आज और अब उठाओ हाँथ बोलो '' सत्य की जीत हो दहेज़ का अंत हो। '' पूरी भीड़ एक स्वर में जब बोली तो मानो पूरा राष्ट्रपतिभवन हिल गया हो तभी उत्साही मीडिया की भीड़ मंच पर चढ़ गयी और  मैड़म से सवाल कर दिये कि आप राष्ट्रपति जी से क्या चाहतीं हैं? मैड़म बोली," न्याय,इस भाई को जिसकी बहन के साथ उसके अपनो ने कुकर्म किया और बेलचों से शरीर लहुलुहान कर दिया जब से  बहन की ससुराल पहुँचा तो बहन का ससुर बोला हाँ मैंने किया बोल क्या कर लेगा तो इस दुखी भाई ने उसको मार दिया तो क्या गलत किया ? जब श्री राम रावण को मारे तो भगवान,  जब श्री कृष्ण कंस को मारे तो भगवान  अगर इस भाई श्याम ने आज के रावण को मारा तो वो दोषी कैसे?राष्ट्रपति जी इस भाई की सजा माँफ करें और देश की इतनी दुखी बेटियों को नौकरी का आश्वाशन दें वरना हम यहीं रहेंगें। अब ससुराल वालों ने निकाल दिया मायके वालों ने दान कर दिया है तो बोलो अब कहाँ जायेंगें? मीडिया वाले बोले,"और क्या मांग है आपकी?" तो,  मैड़म बोली,"जिस तरह गली-गली में प्राईवेट मान्यता प्राप्त विद्यालय खुले हैं चाहती हूँ उसी तरह जगह-जगह प्राईवेट मान्यता प्राप्त  पुलिस थाने हों।  और सरकार दहेज़ पीड़ित बेटियों के लिये एक फूड फेक्टरी या कोई कम्पनी खोलें। जहाँ इन बेटियों को रोजगार मिले |इनकी सुरक्षा हेतु सभी थाने ऑनलाईन हों।  चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगायें जायें बस इतना ही चाहतीं हूँ फिर मैड़म मंच से नीचे उतरी कि महिलाओं की उस भीड़ ने मैड़म को गोद में उठा लिया|इधर मेरे पास मैसैज आया कि लालबाग स्टेडियम में दो ब्लाष्ट हुऐ हैं|यह बात सुनकर राष्ट्रपति भवन के सारे प्रसारण रोक दिये गये और पूरी मीडिया मैं यह खबर भी फैल गयी कि मैड़म गायब है इस हड़बड़ी में और सरकार के सख्त रवैये के कारण सब मीडिया  को वहाँ से जल्द हटना पड़ा था फिर मैने चारों तरफ मैड़म को देखा पर वो मुझे कहीं नहीं दिखीं। पता नहीं कहाँ उस भीड़ में गुम हो गयी।  मैंने सोचा कि अभी मैंने कुछ बोला तो भीड़ में भगदड़ मच सकती है कि मैड़म का अपहरण हो गया|दूसरे दिन कुछ ढ़ोंगी लोगों ने उनको देवी बना दिया की वो दैवीयशक्ति थीं और काम करके अद्रश्य हो गयीं पर मझे रोना आ गया कि मैड़म किस हाल में होगीं और हमने बहुत ढूँढ़ा  पर उनका कोई पता नहीं चला और आज तक पता नहीं चला पाया हूँ मैं नाकाम हूँ मैं और मेरा जीवन कहकर रो पड़े फिर चेहरा पोछते हुऐ बोले कि उस दिन पूरी दिल्ली में भीड़ के कारण पूरा यातायात बस ट्रेन सब का बुरा हाल था इतनी  मीड़िया और पुलिस थी की राष्ट्रपतिभवन पूरा छावनी में तबदील हो चुका था बात भी इतनी गम्भीर मसले की थी कि पूरे देश का मैड़म को समर्थन मिल चुका था | पूरा देश पुलिस, वकील,डॉक्टर, इंजिनियर, मजदूर हर कोई मैड़म के साथ खड़ा था| फिर,  महीनों बाद जब कुछ लोगों ने जंतर-मंतर पर अनसन किया तो देश के राष्ट्रपति दीप रिट्स जी ने कहा कि अगर उनका अपहरण हुआ है तो दोषी को कड़ा दण्ड मिलेगा और डी.एम ईरा जी की बातों पर हम गम्भीरता विचार करेंगें |बस विचार!