कविता - बहुत कुछ बाकी है अभी... - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Sunday, April 29, 2018

कविता - बहुत कुछ बाकी है अभी...






ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना 


बाकी है अभी..... 


अभी तो चंद लफ्जों में समेंटा है तुझे 
एे! जिंदगी
अभी तो सूखे आँसुओं में दफ्न तेरी मुस्कुराहटें
लिखना बाकी है...

अभी तो खोखले किरदार में ढ़ाला है तुझे 
ऐ! जिंदगी 
अभी तो अपनी हारों को स्वीकार कर
रोशनी बिखेरना बाकी है...

अभी तो घुटन भरे रिश्ते में छिपाया है तुझे 
ऐ! जिंदगी 
अभी तो मुस्कुराहटों के गेटअप से 
समझौते का मेकअप उतारना बाकी है...

अभी तो वक्त के सच से झुठलाया है तुझे 
ऐ! जिंदगी
अभी तो अपनी आकांक्षाओं को महत्वाकांक्षाओं 
से तौलना बाकी है...

- ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना




10 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 02 मई 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. शुक्रिया मैम💐🙏

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 02 मई 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. शुक्रिया मैम🙏💐

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  3. बेहतरीन, शानदार, लाजवाब....
    वाह!!!

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    1. शुक्रिया सु़धा जी💐🙏

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  4. चंद लफ्ज़ों की पूरी बानगी ...

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    1. शुक्रिया अमृता जी🙏💐

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  5. अभी तो घुटन भरे रिश्ते में छिपाया है तुझे
    ऐ! जिंदगी
    अभी तो मुस्कुराहटों के गेटअप से
    समझौते का मेकअप उतारना बाकी है..-
    वाह !!!!!! बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति प्रिय आकांक्षा जी | सस्नेह शुभकामना |

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    1. शुक्रिया रेनू जी🙏💐

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