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इंटरव्यू : एक विचित्र पहल साधक

मैं अंत्येष्टि स्थलों का भय मिटाना चाहता हूँ। _संस्थापक आनंद नाथ गुप्ता, एडवोकेट 

फाईल फोटो : संस्थापक आनंद नाथ गुप्ता, एडवोकेट जी और लक्ष्मी गुप्ता(विश्नोई)जी(अध्यक्ष महिला तुलसी शाखा) 



कल तक संसार जिस शरीर पर गर्व कर रहा था, आज मेरा वही तन, मेरे ही विरोधियों के पास बराबरी से जल रहा है। ऐसा लगता है मानो! मेरे असिद्ध संकल्पों के क्रंदन और अहं के अट्टहास, वासनाओं की मञ्जरियों की विरह व्यंजना,अंतरिक्ष चीरती महत्वाकांक्षाएं सब धूँ-धूँ करके राख होने को उन्मुक्त हुईं जाती हैं। आज मैं अलिप्त सा खुद को देख रहा हूँ।मौहरूप शतक शर्द ऋतु से पीछा छूट रहा है।मैं आज रातभर यहीं रहना चाह रहा हूँ, जहां जीवन में कभी नहीं आने का घोर पाप किया।शाम हो रही है दु:खी लोग अंधेरे में गिरते-पड़ते घरों को लौट रहे हैं, महिलाएं छिपते,सकुचातीं नहा कर लौट रही हैं,कुछ कह रहे कि तैंहरवीं में पनीर बन रहा या मट्ठा आलू? कुछ मोबाइल से फोटो खिंचवाने में लगे हैं,अब गहरी यायावरी उतरने लगी है कुछ साधक शवों में खोपड़ियां खोज रहें हैं, शायद सिद्धि विधान कुछ करते होगें। कुछ गरीब उन्हीं शवों की लकड़ियां जलाकर ताप रहे हैं और कुछ छिपा कर लकड़ियां घरों को ले जा रहे हैं कि दो दिन चूल्हें के लिए ठिकाना हो जाये। हाय! रे गरीबी। आज मैं समझा कि लोगों की मदद करना अपरिहार्य और अत्याज्य धर्म कर्म है। 
काश! मैं अपने धन से इन लोगों की मदद कर पाता? सोचते हुए सुबह हो चुकी थी पर मैं स्थूल शरीरविहीन, अनेकों अधजले शरीरों को हर तरफ़ पड़े देख रहा हूँ। चारों तरफ़ अजीब दुर्गंध राख-ही-राख है,कुछ अधजली लकड़ियों और गंदगी का अम्बार है। हे! राम सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ऐसी जगह पर कैसे रहे होगें? आज महसूस कर रहा हूं। काश! मैं जिंदा होता तो इस स्थान के लिए कुछ करता। हे! सर्वशक्तिमान यदि आप मुझे सुन पा रहे हैं तो किसी महान व्यक्तित्व के मन में ऐसी प्रेरणा कर दो जो इन अंत्येष्टि स्थलों को भी अपने हृदय से लगाकर इसकी सेवा कर सके, कायाकल्प कर सके।तभी जोरदार बिजली कड़की और एक स्वरनाद हुआ, ''तथास्तु।'' अब यह किसे पता था कि भगवान यह प्रेरणा हमारे औरैया जिले के जनप्रिय जनसेवक, महान पुण्यात्मा दिव्य शख्सियत श्री आनंद नाथ गुप्ता, एडवोकेट जी के अंत:करण में करेगें। तो आइये! आपको शब्दों द्वारा रू-ब-रू करवातें हैं, उसी जनसेवक, साधक से जिसकी सुकर्मों की सुकीर्ति से आज देश - दुनिया आलौकिक हो रही है।


आइये! आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं औरैया जिले के महान समाजसेवी साधकों से-


(1)-आपका और आपकी सोसाइटी का क्या नाम है? 

