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फिल्म गंगूबाई ने किया हिंदू धर्म का अपमान


मुद्दा :  तुम्हारी सोच ही शौचालय है-

[गंगूबाई फिल्म ने स्वर्ग की तुलना वैश्या और कोठे से कर दी?] 

_ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना 



भारत अपनी आजादी/स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मना रहा है और कुछ तथाकथित फिल्म निर्देशक अपनी स्वच्छन्दता का नग्नोत्सव मना रहे हैं और सरेआम हिन्दू देवी-देवताओं का घोर अपमान करने पर तुले हैं। आइये! बात करते हैं उन तथाकथित बुद्धिजीवियों की जिनकी सोच ही शौचालय। अर्थात जिनकी सोच शौचालय से ही शुरू होती है और शौचालय में ही खत्म होती है। मैं स्पष्ट कर दूं कि जिस महिला पर ये फिल्म बनी है मैं उन पर कुछ नहीं बोल रही। मेरी प्रोब्लेम इस फिल्म के डॉयलॉग लेखक और डायरेक्टर से है। क्या कुछ तथाकथित वॉलीवुड लॉबी ने हिन्दुओं के अपमान का ऐजेंडा चला रखा है? कि किसी भी तरह हिन्दुओं को बिना अपमानित किये उनकी फिल्म नहीं चल सकती? मैं बात कर रही हूं फिल्म गंगू बाई की जिसे लीड किया है आलिया भट्ट ने। जो सेक्स वर्कर के दर्द पर आधारित है। उसमें एक डॉयलॉग जबरन जोड़ते हुए, सेक्स वर्कर के किरदार से कहलवाया गया है कि 'हमारे बिना तो स्वर्ग भी अधूरा' है, थोड़ी इज्ज़त तो देनी पड़ेगी। ज़रा कोई बताये कि एक तरफ़ यह हमारे इंद्र देवता की सभा की तुलना वेश्या के कोठे से करतीं हैं, स्वर्ग की अप्सराओं की तुलना यह वेश्याओं से कर रहीं हैं और दूसरी तरफ़ इनको इज्ज़त भी चाहिये, कमाल है। अब मेरा मुद्दा मेरा सवाल यह है कि इन्होंने स्वर्ग का ही जिक्र क्यों किया? बाकि अन्य धर्म में स्वर्ग को क्या कहते हैं वो शब्द क्यों नहीं बोला गया इनसे? जिनमें 72-73 होतीं हैं। इनको सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दू संस्कृति को गाली देनी है वो भी अपनी फिल्मों के माध्यम से। आपने ध्यान दिया होगा कि इन्हीं फिल्म वालों ने राम तेरी गंगा मैली फिल्म बनायी। ज़रा इन बेहूदों को बताओं कि गंगा तो भगवान शिव की हैं जिन्हें वह अपने शीष पर यानि जटाओं में धारण करते हैं और मैली? अरे! गंगा मां को मैली करने का सामर्थ्य कौन कर सकता है? आज सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें दिव्य माना जीवंत माना है लिखित में और बता दूं कि पूरी विज्ञान ने लग कर भी यह पता नहीं कर पाया कि आखिर! वो तीसरा तत्व कौन सा है जिससे गंगाजल में कीड़े नहीं पड़ते। तुम फिल्मों के नाम भी घटिया सोच कर रखते हो, ऐजेंडा कि हिंदूओं को मानसिक दु:खी कैसे करें। तुम्हारी ज्यादातर फिल्में हिंदू विरोधी बनती हैं बोलो क्यों? तुम लोगों को सेक्स वर्कर का दु:ख दिखा तो तुमने पूरी फिल्म बना ली चलो अच्छी बात। पर तुम लोगों की मानसिकता अगर इतनी ही निष्पक्ष और दयालु है तो तुम लोगों ने आज तक कश्मीरी पंडितों