March 2013 - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Sunday, March 10, 2013

March 10, 2013 0
आज प्रेम को .................... आज  जिस्म को ज़िस्म से इतना लपेटा जाता है,इतना लपेटा जाता है  क़ि लिपट -लिपट कर घुटन से उसका द...
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March 10, 2013 1
सच समाज का  .................     खुबसूरत धुंध  ........................ मेरी अखियों को मिला ख्वाब सुनहरा था मेरे दिल को...
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Saturday, March 9, 2013

Thursday, March 7, 2013

होली गीत

March 07, 2013 0
                                          होली गीत  ..होली के दिन .श्री कृष्ण जी अपनी प्राणप्रिये राधे से कहते हैं ...देखो क्या कहते है...
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रंग होली के

March 07, 2013 2
रंग होली के  ......................   रंग होली के सबको सुहाने लगते हैं  अरे ! अस्सी साल के दादा भी  आज दीवाने लगते हैं   रंग...
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