मेरा नाम है डॉ. आनंद नाथ गुप्ता, एडवोकेट,(संस्थापक विचित्र पहल) 
और मेरा नाम है लक्ष्मी गुप्ता विश्नोई, (अध्यक्ष महिला तुलसी शाखा)। 
हमारी समिति का पूरा नाम है, '' एक विचित्र पहल सेवा समिति'' ।

(2)- आखिर! विचित्र पहल नाम ही क्यों रखा?आप लोग कौन सा विचित्र कार्य करते हैं? 

हमारी समिति को सुचारू रूप से चलते हुए पूरे 30 वर्ष बीत चुके हैं और तब से लेकर आज तक ईश्वर की कृपा और सभी के सहयोग से यहां विचित्र कार्य होते रहे हैं जिसमें सबसे ज्यादा चर्चित अंत्येष्टि स्थलों की स्वच्छता अभियान रहा है जिसमें समिति के पुरूषों और महिलाओं ने मन से भय और भ्रम निकालकर उस भयावह कहे जाने वाले मरघट /श्मशान की स्वच्छता और कायाकल्प का जिम्मा कहें या बीड़ा हमने उठाया हुआ है। मेरा संकल्प है कि मैं देश-दुनिया से अंत्येष्टि स्थलों का भय मिटा देना चाहता हूँ। 
 
 (3)- ये मरघट /श्मशान की सफाई करने का विचार आपको कैसे आया? 

ये तो परमात्मा की प्रेरणा हुई कि एक बार हम किसी की अंत्येष्टि में गये हुए थे तो हमने सोचा कि यह सत्य का स्थल है क्यों न यहां भी स्वच्छता रखी जाये बस फिर हम संकल्पबद्ध होकर जुट गये फिर धीरे-धीरे लोग जुड़ते गये कांरवा बनता गया, मैं मेरे समस्त सहयोगियों का हृदय से आभारी हूं। 

(4)-आपके संगठन में कितनी महिलाएं जुड़ी हैं? 

संख्या क्या बतायें, यह मान लीजिये कि जिले कि अधिकतर सभी महिलाएं हमारे संगठन की पारिवारिक सदस्य ही हैं और आज यह संगठन विशाल पीपल का वृक्ष बन चुका है जिसकी एक शाखा हमारी तुलसी शाखा है। 

(5)-आपकी संस्था ने प्रमुख पांच कार्य कौन से किये हैं? 

1- अंत्येष्टि स्थलों की साफ-सफाई जिसमें अभी तक 130 वें चरण का सफाई अभियान सफलतापूर्वक चलाया जा चुका है। इसमें जहां पर शव दहन के बाद जब कई अधजले क्षतिग्रस्त शवभाग, हम लोग(पुरूष-महिला टोली)पहुंचकर उसे बटौरकर पुन:दाह क्रिया करते हैं, जिससे इस स्थान की स्वच्छता सुचारू रूप से बनी रहे। और हाल ही मैं हमने अंत्येष्टि स्थलों पर सोलर लाइट लगवाकर उस सत्य स्थल को रोशन किया है, हमने महसूस किया था कि दूर गांवों से लोग अपने परिवारजनों आदि का अंतिम संस्कार कर जब घरों को लौटते हैं तब तक काफी शाम हो चुकी होती है और सर्दियों में तो अंधेरा ही हो जाया करता है, इसलिए जनहित में हमने यह सुविधा करवायी है। अब आगें कि हमारी यह योजना है कि अंत्येष्टि स्थलों पर एक बरामदें का निर्माण करवायें जो इज़्ज़त घर की तरह मर्यादित हो जहां हमारी मातायें-बहनें जब यहां पहुंचतीं हैं तो उन्हें यहां खुले में स्नान न करना पड़े। 
 
2- यमुना नदी की स्वच्छता अभियान जिसमें हमने विगत वर्षों से लगातार इसे क्रियान्वित किया हुआ है और वर्षों से टनों कचड़ा निकाल कर माता यमुना को स्वच्छ रखने की प्रतिज्ञा ले रखी है। 

