कविता पाठ - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Thursday, September 7, 2017

कविता पाठ

"कभी कविता थी 

जो आज मुझ में घुल गयी"


https://www.youtube.com/watch?v=S84U5_LEcKI&feature=youtu.be



स्वहस्तरचित रचना
आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'
🙏🙏🙏

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