महिला सशक्तिकरण - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Saturday, September 2, 2017

महिला सशक्तिकरण


वंदे मातरम्


हिन्दुस्तान की प्राचीन आध्यात्मिक विचारधारा

    "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:"

हिन्दुस्तान को विश्व का प्रतिभाशाली, गौरवशाली, मर्यादाशाली, स्मृद्धिशाली, वैभवशाली, स्वच्छ गुणवत्तापूर्ण उत्पादनशील एवं विकासशील एवं विश्व विजयी अत्याधुनिक सैन्यशक्तिशाली, विश्वगुरू एवं अखण्ड़ स्वाधीन हिन्दुस्तान पुन: बनाने के लिये तथा समस्त हिन्दुस्तानी महिलाओं को सम्मानित एवं सशक्तिवान बनाने के लिये समस्त हिन्दुस्तानियों के आपसी सभ्य मानवीय स्वच्छ रिश्तों, मैत्री व सांस्कृतिक सम्बंधों के नैतिक गुणमूल्यों के सबका साथ व सबका विकास की नेक नियति व नेकनीति के सत्यवादी हिन्दुधर्म एवं परोपकारी हिन्दु कर्म की समस्त हिन्दुस्तानियों को पुन: मतिवान बनाने की हिन्दुस्तान की पूर्वनिर्धारित व पूर्व प्रचलित आध्यात्मिक विचारधारा की लोकतांत्रिक राजव्यवस्था संचालन की प्रगति के न्याय की न्याय पालिका की संघात्मक ईश्वरीय कार्यप्रणाली को हिन्दुस्तान में क्रियान्वित किये जाने हेतु हिन्दुस्तान के राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ परिवार के गणतांत्रिक अल्पसंख्यक आदिपरम्परागत सत्यवादी स्वंयसेवक जाटव उपवर्ण के हिन्दु साकार परमपिता परमात्मा स्वरूप हिन्दुस्तान के मुख्य न्यायाधीश की तथा हिन्दुस्तानी स्वंय सहायक संघ परिवार के मनतांत्रिक लघु संख्यक आदि परम्परागत परोपकारी स्वंय सहायक वाल्मीकि उपजाति के हिन्दु अजर, अमर व अटल मात्रशक्ति के निराकार जीवात्मा स्वरूप हिन्दुस्तान के सर्वोच्च मुख्य सहायक न्यायाधीश की जरूरत है जो हिन्दुस्तान की न्यायपालिका में काफी लम्बे समय से विचाराधीन करोड़ो अनावश्यक मामलों को निर्णीत कर सकें जिससे कि हिन्दुस्तान में स्वच्छ हिन्दुस्तानी समान नागरिक अचारसंहिता का गठन हो सके| क्योंकि बिना हिन्दुस्तान की मात्रशक्ति के सर्वोच्च  मुख्य सहायक न्यायाधीश के सबूत के, हिन्दुस्तान के सर्वोच्च मुख्य न्यायाधीश का संतुलित कोई भी वजन एवं वजूद नही है | अत: जब तक हिन्दुस्तान में उपरोक्त कार्यप्रणाली क्रियान्वित नही होती और जब तक समस्त मतिदान पीड़ित मतिहीन हिन्दुस्तानी अपने निजता के मौलिक मताधिकार के तहत अपने मतिदान का बहिष्कार नही करते और सबके विभाजन व सबके विनाश की विधायिका की संसदीय कार्यप्रणाली का अंत नही होता तब तक हिन्दुस्तान की समस्त महिलायें पूरी तरह से शिक्षित, रोजगारयुक्त, न्याययुक्त, सशक्तिवान, सुरक्षित एवं सम्मानित नही हो सकती |

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'

जय हिन्द ✊

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