दरबाजे और चौखट का प्रेम - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Monday, June 22, 2015

दरबाजे और चौखट का प्रेम


हाँ मैं दरबाजा हूँ मुझे अपने दरबाजा होने पर गर्व है उससे भी ज्यादा मुझे अपनी चौख़ट पर गर्व है जो मेरा वज़ूद है|

हाँ मैं चौखट हूँ बिना दरबाजे के मेरा भी कोई अर्थ नहीं..











No comments:

Post a Comment