3- हमने हमारे मां यमुना में बह कर आयी हुई बड़ी दुर्लभ प्राचीन देवी प्रतिभा की प्राण प्रतिष्ठा करके उसे सुव्यवस्थित रूप से मंदिर में स्थापित किया है। इस संदेश के साथ कि हमारी सनातन धरोहर को संरक्षित करके हम हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने की भी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वहन करें। 

 4-हमने कोरोना जैसे कठिन समय में अंत्येष्टि स्थलों पर शवों को लाने ले जाने के लिए वर्फ सिक्योर/डीप फ्रीजर शव यात्रा वाहन लगाकर शवों को पूरे रीति-रिवाज के साथ उन सबकी अंत्येष्टि करवायी जिनके पास कोई खड़े होने तक को तैयार नहीं था। हमने इस कोविड दौर में अनेकों जरूरतमंदों इंसानों ही नहीं जीव-जंतुओं तक को विभिन्न साधनों से जितनी मदद हो सकी करने का प्रयास किया। 

5- जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, ब्रिच/चौराहों के पास प्याऊ अभियान और गरीब बेटियों की शादियां आदि के लिए हम वर्तमान में जितना हो सकता है पूरे मनोयोग से कार्य कर रहे हैं क्योंकि जल और पर्यावरण हमारे जीवन की रीढ़ है। 
 
(6)आपकी जिलाधिकारी और भारत सरकार से क्या मांग है? 

हमारी जिलाधिकारी और भारत सरकार से विनम्र प्रार्थना है कि जिस तरह से लगभग हर दिन अंत्येष्टि स्थलों पर शव जलते हैं उससे एक बहुत बड़ी संख्या में लकड़ी का दहन होता है पर उसके एवज़ में उतने बृक्ष नहीं लग पाते और लग भी जायें तो सब बृक्ष में कुछ ही बड़े हो पाते हैं जिन्हें जंगली जीव नष्ट-भ्रष्ट कर देते हैं।एक आंकड़े के अनुसार एक अंत्येष्टि में लगभग 2 कुंतल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, इस प्रकार एक ही स्थान पर केवल एक ही दिन में 10 अंत्येष्टियों में लगभग 20 कुंतल लकड़ी का उपयोग होता है, पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत विद्युत शवदाह गृह की स्थापना होने पर प्रतिदिन 20 कुंतल लकड़ी का उपयोग बचाया जा सकता है, अब आप पूरे देश का आंकड़ा विचार सकते हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में हमारी मांग है कि पूरे भारत के हर जिले में इलेक्ट्रॉनिक शवदाह ग्रह बनने और क्रियान्वित होने चाहिये। फिलहाल जिले औरैया में शुरू करवा दीजिएगा। दूसरा यह कि यमुना मैया के हम सब सेवादार यही मांग करते हैं कि यमुना मैया की भी स्वच्छता पर सरकारें ध्यान दें और उनमें गिरने वाले गंदे नाले व अपशिष्ट पदार्थो तथा यमुना की रेत को भी माफियाओं द्वारा कई जगह गड्ढे करना और उनमें मवेशियों के गिर कर असमय मर जाने की असहनीय घटनाओं पर सरकारें अपने उचित प्रबंधन द्वारा रोकने की कृपा करें।
 
(7)-इस विश्व महिला दिवस पर आप उन दादी बाबा को क्या कहना चाहेगीं जिनको सिर्फ़ नाती /पोते की ही चाह होती है? 

मैं लक्ष्मी गुप्ता स्पष्ट शब्दों में यही कहूंगी कि बेटी ही नहीं होगी तो पोते की कल्पना कैसे हो सकती है। मैं खुद एक बेटी हूँ और मेरी भी दो बेटियाँ हैं और उस दौर में मुझे भी कहा गया था कि एक बेटा तो होना ही चाहिए पर मैनें मेरी आत्मा की आवाज़ सुनी और दोनो बेटियों को पढ़ा-लिखा कर काबिल बनाया जिसमें एक की शादी हो चुकी है और दूसरी रूड़की में पीचडी कर रही है। मुझे मेरी दोनों बेटियों पर गर्व है। 
 
(8)-लक्ष्मी गुप्ता जी आपको आपके सास - ससुर और पति का कितना सहयोग मिला? 

