एक घटना ...बुजुर्गों के सम्मान को समर्पित




नमस्कार दोस्तों
एक पुरानी घटना आप के बीच रख रही हूँ.....

एक घटना सुनाती हूँ आपको|उस दिन हमारा कानपुर में टीजीटी का टेस्ट था तो बसों में भारी भीड़ थी | हम ऐसी भरी एक बस में चढ़े क्योंकि सभी बहुत ज्यादा भरीं आ रहीं थीं|
    बस में बहुत लोग खड़े थे सीट सब भरीं थी | हम भी खड़े थे | हमको खड़ा देख कर कुछ लोग बोले लड़की जात है इनको भाई को जगह दे दे थोडा खिसक जाओ भाई | हम चुप खड़े थे | तो कुछ लोग बोले बिटिया बैठ जाओ कब तक ....खड़ी रहोगी !
हमने लाईन में खड़े लोगों की तरफ एक नजर डाली...तो बिना बोले रहा न गया...हमने कहा भाई हम खड़े हैं और दो तीन घण्टे खड़े सफर कर सकती हूँ भाई पर...जरा देखो ये चार बुजुर्ग जिनकी हालत देखो बीमार लग रहे हैं | जरा जगह इनको दे दीजियेगा | यह सुनने के बाद केवल एक थोडा सा खिसका | हमने कहा कि अगर ये बुजुर्ग लोग आपके सगे नाना, फूपा, बाबा -दादा होते तो क्या फिर भी आप अपनी सीट पर ऐसे ही बैठे रहते |
यह सुनकर तुरन्त चार लड़के उठे और उन बुजुर्ग को विंडो सीट मिल गयी वो मुस्कुरा रहे थे | उनमें से एक बुजुर्ग लड़खड़ाती आवाज में बोला कि बिटिया ये जो आगें की सीट पर प्रोफेसर साहिब बैठें हैं इनको मैंने ही पढ़ाया पर आज गरीब गुरू को देखकर मुंह फेरे बैठा हैं, सीट क्या देगा मुझे...
आगें बैठे व्यक्ति की नजरें शर्म से झुकीं थी |
बाद में सब लोग फिर अपनी-अपनी बातों में लग गये....
हम खड़े रहे हिलते - डुलते....झूला जैसा आनंद आ रहा था | वो सब बुजुर्ग पीछे गेट से प्यारी नजर से हमें देखते हुऐ उतर गये पर हम सोचते ही रह गये...
दोस्तों,
    रूपया चाहे कितना भी गिर जाये पर शायद इतना कभी नहीं गिरेगा जितना रूपया के लिये आज इंसान गिर गया.......

 ....प्लीज बुजुर्गों को सम्मान दें...


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम

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