October 2012 - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Wednesday, October 31, 2012

October 31, 2012 0
कन्हैया जी ...... ********************************************************** कन्हैया जी मुझे तुम बिन अब न ज़ीना  कब राह त...
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October 31, 2012 0
  श्री कृष्ण जिन्हें बनाते हैं ... .................... श्री कृष्ण जिन्हें बनाते हैं उन्हें कोई नहीं मिटा पाए  श्री कृ...
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Monday, October 29, 2012

October 29, 2012 0
                          जय माँ गंगे            ***************   जय माँ गंगे जय माँ   गंगे       जय   तारनहारी   माँ गंगे  ...
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Friday, October 26, 2012

October 26, 2012 0
दहेज़ कैंसर  ब्याह + स्वार्थ = (बाजार ) ........................................................... आज कल अख़बार मैं विज्ञाप...
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Thursday, October 25, 2012

October 25, 2012 0
जिंदगी का नाम जिंदगी है.... .............................. .............................. जिंदगी का नाम जिंदगी है  जिंदगी काँटों...
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Wednesday, October 24, 2012

स्वप्न

October 24, 2012 0
             LoIu ||कुछ स्वप्न इतने ज़ालिम होते हैं  कि स्वप्न को ही एक स्वप्न बना कर  छोड़ देते हैं||     vkdka{kk lDlsu...
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Friday, October 19, 2012

October 19, 2012 0
 रिश्ता   ...     ( माँ और बेटी का ) ......................... स्कूल मैं डांट पड़ी तो घर आकर  माँ स...
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