मुझे मेरे पूरे परिवार का खूब सहयोग मिला तभी तो मैं, ''एक विचित्र पहल'' समिति में अपने बड़े भाई/ संस्थापक /अध्यक्ष आदरणीय आनंद नाथ गुप्ता, एडवोकेट जी और समिति के सभी भाई-बहनों के साथ पूर्ण मुखरता से खुशी-खुशी समाजिक कार्य कर पा रही हूं। 

(9)- आजकल समाज में सबसे बड़ी समस्या है दहेज़ ? इसका क्या समाधान होना चाहिए? 

मैं तो साफ कहता हूँ कि दहेज़ लेना और देना कड़ा अपराध घोषित हो ताकि हमारी बच्चियों का जीवन सिक्योर हो सके और हमारा समाज इन चीजों से ऊपर उठकर मानवीय कार्य कर सकें। हमें उस परमात्मा ने किसी विशेष कार्य हेतु भेजा है और हम यहां दहेज़ के नाम पर बेटे - बेटियों को प्रताड़ित कर रहे हैं। समय आ गया है कि हमें सभी प्रकार के रूढ़िवाद को खत्म कर इंसान बनकर सोचना होगा, जीना होगा वरना जिस घर में बच्चे-बच्चियां कचहरी की चौखट पर जायेगें तो समझ लो कि समाज किस ओर जायेगा। 
 
 
(10)-लक्ष्मी गुप्ता जी विश्व महिला दिवस पर देश की बेटियों को आप क्या कहना चाहेगीं? 

मैं यही कहूंगी कि हे! मेरे देश की बेटियों तुम खूब पढ़ो-लिखो और कभी किसी के आश्रित मत रहो। कामयाब बनो और जो लड़का दहेज़ मांगे उससे तुम शादी ही मत करो। बेटियों का मन करता है उनको सरकारी नौकरी वाला ही मिले और बेटों को लगता है कि सुन्दर, सुशील के साथ कार और दहेज़ भी मिले, अतैव दोनों को अपना लालच त्यागना होगा। क्योंकि बहू कोई वस्तु नहीं होती उसमें भी जान होती है वह भी इंसान है और पति भी एटीएम मशीन नहीं है कि हर रोज वो आपको शोपिंग कराये। दोनों तरफ़ से जब वैचारिक सामंजस्य होगा तभी समाज में समरसता आयेगी। तो बेटियों शुरूआत तुमसे ही हो, पाप के सामने मत झुको अपने हक के लिए जरूर लड़ो। 
  
(11)- आपको औरैया के बेहतरीन डीएम आदरणीय सुनील कुमार वर्मा जी ने 'औरैया रत्न' से सम्मानित किया है। डीएम सर के बारे में कुछ कहना चाहेगीं? 
 
मैं सौभाग्यशाली हूँ कि ''एक विचित्र पहल सेवा समिति'' को जिलाधिकारी महोदय ने औरैया रत्न से नवाज़ा, इस योग्य समझा। आगें यही  कहूंगा कि औरैया के लोग सचमुच सौभाग्यशाली हैं कि उनको इतना जिंदादिल, कर्मठ और जुझारू और कर्तव्यपरायण, बुराई के प्रति कठोर और अच्छाई के प्रति करूण हृदय व्यक्तित्व मिला है जिन्होंने कोरोना काल में जनपद में किसी भी तरह की दु:खदायी परिस्थिति नही पनपने दी जहां अन्य जिलों में ऑक्सीजन की कमी थी वहीं औरैया में न ऑक्सीजन की कमी थी और न ही बैड की और तो और डीएम जी ने अपनी मासूम सी बच्ची का जन्मदिन फाईव स्टार होटल में न मना कर जिले औरैया के वृद्धाश्रम में मनाते हैं और हाल ही में उन्होंने अपने ससुर जी कि भी पुण्यतिथि जिले के वृद्धाश्रम में सभी बुजुर्गों को भोजन खिलाकर उनके आशीर्वाद लेकर सम्पन्न की। सचमुच डीएम सुनील कुमार वर्मा जी को जनपद औरैया के वासी कभी भी भूल नहीं सकेगें। 

(12) रूस और यूक्रेन युद्ध पर आप दोनों की क्या राय है? 

