सिर्फ बातें
बातें
..........अंगलियों के पोरों पर
गणना की सितारों की
इस अंधेरी दुनिया से
आशा की उजालों की
घर में रखा है फूटा बर्तन
बातें की हजारों की
कंकरीट पर रात बिताकर
सपने देखे महलों के
इस भिकारी दुनिया से
आशा की मिल जाने की
एक पुरानीबात छिपाकर
कोशिश की सो जानेकी
मुट्ठी में छिपाये आँसू की आँधीं
बातें की मुस्कुराने की
इस मूर्झित दुनिया से
आशा की स्व: जगाने की
पड़ोसी का नाम पता नही
बातें की मंगल पर जाने की
स्वरचित रचना
लेखिका
आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उत्तर प्रदेश
बहुत सुन्दर रचना। पीड़ा है किसी की व्यक्त आप कर रही हैं।
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