की महिलाओं के महादर्द पर फिल्में क्यों नहीं बनायी? तुमने हमारे हर देवी-देवता पर जबरन फिल्म और सीरियल बना डाले मनगढ़ंत। तुम लोगों ने हमारे चित्रगुप्त भगवान जो ब्रह्मांड के समस्त प्राणियों के शुभ और अशुभ कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं और उनके नीचे अनेकों यम कार्यरत हैं जो आत्माओं को ले आने का कार्य करते हैं पुलिस की तरह। पर तुम लोगों ने यम केनीचे हमारे आराध्य को मुंशी की तरह बैठा दिखा दिया। तुमने हमारे भगवान श्री कृष्ण जी की पवित्र रास लीला को अश्लीलता से जोड़ा और गाने बना डाले। जबकि भागवत महापुराण में भगवान श्री कृष्ण जी की आयु 7-8 वर्ष की थी जब उन्होंने महारास किया। वह दिव्य बालक थे जिनसे सखियाँ गोपियां दो उनकी अनन्य भक्त थीं उनकी बांसुरी और मासूम नृत्य देख कर भावविहल हो जाया करती थीं। जब उद्धव गोपी को ब्रह्म ज्ञान देने आये तो वे हँस कर बोली कि हृदय तो लालन के प्रेम वात्सल्य से भरा है छलक रहा है जगह ही नहीं, तुम्हारा ज्ञान कहां रखूं? ऐसा निष्कपट भक्ति प्रेम के नृत्य का नाम है महारास। तुम फिल्म वालों को हर जगह वासना ही क्यों दिखती है मेरी समझ के बाहर है।अरे ओ! फिल्म वालों अति बुद्धिमान प्राणियों जान लो कि स्वर्ग क्या है? अप्सरा का सही मतलब क्या है? और सोमरस का अर्थ क्या होता है?पवित्र भगवत गीता के अनुसार जो प्राणी श्रेष्ठ कर्म करता है उसे देहत्याग के बाद अन्य पशु वगैरह नहीं बनना पड़ता वह स्वर्ग में स्थान पाता है और स्वर्ग यानि दूसरा ग्रह.. दूसरी व्यवस्था जहां सबकुछ चैतन्य है। सबकुछ कल्पना से ज्यादा सुन्दर है। सुन्दर से मतलब जिनके कर्म सुन्दर है, उनमें सत्कर्मों का दिव्य तेज है। वहां पर जो स्त्रियां हैं वह सब सत्य बोलने वाली अत्यन्त तेजवान यानि सुन्दर हैं। तुम लोग की धारणा तुम्हारी घटिया सोच का परिणाम है कि स्वर्ग तुम्हें कोठा दिखता है धिक्कार है तुम्हारी घटिया मानसिकता पर। बता दूं कि अप्सरा मतलब - भागवत पुराण के अनुसार अप्सरा मतलब अत्यन्त पुण्यात्मा सत्कर्मों वाली अत्यन्त सुन्दर स्त्री से है। जो नृत्य कला में प्रवीण हैं और नृत्य के माध्यम से स्वर्ग की संस्कृति का बखान करती हैं। जैसे यहां कोई कुचिपुडी कत्थक कथकली मयूर नृत्य आदि करके यहां कि संस्कृति से अवगत कराते हैं और भगवान की कथाओं का प्रचार-प्रसार करते हैं। भागवत पुराण के अनुसार अप्सराओं का जन्म महर्षि कश्यप से कहीं ये भी वर्णित है कि कश्यप ऋषि की  दक्षपुत्री मुनि से हुआ भी माना जाता था। कामदेव का मतलब जन्म देने की व्यवस्था एक पद,, और रति  से भी कई अप्सराओं की उत्पत्ति बताई जाती है। अप्सराओं की उत्पत्ति के विषय में वर्णित है कि परमपिता ब्रह्मा जी ने इनकी उत्पत्ति की थी जिनमे से तिलोत्तमा प्रमुख प्रथम है। इसके अतिरिक्त कई अप्सराएं महान ऋषिओं की पुत्रियां भी थीं।ऋषि मतलब महान वैज्ञानिक।ज़रा सोचो! 
