धोखा.....ही है ये ज़िंदगी..... - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Wednesday, July 29, 2015

धोखा.....ही है ये ज़िंदगी.....










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