चुनाव तो नेक व एक सिस्टम का होना जरूरी - - समाज और हम

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Thursday, August 9, 2018

चुनाव तो नेक व एक सिस्टम का होना जरूरी -


चुनाव तो नेक व एक सिस्टम का ही करना जरूरी -
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भारतीय संविधान के रचयिता डा. भीमराव अम्बेडकर ने, भारतीय संविधान को, भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के हाथों में सुपुर्द कर, भारतीय संविधान सभा में कहा था कि ये भारतीय संविधान बड़े परिश्रम से तैयार किया गया है। ये भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा एवं लिखित संविधान है। यह समस्त भारतीयों को मतदान करने का मताधिकार देता है।                 
     इस संविधान को लागू करने वालों ने यदि इसे अपनी नेक नियति एवं नेक नीति से लागू किया तो यह संविधान उन्हें विश्व के सबसे बड़े अच्छे सद्परिणाम देगा और इस संविधान को लागू करने वालों ने यदि इसे अपनी बदनियति व बदनीति से लागू किया तो यह संविधान उन्हें विश्व के सबसे बड़े बुरे दुष्परिणाम देगा।
        उनके कहने का भावार्थ यह था कि यदि समस्त भारतीय मूल निवासी मतदाताओं ने इस संविधान को नेक नियति एवं नेक नीति से लागू किया और अपना मतिदान भारत की पूर्वनिर्धारित व पूर्वप्रचलित संगठन एवं विकास की लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था संचालन की स्वदेशी उपन्यायपालिका की उपसंघात्मक स्वचालित ईश्वरीय कार्य प्रणाली को किया तो यह संविधान उन्हें विश्व के सबसे बड़े अच्छे सद्परिणाम देगा और यदि समस्त भारतीय मूल निवासी मतदाताओं ने इस संविधान को अपनी बदनियति एवं बदनीति से लागू किया और अपना मतदान भारत के विभाजन एवं विनाश की अलोकतांत्रिक राज्य दुर्व्यव्यवस्था संचालन की फर्जी स्वदेशी यानि विदेशी विधायिका की संसदीय कार्य प्रणाली को किया तो यह संविधान उन्हें विश्व के सबसे बड़े बुरे दुष्परिणाम देगा।
                अब यह तो समस्त अन्याय पीड़ित एवं बेरोजगार वर्तमान भारतीय मूल निवासी मतदाताओं को अपने सर्वोच्च न्यायिक जनजीवन व जीविका हित में अपने अनुशासित सभ्य न्याय व अपने स्वाधीन भव्य रोजगार प्राप्ति के मौलिक अधिकार को पाने के लिए एवं अपने भारत के मूल निवासी अनुशासित सभ्य न्याययुक्त व अपने स्वाधीन भव्य रोजगार युक्त भारतीय नागरिक होने की पहचान का अत्यंत महत्वपूर्ण, अनिवार्य एवं परमावश्यक सर्वोच्च न्यायिक अभिलेखीय साक्ष्य भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र व पहचान पत्र पाने के लिए स्वंय ही अपना निर्णय करना है कि उन्हें अपना मतदान भारत की पूर्व निर्धारित व पूर्व प्रचलित संगठन एवं विकास की स्वदेशी उपन्यायपालिका की उपसंघात्मक स्वचालित ईश्वरीय कार्य प्रणाली को करना है अथवा उन्हें अपना मतदान भारत के विभाजन एवं विनाश की फर्जी स्वदेशी यानि विदेशी विधायिका की संसदीय कार्य प्रणाली को करना है। भारत के मूल निवासी समस्त मतदाताओं को चुनाव तो नेक व एक सिस्टम का ही करना जरूरी है। 
       इस वास्ते भारतीय चुनाव आयोग को भारतीय चुनाव मतपत्रों में एवं भारतीय इलेक्शन वोटिंग मशीनों में दोनों प्रकार के सिस्टम का प्रतीक चुनाव चिन्ह स्पष्ट रूप से देना चाहिए जिससे कि भारत के समस्त मूल निवासी भारतीय मतदाता अपना मतदान करने से पूर्व यह आसानी से स्वंय निर्णीत कर सकें कि उन्हें अपना मतदान अपने सर्वोच्च न्यायिक जनजीवन व जीविका हित में किस सिस्टम को करना है। 

- ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना 

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