 ऋषियों पुत्रियाँ वैश्यावृत्ति करने का कभी सोच भी सकती हैं?  क्या बकवास गढ़ी है तुम बेहूदा किस्म के फिल्म वालों  ने। गौरतलब है कि प्राचीन भारतीय हिन्दू धर्म ग्रंथों में यक्ष, गंधर्व किन्नर, अप्सराएं देवताओं की श्रेणी में माने गए हैं। बता दें कि इन्द्र... इंद्र मतलब इन्द्र एक पद है एक व्यवस्था का नाम है जैसे प्रधानमंत्री एक पद है।इन्द्र की सभा में अप्सराएँ किन्नर गन्धर्व नृत्य गायन वादन के माध्यम से स्वर्ग आदि लोकों की दिव्य संस्कृति का वर्णन करते हैं। पुराणों के अनुसार यह भी कहा गया है कि इंद्र ने 108 ऋचाओं.. मतलब श्लोक,,अप्सरा साधना करके.. तप.. द्वारा  अन्य अप्सराओं को भी प्रकट किया था।वेद और पुराणों की गाथाओं में  देवराज इन्द्र के स्वर्ग में 11 अप्सराएं प्रमुख दिव्य सौंदर्य शक्तियां मानी गई हैं । -
जिनमें  अलग-अलग मान्यताओं में अप्सराओं की संख्या 108 से लेकर 1008 तक बताई गई है। जिनमें प्रमुख पुंजिकस्थला, मेनका, रम्भा, उर्वशी, और तिलोत्तमा रम्भा, कृतस्थली, प्रम्लोचा, अनुम्लोचा, वर्चा, पूर्वचित्ति, अम्बिका, अलम्वुषा, अनावद्या, अनुचना, अरुणा,अरोणा,असिता, बुदबुदा, चन्द्रज्योत्सना, देवी,  गुनमुख्या, गुनुवरा, हर्षा, इन्द्रलक्ष्मी, काम्या, कर्णिका, केशिनी, क्षेमा, लता, लक्ष्मना, मनोरमा, मारिची, मिश्रास्थला, मृगाक्षी, नाभिदर्शना, पूर्वचिट्टी, पुष्पदेहा, रक्षिता, ऋतुशला, साहजन्या, समीची, सौरभेदी, शारद्वती, शुचिका, सोमी, सुवाहु, सुगंधा, सुप्रिया, सुरजा, सुरसा, सुराता, उमलोचा, शशि, कांचन माला, कुंडला हारिणी, रत्नमाला, भू‍षणि, घृताची जोकि कश्यप ऋषि और  प्राधा की पुत्री थीं।)इसके अलावा पालनहारी भगवान श्री हरि विष्णु जी ने भी विश्व मोहिनी अप्सरा अवतार धारण किया था जिसमें उन्होंने धर्म और सत्य की स्थापना के लिये सागर मंथन के बाद अमृत कलश को अपने सुन्दर हाथों से समस्त देवताओं को पिला दिया था। अब सोचो! भगवान श्री हरि विष्णु का मोहिनी अप्सरा अवतार का मतलब सिर्फ लोककल्याण था जनकल्याण था सत्य और धर्म की रक्षा करना था ना कि वैश्यावृत्ति करना जोकि यही साबित करने पर तुम तथाकथित फिल्म वाले तुले हो। 
बात सिर्फ़ इतनी है कि एक समय में भारत में द्वापरकाल के बाद भगवान हरि से बेर रखने वाले कुछ षड्यंत्रकारी पंथ जन्में , कभी मुगल आक्रांतओं ने तो कभी डचों न कभी पुर्तगाली ने तो कभी अंग्रेजों ने कभी गद्दारों ने सबने मिलकर हमारी हिंदू मंदिरों उनमें रखी प्राचीन धरोहर ग्रंथों में जबर्दस्त छेड़छाड़ की जो आप जब पढेगें तो आपको महसूस होगा कि नहीं हमारे भगवान हमारे ऋषि-मुनि यह कदापि नहीं कर सकते। इन षडयंत्रकारियों ने सबकुछ विध्वंस करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी पर फिर भी हम हिन्दू हैं और हस्ती मिटेगी नहीं मिटाने से लगा लो आग चाहे तुम कितने ज्ञान खजाने में। बाकि रही बची कसर टीवी सीरियलों और फिल्म वालों ने पूरी कर दी। अब बात करते हैं सोमरस की तो सोमरस का मतलब सोम मतलब चंद्रमा यानि चंद्रग्रह पर मिलने वाला दिव्य जल समान पदार्थ। यानि अमृत। मंदोदरी ने भी चंद्रलोक से अमृत ले जाकर रावण तक को पुनर्जीवित कर लिया था बाद में विधि के विधान को सत्य मानकर भगवान श्री राम जी के आशीर्वाद से रावण को मुक्ति प्राप्त हुई और कहा जाता है उसका अवशेष आज भी लंका की पहाड़ी पर पत्थर के नीचे मौजूद है। सोमरस का मतलब है स्वर्ग ग्रह पर जो पीने का दिव्य पदार्थ है वह चंद्रमा का दिव्य जल है।