2013 - समाज और हम

समाज के समन्दर की मैं एक बूँद और प्रयास वैचारिक परमाणुओं को संग्रहित कर सागर की निर्मलता को बनाए रखना.

Monday, May 13, 2013

Friday, April 12, 2013

Sunday, March 10, 2013

March 10, 2013 0
आज प्रेम को .................... आज  जिस्म को ज़िस्म से इतना लपेटा जाता है,इतना लपेटा जाता है  क़ि लिपट -लिपट कर घुटन से उसका द...
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March 10, 2013 1
सच समाज का  .................     खुबसूरत धुंध  ........................ मेरी अखियों को मिला ख्वाब सुनहरा था मेरे दिल को...
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Saturday, March 9, 2013

Thursday, March 7, 2013

होली गीत

March 07, 2013 0
                                          होली गीत  ..होली के दिन .श्री कृष्ण जी अपनी प्राणप्रिये राधे से कहते हैं ...देखो क्या कहते है...
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रंग होली के

March 07, 2013 2
रंग होली के  ......................   रंग होली के सबको सुहाने लगते हैं  अरे ! अस्सी साल के दादा भी  आज दीवाने लगते हैं   रंग...
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Sunday, January 6, 2013

Friday, January 4, 2013

Thursday, January 3, 2013