और आज पाँच साल| इतना कह कर पत्रकार जी तो खामोश हो गये पर मैं गौरी अपने आँसुओं को रोक न सकी और फिर हम दोनों ही रो पड़े|अब मन हल्का करने के लिये  में किचिन में गयी और दो मग कॉफी बना लायी|अब हम दोने कॉफी पीने लगे तो मैंने पूछा कि यअपने राष्ट्रपति जी का नाम दीप रिट्स इस नाम का मतलब है क्या है आखिर?तो पत्रकार जी बोले कि अपने राष्ट्रपति जी का पूरा नाम तो राजदीप रिट्स है इस रिट्स में उनकी पूरी फेमली है सुनो! 'र'  से उनका और उनके भाई का नाम, 'ई'  से उनके पिता का नाम, 'ट'  से उनकी बहन का नाम,'स'  से उनकी माँ का नाम है| ये है उनका फेमली लव| यह सुन कर गौरी ने कहा,"वाह!ग्रेट|"अब आप आराम करिये रात बहुत हो चुकी है| पत्रकार जी बोले कि अब नींद कहाँ आप आराम कीजिये जाकर|गौरी ने कहा,"वो जोअघोरी आपको धमकाता था कुछ पता किया कौन था?"पत्रकार जी बोले,"वो कोई नेता था नाम भी पता किया पर याद नहीं आ रहा और मेरा मोबाईल कहाँ गया मुझे याद तक नहीं मैंने ईरा मैज़म के नाम पर  कुथ पाखण्डी को पैसे कमाते देख मैं पागल सा हो गया था और श्मशान  में जाकर ही मुझे कुछ शान्ती मिली पर सुकून.....सुकून तो ईरा जी थीं जो ना जाने कहाँ गयीं |उनको ढूँढ़ने  में मैं इतनी बार मरा हूँ कि मौत भी मुझे छोड़ जाती है मरा समझ कर|यह बात सुन मैं समझ गयी कि ये ईरा मैडम को बहुत चाहते हैं अब जब सब सामने है तोक्या पूछँ |प्रेम बहुत महान है इस दुनिया में भगवान इनको इनके प्यार से जल्द मिला दे| सुबह के तीन बज चुके थे|हमने कहा,"मैंने उनकी लास्ट वीडियो देखा जब कुछ लड़कियों ने उनको गोद में उठाया उनमें से पता चला है एक लड़की जिसका नाम मधूलिका उर्फ रेड वियर है जो बहुत बड़ी कोकीन तस्कर और हाई प्रोफाईल कॉल गर्ल है जिसकी एक घण्टे की कीमत  एक लाख रूपये है जो पेपनाह खूबसूरत है। वो उस दिन चेहरे को सांवला  करने वाला मेकअप किये थी। मैंने सब पता कर लिया है और पूरी तैयारी भी |अब आप थोड़ा आराम करो और मैं भी चलती हूँ और तभी गौरी का फोन बजा गौरी ने फोन उठाया कि पाँच हजार भेज कल| गौरी ने कहा,"ठीक है|"और चुपचाप  अपने बिस्तर पर जाकर फूट के रो पड़ी और फिर सो गयी| दूसरे दिन इंस्पेक्टर सावन ने दो हाईप्रोफाईल लड़कों को कोकीन के साथ धर दबोचा जिसने रेड वियर कोकीन की रानी का नाम लिया फिर क्या था रेड वियर लड़की के ठिकानों पर झापामारी शुरू हुई |दो घण्टे बाद इंस्पेक्टर सावन के पास कॉल आयी पाहल हो गया है क्या रेड वियर को भूल जा और अपनी कीमत बोल जल्दी ये सब भूलने की समझा बस फिर क्या था पता चलाया गया कि किसका नम्बर है और आया कहाँ से बस धर दबोचा जाकर उस रेड वियर के हितेसी विधायक जशवीरमणि को फिर थाने में बिठा कर उनसे कहा गया देख! विधायक,  रेड वियर को बुला कैसे भी और कहीं भी, कुछ भी करके किसी भी होटल में जल्दी वरना मार सह नहीं पाओगे सोच लो|




To be continue...........
स्वहस्तलिखित रचना
ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका जीवित और मृत से कोई संजोग नहीं है|ये कहानी समाज की सबसे बड़ी कुप्रथा दहेज़  के ऊपर आधारित है|इस कहानी का उद्देश्य समाज से इस कुप्रथा का अंत करना है। 
ब्लॉगर 
आकाक्षा सक्सेना
जिला-औरैया
उत्तर प्रदेश



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