इंद्रदेव की सभा में सत्कर्मों का भगवान की भक्ति का नशा है वहां ये टुच्चे सांसारिक दारू तुम तथाकथित लोगों की तरह चरस /गांजे के नशेड़ी नहीं हैं। तुम बेवकूफ़ों ने इसे सोमरस को भी शराब से जोड़ दिया... अरे!  जब वह ग्रह अलग है तो वहां का पेय पदार्थ पृथ्वी की शराब कैसे हो सकता है? अंतरिक्षयात्रियों का भी अंतरिक्ष वाला भोजन अलग होता होगा है न? इतनी सी बात समझ नहीं आती तुम सब को। हम लोगों को मूर्ख समझते हो कि कुछ भी दिखाओ और हम चुप स्वीकार करेंगे, कभी नहीं। हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान नहीं सहेगा हिन्दू। आगें बता दूं कि अप्सरा मेनका वृषणश्र (ऋग्वेद 1-51-13 पेज पर) अथवा कश्यप और प्राधा (महाभारत आदिपर्व, अढ़सठ-उन्नहत्तर पर) की पुत्री तथा ऊर्णयु नामक गंधर्व की पत्नी थी। अर्जुन के जन्म समारोह तथा स्वागत में इन्होंने नृत्य किया था वो भी पृथ्वी वासी रूप लेकर। दूसरी कथा में मेनका जब धरती पर आयी थीं तो इन्होनें अपने सुन्दर गायन से ऋषि विश्वामित्र जी का तप भंग कर दिया था और कहा कि अभी आपका मन पूरी तरह भगवान में स्थिर नहीं हैं, आप परीक्षा में असफल हुए। तो ऋषि ने विनम्रतापूर्वक कहा ठीक है फिर उन्होंने कहा आप दूसरे ग्रह से मेरी अतिथि हैं पृथ्वी के पदार्थों का सेवन कर सकेगीं? तो वह बोलीं इस रूप में तो नहीं। तब ऋषि विश्वामित्र जी ने बहुत बड़ी सी कढाई में शुद्ध घी गर्म करवा कर उस शुद्ध घी की सुगंध, उनको समर्पित की थी। इसी से वह तृप्त हो गयी थीं और ऋषि की बुद्धिमत्ता देखकर बहुत प्रभावित हुईं थीं और बोलीं हे! ऋषिवर आप अत्यंत ज्ञानी हैं, मुझे आपकी तपस्या भंग नहीं करनी चाहिए थी। बाद में वह धरती पर इंसान रूप में अवतरित हुईं तब ऋषि पत्नी बनी। डायरेक्ट नहीं। दूसरे ग्रह के लोगों का तेज - प्रताप का हम लोग सामना तक नहीं कर सकते विवाह तो बात ही छोडो। भगवत गीता में वर्णित है कि जब अर्जुन और संजय को भगवान श्री कृष्ण जी ने दिव्य दृष्टि दी थी तभी वह उनका भगवान विश्वरूप देख सके थे। बता दें कि इन दिव्य अप्सराओं की साधना दुर्जट पर्वत शिखर पर होती है। एक माह पूर्ण जप करना होता है। ये दिव्य रसायन प्रदान करती हैं जिससे व्यक्ति बली, निरोग व पूर्ण आयु, चिरयोवन प्राप्त करता है। इनकी साधना नदी किनारे व पहाड़ों पर करने का विधान है यदि घर के एकांत में भी करें तो फल मिलता है। परन्तु मन में किसी तरह की वासना होने पर अप्सरा सिद्धि नहीं मिलती। अप्सराओं मंत्र इस तरह जपना है- 'ॐ श्री शशि देव्या मा आगच्छागच्छ स्वाहा।'ॐ हूं हूं लीलावती कामेश्वरी अप्सरा प्रत्यक्षं सिद्धि हूं हूं फट् ।।स्वाहा और  फट् तब जब यज्ञ कर रहे हो.. जप में नम: लगा लें.कम्पलीट जाप के बाद. ॐ अप्सरा समर्पयामि अस्तु बोलकर हाथ जोड़ें। सिद्धि के लिए पूर्णिमा और अमावस्या चंद्र सूर्य ग्रहण सही समय माने गये हैं।अंत में मैं आप वॉलीवुड वाले बुद्धिजीवियों से बस यही कहना चाहूंगी कि भगवान ने तुम वॉलीवुड वालों को इतना टेलेंट दिया है इसका प्रयोग सकारात्मक फिल्मों को बनाकर क्यों नहीं करते आप लोग।? आप समय निकाल कर हिन्दू धर्म ग्रंथों का बारीकी से अध्ययन करो फिर फिल्म बनाओ। ज़रा सी शर्म करो भारत में ही रहते हो और भारतीय संस्कृति का अपमान करते हो , किस तरह के प्राणी हो? .. कृपया मनुष्य बनो? मनुर्भव:। भगवान तुम लोगों को सद्बुद्धि प्रदान करें। 

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