रोमांटिक प्रेम गीत....... - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Monday, November 7, 2016

रोमांटिक प्रेम गीत.......



भीगा प्रेम गीत

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होठों से दस्तक
आँखों से शरारत
मंहगी न पड़ जाये
हाय! ये तेरी नजाकत
इश्क है माया है, इश्क है साया, 
इश्क नशा है, इश्क हवा है, 
सबको ये खुमार चढ़ा है

इश्क है तू मेरा इश्क है तू
तू ही जुनू और तू ही सुकूँ
भीगा बदन ये तेरा
उफ! ये शरसराहट
मंहगी न पड़ जाये
हाय! तुझे मेरी शराफत
इश्क वफा है इश्क सजा है 
सबको ये हासिल न हुआ है
इश्क में फैल तू इश्क में पास है
यहाँ डिग्री नहीं, चलते जज्बात हैं

इश्क है तू मेरा इश्क है तू
दिल भी तू मेरी रूह भी तू
प्यार से छूना तेरा
ये कातिल मुस्कुराहट
मंहगी न पड़ जाये
हाय! ये रात और ये हालत
इश्क भी तू है इश्क भी हम हैं 
जिंदगी में अब नहीं कोई गम है
जी लेते हैं आज इश्क को, 
कल की मेरी जॉन किसको खबर है
  
इश्क है तू मेरा इश्क है तू
तू भी मैं और में भी तू
इश्क है तू मेरा इश्क है तू.........




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Written by
Blogger Akanksha Saxons

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