- समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Friday, November 30, 2012







          समाज आज कल 
               (साड़ी )
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समाज के कुछ लोगों की आधुनिक सोच देखो ये क्या 

आधुनिक समय का प्रभाव है आप बतायेगा ...


सास -  बहु ये लो साड़ी, में बनारस गई थी बेटा वहीं से 

तेरे लिए लाई हूँ। देख रंग तो ठीक है ना ।

बहु  - वो सब बाद में कितने रूपये की है ।

सास - तुझे पसंद है ना,बेटा 

 बहु (कुछ सोचते हुए) - अरे ! होगी 200 रुपये की तभी 

नही बता रही । सासु माँ मैं अभी आती हूँ और एक साड़ी
 
उठा ले आई देखो माँ जी कल मेरी मम्मी ने भिजवाई है

पूरे 2000 रुपये की है,कैसी लगी ।

सास मुस्कुराई -  अच्छी है बेटा 
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अब  सवाल ये उठता की सासू माँ मुस्कुराईं ?

।। क्लेश बचाना है तो मुस्कुराना पड़ता है ||

              समय की मांग है 


  आकांक्षा सक्सेना बाबरपुर,औरैया उत्तर प्रदेश 


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