मैं लक्ष्मी गुप्ता यही कहूंगी कि युद्ध तो दो देशों के प्रमुखों की आकाश चीरती महत्वाकांक्षा के फलस्वरूप घटित हो रहा है पर मर तो रही है बेचारी जनता। 
मैं आनंद नाथ गुप्ता, एडवोकेट यही कहूंगा कि इस युद्ध में जनता के ही तो टेक्स का पैसा बर्बाद हो रहा है। यह सब बाहरी देश खुद को मानवता के नाम पर अंतरराष्ट्रीय मंचों से ज्ञान बांटते हैं पर आज सबसे ज्यादा अमानवीय कार्यों को अंजाम देने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ये दोनों ही देश अपनी-अपनी जनता के आसुँओं के दोषी हैं और इतिहास इन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा। 
 
विनम्र अपील - मैं आकांक्षा सक्सेना, न्यूज ऐडीटर सच की दस्तक राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, वाराणसी से अपने महान भारतवर्ष के राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी, प्रधानमंत्री मोदी जी और उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आ. योगी जी से विनम्र अपील करतीं हूँ कि देश के अद्भुद, अकल्पनीय, महान कार्यं करने वाली निष्पक्ष समिति, ''एक विचित्र पहल सेवा समिति, औरैया को उसके जमीनी स्तर पर किये गये लोककल्याणकारी कार्यों के लिए अपने आशीर्वादतुल्य पद्मश्री और भारत रत्न जैसे गौरवशाली सम्मान प्रदान करते हुए अच्छाई को पुष्पित और पल्लवित होने की राष्ट्रीय परम्परा को जीवंत रखने का प्रयास जारी रखते हुये इन सामाजिक साधकों का उत्साहवर्धन यथोचित् सम्मान बनाये रखने की कृपा करें। धन्यवाद। 

यथार्थ यही है कि समाजसेवा कोई  ऑटोमैटिक प्रक्रिया नहीं है। इसके लिये जीवन लगाना पड़ता है। यह एक साधना है और 'एक विचित्र पहल सेवा  समिति' के सभी सदस्यगण महान साधक हैं तो बनिए! एक सफल साधक और करते रहिये अच्छे कार्य। जय हिंद वंदेमातरम् 








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एक विचित्र पहल सेवा समिति रजि. औरैया के इंटरव्यू वाली मैग्जीन का हुआ भव्य लोकार्पण 
सभी ने विचित्र पहल के संस्थापक श्री आनंद नाथ गुप्ता जी के कार्यों को बहुत सराहा गया। 


कैबिनेट मंत्री (भारी उद्योग मंत्री) व चन्दौली के सांसद डॉ महेंद्र नाथ पांडेय जी के हाथ में इंटरव्यू वाली पत्रिका सौंपी गयी। 
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सच की दस्तक के कार्यक्रम में भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री (भारी उद्योग मंत्री) व चन्दौली के सांसद डॉ महेंद्र नाथ पांडेय जी और कार्यक्रम में विधायक रमेश जायसवाल,पूर्व विधायक बब्बन सिंह चौहान,जिलाध्यक्ष भाजपा अभिमन्यु सिंह,नगर अध्यक्ष भाजपा आलोक वरुण, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष भारतीय किसान मोर्चा राणा प्रताप सिंह वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल गुप्ता गुड्डू,राजीव रंजन सिंह चहल,भाजपा मीडिया प्रभारीअंशुआदि मौजूद थे।







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